घर के मंदिरों में ताजा फूल पहुंचा रहा दो बहनों का स्टार्टअप- 8 राज्यों में हैं इनके कस्टमर, करोड़ों है टर्नओवर

Published : Jun 25, 2022, 02:17 PM ISTUpdated : Jun 27, 2022, 05:27 PM IST
घर के मंदिरों में ताजा फूल पहुंचा रहा दो बहनों का स्टार्टअप- 8 राज्यों में हैं इनके कस्टमर, करोड़ों है टर्नओवर

सार

बेंगलुरु की एक स्टार्टअप HOOVU ने भारत में एक मिसाल पेश किया है। दो बहनों ने इसे शुरू किया है। इनका स्टार्टअप अनोखा है। ये दोनों बहनें पूजा के लिए फ्रेश फूलों की डिलीवरी करवाती हैं। यह डिलीवरी किसी एक शहर नहीं बल्की 8 राज्यों में होती है। यह स्टार्ट अप अब करोड़ों का हो गया है।

बेंगलुरुः हूवु, एक ऐसा ब्रांड जो दो बहनों की बगिया है। इस बगिया के हर एक फूल को इन्होंने बड़ी इत्मिनान से संवारा है। तीन साल में कई उतार-चढ़ाव आए लेकिन यशोदा और रिया करतुरी के जुनून और ललक के आगे सब फीके पड़ गए। तभी तो आठ शहरों के लोगों के मंदिर में सुबह-सुबह इनकी बगिया के फूल की गमक बिखर जाती है। जी हां, इन दोनों बहनों का स्टार्टअप ही ऐसा है। दोनों बहनें फ्रेश फूलों को पैक करवाकर लोगों के घरों तक भिजवाती हैं। लोगों को इसके बदले मंदिर में चढ़ाने के लिए ताजा फूल मिल जाते हैं। हूवु (HOOVU) के पैक्ड फूल ऐसे होते हैं, जो सात दिनों तक मुरझाते नहीं हैं। इसे बेस्ट स्टार्टअप का अवार्ड भी मिला है।

हूवु फ्रेश का है करोड़ों का टर्नओवर
फूलों की दुनिया में यशोदा करतुरी और रेहा का नाम खुशबू की तरह बिखरता जा रहा है। दोनों सगी बहनें हैं। इन्होंने महज तीन साल में ही फ्लावर इंडस्ट्री में अपनी कंपनी हूवु फ्रेश को बड़ा ब्रांड बना डाला है। 10 लाख की रकम से इस स्टार्टअप की शुरुआत हुई थी। आज यह बिजनेस करोड़ों का टर्नओवर कर रही है। 14 फरवरी 2019 को बेंगलुरु में दोनों बहनों ने हूवु फ्रेश की शुरुआत की थी। 28 साल की रिया बताती हैं कन्नड़ भाषा में हूवु एक तरह का फूल है। हमने कंपनी का नाम काफी सोच-समझ कर हूवु रखा है। ताकि इससे लोकल भाषा का टच मिले। इस नाम से हमें फायदा भी मिला। कंपनी शुरू होने के कुछ महीने के बाद ही कोरोना के कारण बिजनेस ठप हो गया। लेकिन कोरोना के खत्म होते ही सब ठीक हो गया।

मां से मिला मोटिवेशन
रिया ने बताया कि मां ने एक दिन कहा था कि बेंगलुरु फ्लावर कैपिटल कहलाता है। लेकिन पूजा के लिए फ्रेश फूल ही नहीं मिलते हैं। मिलते भी हैं तो समय पर नहीं मिलते हैं। इसी बात को लेकर हम लोग मोटिवेट हो गए। हमने सोचा क्यों ना पूजा के फूलों का ही बिजनेस किया जाए। इस तरह ‘रोज बाजार’ की शुरुआत हुई, जिसे आगे चलकर हूवु फ्रेश का नाम मिला। रिया की बड़ी बहन यशोदा बताती हैं कि पिता रामाकृष्णन का इथोपिया के अदिस अबाबा और केन्या के नकरू में दुनिया का सबसे बड़ा रोज फार्म था। 1994 में इस फार्म की शुरुआत हुई थी और मेरा भी जन्म हुआ था। मेरा नाम यशोदा भी गुलाब की एक वेराइटी पर ही रखा गया था। छोटी बहन रिया का नाम डार्क रेड रोज की एक वेराइटी पर रखा गया है।

पिता का था बड़ा बिजनेस
पिता का एक वक्त में काफी बड़ा बिजनेस था लेकिन कुछ कारणों से बिजनेस छोटा होता चला गया। पहले कई देशों में फूलों की सप्लाई की जाती थी। लेकिन बाद के दिनों में सप्लाई भी कम हो गया। उस बिजनेस के उतार-चढ़ाव को करीब से देखा था। इस कारण मां ने जैसे ही फूलों की बात कही, हमने उसे तुरंत एक्सेप्ट कर लिया। रिया बताती हैं कि आप देखते होंगे कि पूजा के फूल मंदिरों के आसपास बिकते हैं। ठेले पर, सड़क किनारे महिलाएं पूजा के फूल बेचती दिख ही जाती होंगी। हूवु फ्रेश की शुरुआत के बाद हमने ऐसी महगिलाओं को जोड़ना शुरू किया। कंपनी की शुरुआत में 25 महिलाएं थीं। अब कई गुना बढ़ गई हैं। उन्हें रोजगार मिला। आर्थिक स्थिती ठीक हुई। बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ने लगे. 

लाखों के आते हैं ऑर्डर
यशोदा बताती हैं कि हर महीने डेढ़ लाख से अधिक का ऑर्डर मिल जाता है। बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, मैसूर, मुंबई, गुरुग्राम, नोएडा आदि से ये ऑर्डर मिल रहे हैं। इन ऑर्डर्स में अधिकतर मंथली सब्सक्रिप्शन वाले कस्टमर हैं। यह न्यूनतम सौ रुपये से शुरू होता है। 25 रुपये के फ्लावर बॉक्स में भी कई वेराइटी के फूल होते हैं। 

फूलों की पैकेजिंग ऐसे की जाती है कि वे दो सप्ताह तक ताजे रहते हैं। फ्रेश रखने के लिए इथिलीन ब्लॉकर्स और दूसरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। पैकेजिंग के वक्त में ख्याल रखा जाता है कि डायरेक्ट कोई इन फूलों को छू ना सके। जिस पैकेट में इसे पैक किया जाता है, वे इको फ्रेंडली होते हैं। यशोदा बताती हैं कि उनकी कंपनी फूलों से अगरबत्ती भी बनाती है। ये पूरी तरह ऑर्गेनिक होते हैं। 

कई किसानों को जोड़ा गया
यशोदा बताती हैं कि हूवु फ्रेश ने पूजा के फूलों के बिजनेस से जुड़े लोगों से बातचीत की। इससे जुड़े किसान फूलों को मंडी में बेचते थे, जहां उन्हें हमेशा घाटा ही होता था। उन्हें कभी फूलों की सही कीमत ही नहीं मिली। साथ ही समय पर फूल ना बिकने पर फूल बेकार भी हो जाते थे। इस बिजनेस में सैकड़ों किसानों को जोड़ा गया। अलग-अलग राज्यों के किसानों को जोड़ा गया। डिलिवरी की एक चेन बनाई गई। अब सारे काम आसानी से हो जा रहे हैं। रिया बताती हैं कि जिन कस्टमर का ऑर्डर मिलता है उन्हें समय पर डिलिवरी दी जाती है। कुछ ई कॉमर्स कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर भी ये प्रोडक्ट हैं।

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