
Shopclues Rise and Fall Story: कभी भारत का उभरता हुआ यूनिकॉर्न रहा ShopClues आज स्टार्टअप दुनिया में एक केस स्टडी बन चुका है, कैसे तेजी से ऊंचाई पर पहुंची कंपनी उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती है। 10,000 करोड़ की वैल्यूएशन से गिरकर महज 700 करोड़ के आसपास सिमटना सिर्फ एक बिजनेस फेलियर नहीं, बल्कि नए एंटरप्रेन्योर के लिए बड़ा सबक है। जानिए पूरी डिटेल।
संजय सेठी ने IIT-BHU से इंजीनियरिंग की और बाद में IIT Delhi से टेक्नोलॉजी में आगे की पढ़ाई की। करीब 15 साल तक eBay जैसी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने 2011 में संदीप अग्रवाल और राधिका घई के साथ मिलकर ShopClues (शॉपक्लूज) की शुरुआत की।
ShopClues ने एक अलग रास्ता चुना, ब्रांडेड नहीं, बल्कि सस्ते और अनब्रांडेड सामान। छोटे शहरों Tier-2, Tier-3 पर फोकस किया, ताकि लोगों को कम दाम, ज्यादा विकल्प मिले। यह मॉडल तेजी से पॉपुलर हुआ और 2016 तक कंपनी $1.1 बिलियन (₹10,000 करोड़) की वैल्यूएशन तक पहुंच गई।
शुरुआत में Amazon और Flipkart बड़े शहरों में सीमित थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने छोटे शहरों में एंट्री ली, ShopClues का सबसे बड़ा फायदा खत्म हो गया। बेहतर डिलीवरी नेटवर्क, भारी डिस्काउंट, मजबूत ब्रांड भरोसा, धीरे-धीरे ग्राहक बड़ी कंपनियों की तरफ शिफ्ट होने लगे।
सिर्फ सस्ता होना काफी नहीं होता
क्वालिटी कंट्रोल की अनदेखी भारी पड़ी
बड़े प्लेयर्स से मुकाबले की तैयारी नहीं थी
अंदरूनी विवाद ने कंपनी को कमजोर किया
भरोसा खोना सबसे बड़ी हार होती है
लगातार गिरावट के बाद 2019 में ShopClues को सिंगापुर की Qoo10 ने खरीद लिया। $70–100 मिलियन में डील हुई। अगर आप नया बिजनेस शुरू कर रहे हैं, तो याद रखें प्राइस नहीं, भरोसा बिकता है। ग्रोथ नहीं, सस्टेनेबिलिटी जरूरी है। यही 5 सबक आपको अगला ShopClues बनने से बचा सकते हैं।
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