
करियर डेस्क. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय (Delhi Skill and Entrepreneurship University) का पहला शैक्षणिक सत्र कंपनियों के साथ परामर्श से अगले वर्ष शुरू होने की उम्मीद है। केजरीवाल ने कहा कि कंपनियों को इस कवायद में ‘‘उपभोक्ता’’ माना जाएगा।
विश्वविद्यालय ने कार्य करना शुरू कर दिया
केजरीवाल ने यह टिप्पणी विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति और बोर्ड सदस्यों के साथ मुलाकात के बाद की। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक आनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय दिल्ली विधानसभा के एक अधिनियम के माध्यम से स्थापित किया गया है। मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्न्ता हो रही है कि विश्वविद्यालय ने आज कार्य करना शुरू कर दिया है। इस विश्वविद्यालय की पहली बोर्ड बैठक आज आयोजित की गई।’’
छात्रों को विश्वविद्यालय में कौशल और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा
केजरीवाल ने कहा, ‘‘छात्रों को विश्वविद्यालय में कौशल और प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि वे संस्थान से पास होते ही आसानी से नौकरी प्राप्त कर सकें या व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करके व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।’’ सरकार ने आईआईएम-अहमदाबाद में सेंटर फॉर इनोवेशन इनक्यूबेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप (सीआईआईई) की प्रमुख डा. निहारिका वोहरा को कुलपति नियुक्त किया है।
ये हैं विश्वविद्यालय बोर्ड के सदस्य
बोर्ड के सदस्यों में प्रमथ राज सिन्हा, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के संस्थापक डीन एवं अशोक विश्वविद्यालय के संस्थापक, जेनपैक्ट संस्थापक प्रमोद भसीन, नौकरी डॉट कॉम संस्थापक संजीव बिखचंदानी, उद्यमी श्रीकांत शास्त्री और आईपी यूनिवर्सिटी के संस्थापक कुलपति के के अग्रवाल शामिल हैं।
इस विश्वविद्यालय से पास होने वाले प्रत्येक छात्र के लिए रोजगार
केजरीवाल ने कहा, ‘‘हमने विश्वविद्यालय के कुलपति और उसके बोर्ड के सदस्य नियुक्त कर दिये हैं. मैंने सभी बोर्ड सदस्यों से बात की और उन्हें बताया कि इस विश्वविद्यालय का एकमात्र उद्देश्य और विचारधारा इस विश्वविद्यालय से पास होने वाले प्रत्येक छात्र के लिए रोजगार सुनिश्चित करना, या उन्हें व्यापार करने में दक्ष बनाना होना चाहिए।’’
विश्वविद्यालय का गुणवत्ता और मात्रा पर ध्यान केंद्रित
उन्होंने कहा, ‘‘पहले शैक्षणिक सत्र के अगले साल कंपनियों के साथ निकट परामर्श से शुरू होने की उम्मीद है, जिन्हें इस कवायद में ग्राहक माना जाएगा ताकि पाठ्यक्रम उद्योग की मांग के अनुरूप हों.’’ शिक्षा प्रभार संभालने वाले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय का गुणवत्ता और मात्रा पर ध्यान केंद्रित होगा।’’
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