नई दिल्ली। अल्पसंख्यक वर्ग के कक्षा एक से कक्षा 8 तक यानी प्री-मैट्रिक के छात्रों को दी जा रही छात्रवृत्ति अब बंद कर दी गई है। वहीं, हायर एजुकेशन में अल्पसंख्यक छात्रों को अब मौलाना आजाद फेलोशिप नहीं मिलेगी। इस निर्णय के बाद संसद के शीतकालीन सत्र में बुधवार को दो सांसदों ने इसका विरोध किया और सरकार से इसे बहाल करने की अपील की।
संसद के शीतकालीन सत्र के बीच लोकसभा में दो सांसदों ने तर्क दिया है कि अगर अल्पसंख्यक आबादी को पीछे छोड़ दिया गया तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। इन दोनों ही सांसदों ने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति और मौलाना आजाद फेलोशिप बहाल करने की अपील की है। अल्पसंख्यकों के लिए सरकार की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति अब कक्षा एक से कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। वहीं, उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के लिए मौलाना आजाद फेलोशिप को खत्म कर दिया गया है।
'अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलना होगा'
मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा के सांसद दानिश अली ने अनुदान के अलावा अनुरोधों पर चर्चा के दौरान यह मांग करते हुए कहा कि हायर एजुकेशन में अल्पसंख्यकों के लिए मौलाना आजाद फेलोशिप और प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप को फिर से बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की समृद्धि के लिए सभी को साथ लेने की जरूरत है। अल्पसंख्यकों को पीछे छोड़कर समृद्ध नहीं हुआ जा सकता।
'अल्पसंख्यक की फेलोशिप शुरू करने की अपील'
वहीं, असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन यानी एआईएमआईएम के सांसद सैयद इम्तियाज जलील ने कहा कि भविष्य में अल्पसंख्यक छात्र आगे कैसे पढ़ेंगे और कैसे आगे बढ़ेंगे, जब उन्हें दी जा रही फेलोशिप बंद कर दी गई। इससे पहले, बसपा सांसद दानिश अली ने छोटे व्यापारियों पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रभाव पर भी बात करते हुए दावा किया कि जीएसटी के छापे के तहत गरीब व्यापारियों को टारगेट किया जा रहा था, जबकि अमीर उद्योगपतियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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