Salary Account vs Savings Account: हर महीने पैसा आते ही सैलरी अकाउंट में ही पड़ा रहता है या दूसरे सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं? दोनों बैंक अकाउंट में पैसा रखना अलग-अलग काम आ सकता है। आइए समझते हैं किस अकाउंट का इस्तेमाल कब करना बेहतर है।
सैलरी अकाउंट असल में बैंक का ऐसा सेविंग अकाउंट होता है, जो नौकरी करने वाले लोगों की सैलरी पाने के लिए खोला जाता है। इसमें कंपनी हर महीने सैलरी भेजती है। दूसरी तरफ, सामान्य सेविंग अकाउंट का इस्तेमाल आप अपनी बचत रखने, पैसे ट्रांसफर करने, बिल भरने और रोजमर्रा के बैंकिंग कामों के लिए कर सकते हैं। सैलरी अकाउंट में भी बैंक की शर्तों के अनुसार ब्याज मिल सकता है, क्योंकि यह आमतौर पर सेविंग अकाउंट ही होता है। हालांकि, ब्याज दर बैंक और अकाउंट के प्रकार पर निर्भर करती है।
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सैलरी अकाउंट की खास बातें
सैलरी खाते में आती है।
कई बैंकों में मिनिमम बैलेंस की जरूरत नहीं होती है।
डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
कुछ बैंक एक्स्ट्रा सुविधाएं या ऑफर दे सकते हैं।
नौकरी बदलने या सैलरी आना बंद होने पर अकाउंट की शर्तें बदल सकती हैं।
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सेविंग अकाउंट में पैसा रखने का क्या फायदा है?
अगर आपके पास हर महीने खर्च के बाद कुछ पैसा बचता है, तो उसे अलग सेविंग अकाउंट में रखना आपके लिए सही हो सकता है। इससे सबसे बड़ा फायदा ये हो सकता है कि खर्च और बचत का पैसा अलग-अलग दिखाई देता है। जैसे अगर सैलरी ₹50,000 आती है और आप ₹10,000 बचाना चाहते हैं, तो उस रकम को अलग खाते में ट्रांसफर करके बाकी पैसा खर्च के लिए रख सकते हैं। इस तरीके से आपको ये समझने में आसानी रहती है कि कितना पैसा बचा हुआ है। लेकिन सेविंग अकाउंट खोलने से पहले उसकी मिनिमम बैलेंस रिक्वायरमेंट, इंट्रेस्ट रेट, ATM चार्जेस और दूसरे बैंकिंग शुल्क जरूर देखें। हर बैंक और हर अकाउंट की शर्तें एक जैसी नहीं होती हैं।
इसका जवाब आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर सैलरी अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की जरूरत नहीं है, बैंक की सुविधाएं आपके लिए ठीक हैं और आप उसी खाते से अपने डेली के खर्च संभालते हैं, तो पैसा वहीं रखना आसान हो सकता है। वहीं, अगर आपका मकसद बचत को खर्च के पैसे से अलग रखना है, तो अलग सेविंग अकाउंट फायदेमंद हो सकता है।
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सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर अकाउंट न चुनें
कई लोग सोचते हैं कि जिस सेविंग अकाउंट में ज्यादा ब्याज मिल रहा है, पूरा पैसा वहीं रख देना चाहिए। लेकिन सिर्फ ब्याज देखना पर्याप्त नहीं है। अकाउंट चुनते समय कुछ बातों को भी जरूर देखना चाहिए।
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सेविंग अकाउंट का ब्याज रेट कितना है?
मिनिमम बैलेंस कितना रखना है?
ATM या डेबिट कार्ड के क्या चार्जेस हैं?
कितने फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन मिलते हैं?
ऑनलाइन ट्रांसफर पर कोई फीस है या नहीं?
सैलरी बंद होने पर सैलरी अकाउंट का स्टेटस क्या होगा?
बैंक की दूसरी शर्तें क्या हैं?
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। सैलरी अकाउंट और सेविंग अकाउंट की ब्याज दरें, मिनिमम बैलेंस, चार्जेस, सुविधाएं और नियम बैंक के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं और समय के साथ बदल भी सकते हैं। किसी भी बैंकिंग या वित्तीय फैसले से पहले अपने बैंक की आधिकारिक शर्तें जरूर चेक करें।
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