
करियर डेस्क. सोमवार को जेईई एडवांस परीक्षा का रिजल्ट (JEE Advance exam 2020 result) घोषित होने के कुछ घंटों बाद ही दिल्ली हाईकोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय को एक मामले में नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दरअसल, परीक्षा में शामिल होने वाले एक कैंडिडेट के पिता पवन कुमार सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए रिजल्ट पर स्टे लगाने की मांग की थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय में एक व्यक्ति ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि जेईई (एडवांस) 2020 परीक्षा के दौरान एक केंद्र पर पारदर्शी कलम और पासपोर्ट साइज फोटो नहीं लाने की वजह से उनके पुत्र का उत्पीड़न किया गया। उन्होंने अपने बेटे हेतु यह परीक्षा फिर से आयोजित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया है। इस याचिका पर अदालत ने शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है।
होनहार छात्र के लिए उठाई आवाज
याचिकाकर्ता की तरफ से वकील मुकेश कुमार गोयल ने कोर्ट में दलील दी कि कैंडिडेट को पेपर शुरू होने के 45 मिनट बाद परीक्षा में शामिल किया गया। याचिकाकर्ता की मांग थी कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक रिजल्ट पर रोक लगाई जाए।वकील ने कोर्ट को ये भी बताया कि याचिकाकर्ता का बेटा एक होनहार छात्र है। उसने जेईई मेन परीक्षा में AIR- 30 हासिल की थी।
फोटो और पैन की वजह से 45 मिनट बर्बाद किए
याचिकाकर्ता का आरोप है कि गैर जरूरी कारणों से उनके बेटे के 45 मिनट बर्बाद किए गए। पहले कैंडिडेट को पासपोर्ट साइज फोटो न लाने की वजह से रोका गया। फोटो लाने के बाद कैंडिडेट को एग्जाम सेंटर से ये कहते हुए बाहर किया गया कि वह ट्रांसपेरेंट पैन नहीं लाया है।
कोर्ट ने कहा रिजल्ट नहीं रोक सकते
कोर्ट जेईई एडवांस परीक्षा के रिजल्ट पर स्टे लगाने से इंकार कर दिया। जस्टिस जयंत नाथ की बेंच ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, हमारी राय में जिस परीक्षा में हजारों स्टूडेंट्स शामिल हुए हों, उसके रिजल्ट पर इस तरह से रोक लगाना सही नहीं रहेगा।
अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को
दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर शिक्षा मंत्रालय और जेईई एडवांस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन से जवाब मांगा है। पवन कुमार सिंह द्वारा दायर की गई इस याचिका पर अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
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