'डायमंड किंग' सवजी ढोलकिया की कहानी: जेब में थे सिर्फ 12 रुपए, खड़ी कर दी 15000 करोड़ की कंपनी

Published : Apr 11, 2026, 04:46 PM ISTUpdated : Apr 11, 2026, 04:54 PM IST
Savji Dholakias Journey

सार

'डायमंड किंग' सवजी ढोलकिया ने सिर्फ 12 रुपये से 15,000 करोड़ की कंपनी बनाई। वे अपने कर्मचारियों को दिवाली पर कार और घर जैसे महंगे तोहफे देने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका मानना है कि कर्मचारियों की खुशहाली ही कंपनी की सफलता है।

नई दिल्ली: कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। ये बिल्कुल शून्य से शुरू होती हैं और आसमान तक पहुँच जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है सवजी ढोलकिया की, जिन्होंने न सिर्फ़ अपना एक बड़ा बिजनेस एम्पायर खड़ा किया, बल्कि हज़ारों लोगों की ज़िंदगी भी बदल दी।

'डायमंड किंग' सवजी ढोलकिया की कहानी

एक वक्त था जब सवजी ढोलकिया गुजरात के एक आम नौजवान थे। जब वो भारत की 'डायमंड सिटी' कहे जाने वाले सूरत पहुँचे, तो उनकी जेब में सिर्फ़ 12 रुपये थे। ये पैसे भी उन्होंने अपने चाचा से उधार लिए थे। सूरत में उनके पास नौकरी ढूँढ़ने के अलावा कोई और चारा नहीं था। लेकिन इसके बाद उन्होंने जो कंपनी बनाई, 'हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स', वो आज भारत की सबसे बड़ी डायमंड एक्सपोर्ट कंपनियों में से एक है। आज उनकी इस डायमंड कंपनी की कुल कीमत करीब 15,000 करोड़ रुपये है। बिजनेस की दुनिया में लोग उन्हें 'डायमंड किंग' के नाम से जानते हैं।

कर्मचारियों के लिए कुबेर से कम नहीं

यह नाम सिर्फ उनके बिजनेस की वजह से नहीं है, बल्कि उनके दरियादिल कामों की वजह से भी है। हर साल दिवाली पर, हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा कार्यक्रम करती है। यहाँ कर्मचारियों को गिफ्ट में सिर्फ मिठाई के डिब्बे या बोनस चेक नहीं मिलते। ढोलकिया अपने कर्मचारियों को कार, घर और हीरे के गहने तोहफे में देते हैं। एक बार तो उन्होंने एक ही प्रोग्राम में 1200 कारें और 400 कर्मचारियों को घर के लिए प्लॉट गिफ्ट कर दिए थे। खास बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर लोग उनकी फैक्ट्री में काम करने वाले डायमंड कटर और पॉलिशर थे, कोई बड़े मैनेजर या अधिकारी नहीं।

सालों से उनका यह दरियादिली का सिलसिला जारी है। उनका सपना है कि उनकी कंपनी में काम करने वाले हर व्यक्ति के पास अपना घर और कार हो। वो इसे अपनी उदारता नहीं, बल्कि कर्मचारियों की ज़रूरत मानते हैं। वो कहते हैं, "आप जितना ज़्यादा देते हैं, आपको उतना ही ज़्यादा मिलता है।" उनका मानना है कि अगर किसी कंपनी के कर्मचारी अपनी ज़िंदगी चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो वो कंपनी कभी सफल नहीं हो सकती।

उनकी यही सोच तय करती है कि उनकी कंपनी कैसे चलती है। जो कर्मचारी लंबे समय से कंपनी के साथ हैं, उन्हें समय-समय पर ऐसे ही बड़े तोहफे मिलते हैं। इससे कंपनी में अच्छे लोग टिके रहते हैं, जो बिजनेस को और मजबूत बनाता है।

गांवों में बनवा रहे हैं झीलें

अपने बिजनेस के अलावा, ढोलकिया गुजरात के ग्रामीण इलाकों में झीलें बनवाने के लिए भी पैसा देते हैं। पानी की कमी उन इलाकों की एक बड़ी समस्या है, जिसका सीधा असर वहाँ के किसानों पर पड़ता है। इस तरह, सवजी ढोलकिया सिर्फ एक बड़े बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक दरियादिल इंसान के तौर पर भी जाने जाते हैं।

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