
बिजनेस डेस्क। दुनिया की मशहूर और सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला (Tesla) ने क्रिप्टोकरंसी बिटकॉइन में 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। बता दें कि टेस्ला के फाउंडर एलन मस्क (Elon Musk) ने एक खास पॉलिसी के तहत डिजिटल करंसी में इतना बड़ा निवेश किया है। कंपनी की योजना इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जल्द ही डिजिटल करंसी को पेमेंट के लिए मंजूर करना है। टेस्ला ने सोमवार को यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (U.S. Securities and Exchange Commission) के साथ फाइलिंग में अपनी नई स्ट्रैटजी का खुलासा किया है।
बिटकॉइन में आया उछाल
बता दें कि वर्चुअल करंसी बिटकॉइन में 14 फीसदी का उछाल आया है। इसकी कीमतें पिछले वर्षों के दौरान तेजी से बढ़ी हैं। बीच में बिटकॉइन की कीमतों में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन फिर यह ऊंचाई पर है। वहीं, टेस्ला के शेयर भी ऊंचाई पर हैं। कंपनी ने अपनी चौथी तिमाही की रिपोर्ट में कहा था कि उसके पास 19.4 अरब डॉलर की नकदी उपलब्ध है।
बढ़ रहा है बिटकॉइन का इस्तेमाल
बिटकॉइन (Bitcoin) का इस्तेमाल अब बढ़ता जा रहा है। यह एक वर्चुअल करंसी है, लेकिन कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लेन-देन के लिए इसे मंजूरी मिली है। पेपैल (PayPal) ने भी अपने प्लेटफॉर्म पर बिटकॉइन के जरिए ट्रांजैक्शन को मंजूरी दे दी है। इसका मतलब है कि पेपैल के जरिए किसी भी तरह के ट्रांजैक्शन में बिटकॉइन का इस्तेमाल पेमेंट के लिए किया जा सकता है।
बिटकॉइन को लेकर भारत में गाइडलाइन नहीं
भारत में क्रिप्टोकरंसी को लेकर अभी तक कोई गाइडलाइन तय नहीं की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2018 में क्रिप्टोकरंसी को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें क्रिप्टोकरंसी से जुड़े किसी भी तरह के ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2020 में रिजर्व बैंक द्वारा क्रिप्टोकरंसीज पर लगाए गए प्रतिबंध को खारिज कर दिया था। फिलहाल, भारत में क्रिप्टोकरंसी में निवेश कोई अपने रिस्क पर कर सकता है, क्योंकि इसके लिए कोई रेग्युलेटरी अथॉरिटी नहीं है।
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