BankMerger: एक अप्रैल के बाद इतिहास बन जाएगा इन बैंकों का नाम, जानें कौन-कौन बैंक हैं विलय में शामिल

Published : Mar 29, 2020, 01:21 PM IST
BankMerger: एक अप्रैल के बाद इतिहास बन जाएगा इन बैंकों का नाम, जानें कौन-कौन बैंक हैं विलय में शामिल

सार

देश में इस वक्त लॉकडाउन है लेकिन इस बीच देश के सबसे 10 बड़े बैंकों का विलय होने जा रहा है इस लॉकडाउन के बीच 6 बैंकों का विलय होगा

नई दिल्ली: देश में इस वक्त लॉकडाउन है लेकिन इस बीच देश के सबसे 10 बड़े बैंकों का विलय होने जा रहा है। इस लॉकडाउन के बीच 6 बैंकों का विलय होगा। 1 अप्रैल से देश के 6 सरकारी बैंकों का अस्तित्व बदल जाएगा। इसके साथ ही ग्राहक और​ डिपॉजिटर्स भी अब नए बैंक के ग्राहक बन जाएंगे। इस विलय के बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या 12 रह जाएगी। साल 2017 में देश में सरकारी बैंकों की संख्या 27 थी। इससे पहले देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हुआ था।

विलय-1
पंजाब नैशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (दूसरा सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-17.95 लाख करोड़ रुपये)

विलय-2
केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक (चौथा सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-15.20 लाख करोड़ रुपये)

विलय-3
यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक (पांचवां सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-14.6 लाख करोड़ रुपये)

विलय-4
इंडियन बैंक, इलाहाबाद बैंक (सातवां सबसे बड़ा बैंक, कारोबार-8.08 लाख करोड़ रुपये)

दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा PNB

योजना के मुताबिक, यूनाइडेट बैंक ऑफ इंडिया (UBI) तथा ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) का पंजाब नैशनल बैंक (PNB) में विलय होगा, जिससे यह दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा।

ग्राहकों पर क्या असर होगा

ग्राहकों को नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है। जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड मिलेंगे, उन्हें नए डिटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) आदि में अपडेट करवाने होंगे। SIP या लोन EMI के लिए ग्राहकों को नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है।

नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड इशू हो सकता है। फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा। जिन ब्याज दरों पर व्हीकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं होगा। कुछ शाखाएं बंद हो सकती हैं, इसलिए ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ सकता है। मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा।
 

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