
दावोस: अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर के दबदबे को समाप्त करने के लिये बहुत भरोसेमंद दावेदार और मजबूत मुद्रा की जरूरत होगी। इसका कारण डॉलर ने समय-समय पर यह साबित किया है कि वह बहुत स्थिर है।
उन्होंने कहा कि यूरो लंबे समय से बना हुआ है लेकिन वह अब तक इस स्तर पर नहीं पहुंचा है जिसकी शुरू में उम्मीद थी। वहीं चीन भी लंबे समय से अपनी मुद्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रयास कर रहा है लेकिन उसे बहुत सफलता नहीं मिली है।
डॉलर के दबदबे का कारण स्थिरता का वादा
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सालाना सम्मेलन में डॉलर के दबदबे विषय पर आयोजित एक सत्र मे गोपीनाथ ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो एक मुद्रा का वैश्विक कारोबार पर हमेशा दबदबा बना रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘एक समय यह ब्रिटिश पाउंड थी और अब डॉलर है। अगर आप मुद्रा भंडार को देखें तो इसमें भी डॉलर का दबदबा बना हुआ है। उसके बाद यूरो का स्थान है...।’’
उनके अनुसार डॉलर के दबदबे का कारण स्थिरता का वादा है। गोपीनाथ ने कहा, ‘‘अगर डॉलर के लिये भरोसेमंद दावेदार चाहते हैं, उसके लिये बहुत मजबूत मुद्रा बनाने की जरूरत होगी।’’
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