
कर्नाटक स्कूल परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड (KSEAB) ने जैसे ही 2025-26 के SSLC यानी 10वीं के रिजल्ट्स का ऐलान किया, तुमकुरु जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई जो हर किसी के लिए मिसाल बन गई है। यह कहानी एक ऐसी लड़की की है, जिसने मुश्किल हालात के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से पूरे राज्य में नाम रोशन किया है।मधुगिरि कस्बे के चिरेक पब्लिक स्कूल की छात्रा हिताश्री डी. ने SSLC परीक्षा में 625 में से 623 अंक हासिल कर राज्य में दूसरा स्थान पाया है। उसकी यह कामयाबी सिर्फ उसकी अपनी जीत नहीं है, बल्कि यह गरीबी के बीच शिक्षा की ताकत को दिखाने वाली एक प्रेरणादायक मिसाल है।
हिताश्री के पिता रंग-बिरंगे गुब्बारे बेचकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। घर में पैसों की तंगी थी, लेकिन उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। गुब्बारे बेचकर होने वाली छोटी सी कमाई से ही उन्होंने बेटी को पढ़ाने और उसे एक कामयाब इंसान बनाने का सपना देखा, जो अब सच हो गया है। मुश्किल हालात के बावजूद हिताश्री ने अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया और समय का सही इस्तेमाल करके यह मुकाम हासिल किया। रोज की चुनौतियों का सामना करते हुए भी उसका ध्यान अपने लक्ष्य पर बना रहा। उसकी यही ज़िद और मेहनत इस शानदार रिजल्ट की वजह है। राज्य के टॉप 28 छात्रों में जगह बनाना उसकी काबिलियत का सबूत है।
इस कामयाबी पर स्कूल के टीचर, परिवार वाले और आस-पड़ोस के लोग बहुत खुश हैं। हिताश्री ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया है कि "रंगीन गुब्बारे बेचने वाले के घर में भी ज्ञान का उजाला हो सकता है।" हिताश्री की यह जीत कई गरीब छात्रों को हौसला देगी और यह संदेश देगी कि अगर मेहनत और पक्का इरादा हो, तो कोई भी मुश्किल आपको मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
उधर, हावेरी जिले से भी एक और प्रेरणा देने वाली कहानी सामने आई है। एक साधारण परिवार में जन्मे छात्र ने मुश्किल हालात के बावजूद शानदार रिजल्ट हासिल किया है, जिसकी कहानी कई लोगों को हिम्मत दे रही है। हावेरी तालुक के नेगलूर गांव के मोरारजी स्कूल के छात्र भरत बसवराज हिरेमठ ने SSLC परीक्षा में 98% अंक हासिल कर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कम सुविधाओं के बीच भी इतने अच्छे नंबर लाने पर भरत को टीचरों, गांव वालों और रिश्तेदारों से खूब तारीफें मिल रही हैं।
भरत के पिता एक बाइक गैराज में मैकेनिक का काम करते हैं और उनकी मां घरों में खाना बनाकर परिवार चलाती हैं। ऐसी आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसका नतीजा आज भरत के शानदार नंबरों के रूप में सामने आया है। इस बारे में भरत ने बताया, "मेरे पापा गैराज में मैकेनिक हैं। मां खाना बनाने का काम करके मुझे पढ़ाती हैं। उनकी मेहनत ही मेरी प्रेरणा है। मुझे 98% नंबर मिले हैं। मैं इससे भी ज्यादा की उम्मीद कर रहा था, इसलिए मैं री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई करने की सोच रहा हूं।"
अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरा सपना डॉक्टर या एक बिजनेसमैन बनने का है। लेकिन साइंस स्ट्रीम में एडमिशन के लिए जरूरी फीस भरने के लिए हमारे पास पैसों की कमी है। फिर भी, मैं अपने नंबरों के आधार पर आगे के मौके तलाशने की कोशिश करूंगा।"
भरत की यह कामयाबी इस बात का सबूत है कि अगर हिम्मत और मेहनत हो तो पैसों की तंगी भी बड़े लक्ष्यों को हासिल करने से नहीं रोक सकती। ऐसे होनहार छात्रों को अगर सही प्रोत्साहन और मदद मिले, तो वे निश्चित रूप से और भी बड़ी ऊंचाइयों को छू सकते हैं।
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