Train Side Lower Seat Booking Tricks: ट्रेन में साइड लोअर सीट चाहिए? ये 4 ट्रिक्स अपनाइए

Published : May 29, 2026, 10:04 AM IST
Train Side Lower Seat

सार

How to Get Side Lower Berth in Train: ट्रेन में साइड लोअर सीट आखिर कैसे मिलती है? क्या इसके लिए कुछ अलग से करना पड़ता है? टिकट बुक करते समय अपनी पसंदीदा सीट पाने के लिए आपके पास IRCTC ऐप में क्या-क्या ऑप्शंस मौजूद हैं? 

Train Ticket Seat Selection Tips: ट्रेन में सफर करने का असली मजा तब आता है, जब खिड़की के पास वाली सीट मिल जाए। अगर वह सीट साइड लोअर (Side Lower) हो, तो सफर का आनंद दोगुना हो जाता है। दिन में आराम से बैठकर बाहर का नजारा देखिए और रात में बिना किसी डिस्टर्बेंस के सो जाइए। ज्यादातर लोगों को लगता है कि साइड लोअर सीट मिलना सिर्फ किस्मत का खेल है, लेकिन ऐसा नहीं है! IRCTC ऐप और वेबसाइट पर कुछ ऐसे स्मार्ट तरीके और बुकिंग नियम हैं, जिनका इस्तेमाल अगर सही से किया जाए, तो साइड लोअर सीट मिलने के चांस काफी बढ़ जाते हैं। चलिए, आज सिंपल तरह से समझते हैं कि आप अपनी अगली यात्रा में यह पसंदीदा सीट कैसे पा सकते हैं...

'Reservation Choice' फीचर का सही इस्तेमाल

जब आप IRCTC ऐप या वेबसाइट पर पैसेंजर डिटेल्स भरते हैं, तो नीचे स्क्रॉल करने पर आपको 'Other Preferences' या 'Reservation Choice' का एक ऑप्शन मिलता है। लोग अक्सर इसे बिना देखे आगे बढ़ जाते हैं, जबकि यही आपके लिए सबसे बड़ा मौका होता है। आप टिकट बुक करते समय 'Berth Preference' में Side Lower (SL) चुनें। इसके ठीक नीचे एक ड्रॉपडाउन मेन्यू होता है, जिसमें लिखा होता है- 'Book only if requested berth is allotted' यानी टिकट तभी बुक हो जब मांगी गई सीट मिले। अगर आप इसे सेलेक्ट कर लेते हैं, तो सिस्टम पूरी कोशिश करेगा कि आपको साइड लोअर ही मिले। अगर वह उपलब्ध नहीं होगी, तो आपका टिकट बुक नहीं होगा और आपके पैसे अटकने से बच जाएंगे।

कोटा नियमों की मदद से

भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, लोअर और साइड लोअर सीटें कुछ खास लोगों के लिए रिजर्व (आरक्षित) रखी जाती हैं। ये कोटा (Quota) 60 साल से ऊपर के पुरुष, 45 साल से ऊपर की महिलाएं और गर्भवती (Pregnant) महिलाओं के लिए होता है। अगर आप अपने माता-पिता या दादा-दादी के लिए टिकट बुक कर रहे हैं, तो हमेशा 'General Quota' की जगह 'Ladies' या 'Senior Citizen' कोटा चुनें। इस कोटे में बुकिंग करने पर सिस्टम सबसे पहले साइड लोअर और लोअर सीटें ही अलॉट करता है।

टाइमिंग का भी फर्क पड़ता है

रेलवे का सीट अलॉट करने का सॉफ्टवेयर (Algorithim) एक खास तरीके से काम करता है। वह ट्रेन का संतुलन बनाए रखने के लिए सबसे पहले कोच के बीच की सीटों को भरता है और लोअर सीटों को प्राथमिकता देता है। अगर आप सफर की तारीख से 2-3 महीने पहले (Advance Booking) टिकट बुक करते हैं, तो ट्रेन खाली होने के कारण आपके द्वारा चुनी गई 'Side Lower' प्रेफरेंस को सिस्टम तुरंत स्वीकार कर लेता है। जैसे-जैसे सीटें भरती हैं, चॉइस मिलने की उम्मीद कम हो जाती है।

चार्ट बनने के बाद खाली सीटों का फायदा उठाएं

कई बार ऐसा होता है कि सीनियर सिटीजन कोटे की या वीआईपी कोटे की साइड लोअर सीटें आखिरी समय तक खाली रह जाती हैं। ट्रेन छूटने से पहले जब पहला चार्ट (First Chart) बनता है, तब IRCTC ऐप पर 'Train Berth Availability' या 'Charts/Vacancy' वाले ऑप्शन पर जाएं। यहां आपको दिख जाएगा कि किस कोच में कौन सी साइड लोअर सीट खाली रह गई है। आप उसे Current Booking के जरिए तुरंत अपने नाम पर बुक कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य नियमों और IRCTC के मौजूदा फीचर्स पर आधारित है। ट्रेन में सीटों का अलॉटमेंट पूरी तरह से भारतीय रेलवे के सॉफ्टवेयर (एल्गोरिदम) और सीटों की उपलब्धता (Availability) पर निर्भर करता है। इन ट्रिक्स को अपनाने से साइड लोअर सीट मिलने की संभावना (Probability) को केवल बढ़ाया जा सकता है, यह सीट मिलने की 100% कानूनी गारंटी नहीं है। यात्रा से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर नज़र बनाए रखें।

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