
Who is Venugopal Dhoot: वीडियोकॉन ग्रुप (Videocon) के फाउंडर वेणुगोपाल धूत को सीबीआई ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें ICICI बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले सीबीआई ने शुक्रवार को ICICI बैंक की पूर्व CEO और MD चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को भी गिरफ्तार किया था। बता दें कि चंदा कोचर पर आरोप है कि जब वो ICICI बैंक की प्रमुख थीं, तब उन्होंने वीडियोकॉन की अलग-अलग कंपनियों को नियमों के खिलाफ जाते हुए करीब 3250 करोड़ के लोन मंजूर किए थे। वीडियोकॉन ग्रुप ने इस लोन में से 86% (करीब 2810 करोड़ रुपए) रकम नहीं चुकाई और 2017 में इस लोन को एनपीए (Non Pereforming Assets) में डाल दिया गया।
कैसे हुआ ICICI-वीडियोकॉन लोन फ्रॉड केस :
- बता दें कि इस लोन घोटाले में वेणुगोपाल धूत की कंपनियों (वीडियोकॉन, सुप्रीम एनर्जी और नू पावर रिन्यूवेबल) के अलावा चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी पिनेकल एनर्जी भी शामिल थी।
- 2008 में धूत और दीपक कोचर ने 50-50% की पार्टनरशिप में नू पावर नाम की कंपनी बनाई। हालांकि, 2009 में धूत ने डायरेक्टर की पोस्ट से इस्तीफा देते हुए दीपक कोचर को पूरी कंपनी की कमान दे दी।
- 2010 में कोचर की नू पावर कंपनी को पैसों की जरूरत थी तो धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी ने 64 करोड़ रुपए का कर्ज दे दिया।
- चूंकि धूत ने बैंक से 300 करोड़ का लोन लिया था और इसी में से उन्होंने कोचर को की नू पावर को 64 करोड़ रुपए दे दिए। हालांकि, लोन की ये शर्त थी कि 64 करोड़ रुपए के बदले नू पावर के शेयर्स सुप्रीम एनर्जी को देने होंगे।
- शेयर ट्रांसफर होने के बाद धूत के पास एक बार फिर नूपावर कपंनी की कमान आ गई। 2011 में धूत की कंपनी सुप्रीम एनर्जी ने नू पावर को महेशचंद्र पुगलिया को ट्रांसफर कर दिया।
- 2012 में जब धूत की कंपनी वीडियोकॉन को पैसों की जरूरत पड़ी तो ICICI बैंक ने 3250 करोड़ रुपए का लोन दिया। वीडियोकॉन ग्रुप ने इस लोन में से 86% रकम (करीब 2810 करोड़ रुपए) नहीं चुकाई। बाद में इस लोन को 2017 में NPA घोषित कर दिया गया।
कौन हैं वेणुगोपाल धूत?
वेणुगोपाल धूत का जन्म 30 सितंबर, 1951 को मुंबई में हुआ। उन्होंने पुणे से इंजीनियरिंग की डिग्री ली। 1985 में वेणुगोपाल धूत के पिता नंदलाल धूत ने वीडियोकॉन इंटरनेशनल की स्थापना की। ये कंपनी कलर टीवी के मार्केट में बहुत तेजी से बढ़ी। कंपनी ने हर साल एक लाख टीवी के निर्माण का लक्ष्य रखा और इसमें कामयाब भी रहे। फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक, 2015 में वेणुगोपाल धूत भारत के 61वें सबसे अमीर शख्स थे। तब उनकी संपत्ति 1.19 बिलियन डॉलर (98 अरब रुपए) थी। वीडियोकॉन ग्रुप का मेन बिजनेस कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम एप्लायंसेज है। बाद में यह कंपनी डीटीएच, पावर और ऑयल एक्सप्लोरेशन फील्ड में भी आ गई।
धूत को बिजनेस में हुआ लगातार नुकसान :
2015 तक देश के टॉप बिजनेसमैन रहे वेणुगोपाल धूत को धीरे-धीरे बिजनेस में लगातार घाटा होता रहा। जनवरी, 2015 में उन्होंने वीडियोकॉन d2h की हिस्सेदारी बेची। इसके बाद कंपनी टेलीकॉम बिजनेस में उतरी, लेकिन कंपनी का ये फैसला घाटे का साबित हुआ। इसके बाद कंपनी ने स्मार्टफोन बनाने के बिजनेस को शुरू किया लेकिन तगड़े कॉम्पिटीशन और चीनी कंपनियों की वजह से उनका ये बिजनेस भी ठप हो गया।
चंदा कोचर को पहले ही बैंक ने हटा दिया था :
बता दें कि वीडियोकॉन ग्रुप के लिए ICICI बैंक से मंजूर किए गए लोन में गड़बड़ी और अनियमितताएं पाई गई थीं। ये मामला सामने आने के बाद बैंक ने चंदा कोचर को सीईओ पद से हटा दिया था और उन्हें रिटायरमेंट बेनिफिट देने से भी इनकार कर दिया था।
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