FD होल्डर की मौत के बाद पैसा किसे मिलेगा? बच्चे-पोते या नॉमिनी, जानिए नियम

Published : Feb 10, 2026, 08:42 PM IST

FD after Death Rules: ज्यादातर लोग एफडी को सेफ सेविंग मानते हैं, लेकिन परेशानी तब होती है, जब एफडी होल्डर की मौत हो जाती है, कोई वसीयत नहीं छोड़ी जाती। ऐसे में घरवालों के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि एफडी का पैसा आखिर मिलेगा किसे? आइए जानते हैं..

PREV
17

एफडी के पैसे पर सबसे पहला हक किसका होता है?

अगर किसी व्यक्ति की मौत बिना वसीयत (Will) के होती है, तो कानून अपने आप लागू हो जाता है। ऐसे मामलों में सबसे पहला हक मृतक के पति या पत्नी और उसके बच्चों का माना जाता है। बेटे और बेटियां दोनों बराबर के हकदार होते हैं। यानी FD का पैसा सबसे पहले इन्हीं लोगों में बंटता है।

27

क्या पोते-पोतियों को FD का पैसा मिलता है?

अक्सर लोग मान लेते हैं कि पोते-पोतियों को भी सीधे FD में हिस्सा मिल जाएगा, लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है। अगर मृतक का बेटा या बेटी जिंदा है, तो उसके बच्चों यानी पोते-पोतियों का FD पर कोई सीधा अधिकार नहीं बनता। कानून साफ कहता है कि पोते तभी हकदार होते हैं, जब उनके माता-पिता, यानी मृतक का बेटा या बेटी, पहले ही गुजर चुके हों। ऐसी स्थिति में पोते-पोतियां अपने माता-पिता की जगह लेकर उसी हिस्से के हकदार बनते हैं।

37

क्या नॉमिनी ही FD का असली मालिक होता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सबसे बड़ा भ्रम है, जिसमें ज्यादातर लोग फंसे रहते हैं। FD में दर्ज नॉमिनी को लोग मालिक समझ लेते हैं, जबकि कानून ऐसा नहीं मानता है। नॉमिनी सिर्फ वह व्यक्ति होता है, जिसे बैंक पैसा सौंप देता है। लेकिन यह पैसा उसका नहीं होता। नॉमिनी की जिम्मेदारी होती है कि वह रकम सही कानूनी वारिसों तक पहुंचाए। अदालतें कई बार साफ कर चुकी हैं कि नॉमिनी सिर्फ एक माध्यम होता है, मालिक नहीं।

47

बैंक नॉमिनी को पैसा क्यों दे देता है?

बैंक के लिए नॉमिनी का नाम इसलिए जरूरी होता है, ताकि FD होल्डर की मौत के बाद पैसा देने की प्रक्रिया आसान हो सके। बैंक डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) और KYC जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट्स देखकर पैसा नॉमिनी को दे देता है और यहीं बैंक की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। इसके बाद अगर वारिसों के बीच कोई विवाद होता है, तो वह बैंक का नहीं बल्कि परिवार का मामला माना जाता है।

57

अगर FD में नॉमिनी ही न हो तो क्या होता है?

जब FD में नॉमिनी दर्ज नहीं होता, तब क्लेम की प्रक्रिया थोड़ी लंबी और जटिल हो जाती है। बैंक ऐसे मामलों में सभी दावेदारों से पहचान से जुड़े दस्तावेज, शपथ पत्र और कानूनी प्रमाण मांगता है। अगर FD की रकम ज्यादा हो, तो बैंक अक्सर कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) लाने को कहता है। आसान मामलों में यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी हो जाती है, लेकिन अगर केस उलझा हुआ हो तो इसमें एक साल तक का वक्त भी लग सकता है।

67

FD क्लेम में देरी क्यों हो जाती है?

FD का पैसा मिलने में देरी के पीछे कई वजहें होती हैं। कई बार नॉमिनी अपडेट नहीं होता, कहीं KYC में नाम या जन्मतिथि की गलती होती है, तो कहीं बच्चों या पोते-पोतियों के बीच विवाद खड़ा हो जाता है। सबसे बड़ी वजह होती है Will का न होना, जिससे मामला सीधा होने के बजाय कानूनी बन जाता है।

77

परेशानी से बचने का सबसे आसान तरीका

अगर आप चाहते हैं कि आपके जाने के बाद आपके परिवार को FD के लिए भागदौड़ न करनी पड़े, तो इसका हल बहुत सरल है। FD में सही नॉमिनी जरूर दर्ज करें, समय-समय पर KYC अपडेट रखें और सबसे जरूरी बात, एक सिंपल सी वसीयत बना लें। इससे पैसा बिना किसी झगड़े के सही व्यक्ति तक पहुंच जाता है और परिवार को कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।

Read more Photos on

Recommended Stories