Aadhaar Verification: अब बिना इंटरनेट भी होगा आधार वेरिफ़िकेशन, 100 कंपनियां UIDAI के नए सिस्टम से जुड़ीं

Published : Apr 20, 2026, 10:27 PM IST
UIDAI Onboards 100 Firms for New Offline Aadhaar Verification System

सार

डिजिटल वेरिफिकेशन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, 100 कंपनियों ने UIDAI के ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) फ्रेमवर्क को अपना लिया है. लॉन्च के तीन महीने के अंदर हुए इस जुड़ाव का मकसद ऑफलाइन आधार वेरिफिकेशन के जरिए सर्विस देने में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है.

डिजिटल वेरिफिकेशन के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा बूस्ट मिला है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने आज ऐलान किया कि यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) का नया सिस्टम लॉन्च होने के सिर्फ तीन महीनों के अंदर 100 कंपनियां इससे जुड़ गई हैं. इन कंपनियों को अब ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) का दर्जा मिल गया है.

कई अलग-अलग सेक्टर ने अपनाया ऑफलाइन वेरिफिकेशन

इस नए सिस्टम से जुड़ने वालों में केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग, फिनटेक कंपनियां, होटल इंडस्ट्री, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां, शिक्षा और परीक्षा से जुड़ी संस्थाएं, पहचान और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन एजेंसियां और वर्कफोर्स मैनेजमेंट कंपनियां शामिल हैं.

माना जा रहा है कि इस इंटीग्रेशन से सर्विस देने में लगने वाला समय कम होगा. साथ ही, फिजिकल डॉक्यूमेंट संभालने और मैनुअल वेरिफिकेशन से जुड़ा खर्च भी घटेगा.

ऑफलाइन तरीकों से प्राइवेसी होगी बेहतर

ये कंपनियां अब UIDAI के सेंट्रल डेटाबेस से रियल-टाइम कनेक्टिविटी के बिना भी पहचान वेरिफाई कर सकेंगी. इसके लिए आधार के ऑफलाइन तरीके जैसे QR कोड स्कैन करके या डिजिटल साइन वाले सिक्योर डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल किया जाएगा.

मंत्रालय ने कहा कि इन OVSE पार्टनर्स का जुड़ना इस बात का सबूत है कि आधार वाले प्राइवेसी-फर्स्ट डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम पर भरोसा बढ़ रहा है. इस सिस्टम में यूजर का कंट्रोल सबसे अहम होता है और वेरिफिकेशन भी आसानी से हो जाता है.

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर होगा मजबूत

इस पहल में नागरिकों को सबसे ऊपर रखा गया है. यह सुनिश्चित किया गया है कि आधार नंबर होल्डर सिर्फ उतनी ही जानकारी शेयर करें, जितनी जरूरी हो. इससे उनकी प्राइवेसी और बेहतर होगी.

यह आसान वेरिफिकेशन प्रोसेस उलझन को कम करता है और पारदर्शी और सहमति-आधारित बातचीत के जरिए भरोसा बनाता है.

मंत्रालय ने आगे कहा कि यह डिस्ट्रिब्यूटेड मॉडल सिस्टम को मजबूत, स्केलेबल और सुरक्षित बनाता है. यह भारत के एक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के विजन के साथ भी मेल खाता है. इसका मकसद लोगों को अपनी जानकारी पर कंट्रोल देना है, ताकि वे खुद तय कर सकें कि वे किसके साथ और कितनी जानकारी शेयर करना चाहते हैं.

नागरिकों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा

यह पहल UIDAI की 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन को आसान बनाने) की कोशिशों को भी आगे बढ़ाती है, जिसका मकसद सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ लोगों की बातचीत को आसान बनाना है.

आधार होल्डर्स को अब तेज ऑनबोर्डिंग, कम कागजी कार्रवाई और अपनी निजी जानकारी पर ज्यादा कंट्रोल जैसे फायदे मिलेंगे.

मंत्रालय ने कहा कि इस पहल से नागरिकों के लिए ऑनबोर्डिंग तेज होगी, कागजी काम कम होगा और निजी जानकारी पर उनका कंट्रोल बढ़ेगा, जिससे 'ईज ऑफ लिविंग' में सुधार होगा.

UIDAI के बारे में

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) एक वैधानिक प्राधिकरण है. इसकी स्थापना भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत 12 जुलाई 2016 को आधार एक्ट 2016 के प्रावधानों के तहत की थी.

आधार एक्ट 2016 में 25 जुलाई 2019 से आधार और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 14) द्वारा संशोधन किया गया है.

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