9-to-5 नौकरी को कोसने वालों को महिला ने दिया रियलिटी चेक, पूछ लिया ये सीधा सवाल

Published : Aug 24, 2026, 11:00 AM IST
Corporate Life Viral Video

सार

9 to 5 Job Viral Video: 9-to-5 कॉरपोरेट जॉब से परेशान लोगों को महिला ने दिया रियलिटी चेक। जानिए क्यों उन्होंने नौकरी को कोसने वालों से कौन सी बात कही।

9 to 5 Job Reality Check: कॉरपोरेट जॉब, लंबी मीटिंग्स, काम का दबाव और रोज की 9-to-5 रूटीन- सोशल मीडिया पर इन दिनों नौकरी से जुड़ी शिकायतें आम हैं। लेकिन क्या हर दिन अपनी नौकरी को कोसना वाकई सही रास्ता है? इंस्टाग्राम पर कंटेंट क्रिएटर दिशा देसाई ने इसी सवाल को एक अलग नजरिए से उठाया है। जानिए उन्होंने क्या कहा?

क्या नौकरी पसंद नहीं है तो उसे छोड़ देना ही हल है?

दिशा देसाई, जो इंस्टाग्राम पर @almostdailyyy नाम से पोस्ट करती हैं, ने एक वीडियो में कॉरपोरेट लाइफ को लेकर अपनी सोच शेयर की। उन्होंने माना कि वह खुद भी पहले अपनी नौकरी और कॉरपोरेट कल्चर को लेकर शिकायत कर चुकी हैं। हालांकि, अब उनका मानना है कि अगर किसी को 9-to-5 नौकरी बिल्कुल पसंद नहीं है, तो केवल शिकायत करते रहने के बजाय उसके विकल्प पर काम करना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, नौकरी पसंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन जब वही नौकरी घर का किराया, घूमने-फिरने, रोजमर्रा के खर्च और भविष्य की आर्थिक योजनाओं को चलाने में मदद कर रही हो, तब उसके प्रति लगातार नाराजगी जताने से समस्या हल नहीं होती।

सैलरी सिर्फ कमाई है या लाइफस्टाइल की नींव भी है?

देसाई का तर्क सीधा है, जब तक कोई व्यक्ति अपनी कमाई का दूसरा भरोसेमंद जरिया तैयार नहीं कर लेता, तब तक नियमित वेतन उसकी आर्थिक स्थिरता का बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए अगर कोई कॉरपोरेट नौकरी से बाहर निकलने का सपना देखता है, तो उसे उस दिशा में धीरे-धीरे काम करना चाहिए। यानी नौकरी को अंतिम मंजिल मानने के बजाय उसे एक फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम की तरह देखा जा सकता है। इसी कमाई से बचत, निवेश, परिवार की जरूरतें और निजी लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं।

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क्या नौकरी से प्यार जरूरी है?

वीडियो के कैप्शन में भी देसाई ने इसी सोच को आगे बढ़ाया। उनका संदेश यह नहीं था कि कर्मचारी अपनी परेशानियों को नजरअंदाज करें या खराब वर्क कल्चर को स्वीकार कर लें। बल्कि उनका फोकस इस बात पर था कि अगर नौकरी फिलहाल जीवन को आर्थिक आधार दे रही है, तो हर दिन उससे नफरत करने के बजाय भविष्य के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार किया जाए। नीचे देखें वायरल वीडियो-

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यूजर्स ने किया सपोर्ट

इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने उनकी बात को व्यावहारिक बताया। कुछ लोगों ने इसे कॉरपोरेट लाइफ की वास्तविकता से जुड़ा नजरिया कहा, जबकि अन्य ने माना कि वर्क-लाइफ बैलेंस और फाइनेंशियल सिक्योरिटी के बीच संतुलन बनाना आज के कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती है। असल सवाल शायद यह नहीं है कि 9-to-5 नौकरी अच्छी है या खराब। सवाल यह है, अगर मौजूदा नौकरी पसंद नहीं है, तो क्या हम शिकायत के साथ-साथ अपने अगले विकल्प की तैयारी भी कर रहे हैं?

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About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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