समाज के ताने सहे कोर्ट में की लड़ाई, 23 साल की रशिका ने नियम बदलने पर यूं किया मजबूर

Published : Nov 01, 2019, 01:32 PM IST
समाज के ताने सहे कोर्ट में की लड़ाई, 23 साल की रशिका ने नियम बदलने पर यूं किया मजबूर

सार

तमिलनाडु की रहने वाली 23 साल की राशिका राज नर्सिंग सर्विस के लिए मेडिकल कोर्स पूरा करने के बाद एक साल तक बिना जॉब के रही, क्योंकि तमिनलाडु नर्सेज एंड मिडवाइव्स काउंसिल (TNNMC) ने थर्ड जेंडर के लिए रजिस्ट्रेशन करने का कोई ऑप्शन नहीं रखा था।

करियर डेस्क। तमिलनाडु की रहने वाली 23 साल की राशिका राज नर्सिंग सर्विस के लिए मेडिकल कोर्स पूरा करने के बाद एक साल तक बिना जॉब के रही, क्योंकि तमिनलाडु नर्सेज एंड मिडवाइव्स काउंसिल (TNNMC) ने थर्ड जेंडर के लिए रजिस्ट्रेशन करने का कोई ऑप्शन नहीं रखा था। रजिस्ट्रेशन सिर्फ मेल और फीमेल कैटेगरी में कराया जा सकता था। लेकिन राशिका थर्ड जेंडर कैटेगरी में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहती थी। काउंसिल इसके लिए तैयार नहीं हुआ।   

राशिका मामले को मद्रास हाईकोर्ट लेकर गई
राशिका इस मामले को मद्रास हाईकोर्ट में लेकर गई। उसने सुप्रीम कोर्ट के साल 2014 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया था कि कोई भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति शिक्षा और रोजगार के लिए 'अन्य' जेंडर कैटेगरी में अप्लाई कर सकता है। राशिका ने कहा कि इसके बाद नर्सिंग काउंसिल ने अस्थाई तौर पर एक ट्रांसवुमन के रूप में उसका रजिस्ट्रेशन करना स्वीकार किया। काउंसिल का कहना था कि स्थाई तौर पर उसका रजिस्ट्रेशन करने के लिए नर्सिंग काउंसिल एक्ट में बदलाव करना पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने दिया निर्देश
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के बाद तमिनलाडु नर्सेज एंड मिडवाइव्स काउंसिल (TNNMC) को निर्देश दिया कि राशिका का रजिस्ट्रेशन थर्ड जेंडर कैटेगरी में किया जाए। जस्टिस जयंचद्रन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राशिका का रजिस्ट्रेशन वुमन ट्रांसजेंडर के रूप में किया जाए, जब तक इस पर सरकारी आदेश नहीं आ जाता। 

भारत की पहली ट्रांसजेंडर नर्स बनी राशिका
25 अक्टूबर को राशिका का रजिस्ट्रेशन तमिलनाडु में ट्रांस नर्स और मिडवाइफ के रूप में हो गया और इस तरह वह देश की पहली ट्रांसजेंडर नर्स बन गई। लेकिन इसके बावजूद राशिका पूरी तरह से खुश नहीं है। उसका कहना है कि साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया था, उसके अनुसार ट्रांसजेंडर कैटेगरी हर डिपार्टमेंट में बननी चाहिए थी, लेकिन आज भी इस तरह के लोगों को अपने कानूनी हक को पाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है और कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। राशिका ने कहा कि अगर वह अपने मामले को हाईकोर्ट में नहीं ले जाती तो उसे उसका वाजिब हक नहीं मिलता। राशिका का कहना था कि काउंसिल ने उससे कहा है कि नियमों में बदलाव किया जा रहा है, लेकिन ऐसा कब तक होगा, इसके बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है। बहरहाल, राशिका ने यंग जनरेशन के ट्रांसजेंडर्स के लिए इसे एक बड़ी जीत बताया।  

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