FD Return: 3 साल की FD पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहे ये पांच बैंक, आप भी निवेश कर पा सकते हैं बेहतर रिटर्न

Published : Nov 13, 2022, 06:07 PM IST
 FD Return: 3 साल की FD पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहे ये पांच बैंक, आप भी निवेश कर पा सकते हैं बेहतर रिटर्न

सार

महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक बाजार से अतिरिक्त तरलता (Cash Flow) खींच लेता है। इसके लिए वो अक्सर रेपो रेट को बढ़ा देता है। रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक FD पर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपना पैसा बैंक में रखें। फिलहाल एफडी पर सबसे ज्यादा ब्याज इन बैंकों में मिल रहा है। 

Fixed Deposit Interest Rates: महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक बाजार से अतिरिक्त तरलता (Cash Flow) खींच लेता है। इसके लिए वो अक्सर रेपो रेट को बढ़ा देता है। मई से लेकर अब तक रिजर्व बैंक कई बार रेपो रेट में बढोतरी कर चुका है। रेपो रेट बढ़ने से जहां लोन महंगे होते हैं, वहीं बैंक एफडी (Fixed Deposit) पर ब्याज बढ़ा देते हैं। ऐसा इसलिए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने पैसे फिक्स्ड डिपॉजिट में रखें। यही वजह है कि कई ऐसे बैंक भी हैं, जो एफडी पर फिलहाल 7% या उससे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। आइए जानते हैं, ऐसे ही बैंकों के बारे में। 

कुछ बैंक हैं, जो एफडी पर 7 फीसदी से उससे ज्यादा का ब्याज दे रहे हैं। यही वजह है कि निवेशक अपना पैसा एफडी में लगा रहे हैं। एफडी में निवेश करने पर कोई जोखिम भी नहीं होता है। यही वजह है कि लोग ज्यादा से ज्यादा पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना चाहते हैं। 

किस बैंक FB में मिल रहा कितना ब्याज?

बैंकब्याज दर
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक7.5%
DCB बैंक7.5%
Bandhan बैंक7%
City Union Bank7%
Karur Vysya Bank7%

रेपो रेट बढ़ा तो बढ़ सकती हैं FD की ब्याज दरें : 
रिजर्व बैंक बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए आने वाले समय में रेपो रेट को और बढ़ा सकता है। अगर रेपो रेट बढ़ता है तो बैंक एक बार फिर एफडी की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। अगर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो निवेशक ज्यादा से ज्यादा अपना पैसा इसमें इन्वेस्ट करेंगे। 

एफडी करें तो चुनें ये ऑप्शन : 
अगर कोई इन्वेस्टर अपना पैसा एफडी में लगाना चाहता है तो उसे ऑटो-रिन्यूवल ऑप्शन से बचना चाहिए। बैंक ज्यादातर एफडी कराने वाले कस्टमर को ऑटो-रिन्यूवल ऑप्शन ही ऑफर करते हैं। अगर कस्टमर इस ऑप्शन को चुनते हैं तो बैंक मैच्योरिटी के वक्त इसे करेंट इंटरेस्ट के साथ उसी अवधि के लिए रिन्यू कर देते हैं। करेंट इंटरेस्ट रेट पिछली ब्याज दर से कम या ज्यादा हो सकता है। इससे निवेशकों को नुकसान भी हो सकता है। 

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