
Major Blasts in India History Timeline: भारत ने आजादी के बाद से लेकर अब तक आतंकवाद की कई दर्दनाक घटनाएं देखी हैं। कभी बाजारों में धमाके हुए, तो कभी ट्रेन, एयरपोर्ट और मंदिर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया गया। इन हमलों ने न केवल निर्दोष लोगों की जान ली, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया एजेंसियों और देश की नीतियों में भी बड़े बदलाव लाए। हाल ही में दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के बीच जानिए भारत के इतिहास में दर्ज 20 सबसे बड़े आतंकी धमाकों और हमलों के बारे में।
आजादी के कुछ ही दिन बाद 17 अगस्त 1947 को हैदराबाद में पुलिस स्टेशन पर ब्लास्ट हुआ था। यह हमला सांप्रदायिक हिंसा के बीच हुआ था जिसमें कई पुलिसकर्मी मारे गए।
23 जून 1985 को कनाडा से भारत आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में बम धमाका हुआ। यह विस्फोट आयरलैंड के तट के पास हुआ था जिसमें 329 लोग मारे गए। यह भारत का सबसे बड़ा विमान हादसा था, जो आतंकी हमले के कारण हुआ।
17 अक्टूबर 1991 को उत्तराखंड के रुद्रपुर में रामलीला मैदान और अस्पताल इलाके में दो धमाके हुए। इन विस्फोटों में 40 से ज्यादा लोग मारे गए और 140 घायल हुए।
16 मार्च 1993 को कोलकाता के बावबाजार इलाके में एक बम फैक्ट्री में धमाका हुआ। इस हादसे में 69 लोगों की मौत हुई। यह विस्फोट एक एक्सिडेंटल ब्लास्ट था लेकिन इसका असर बेहद भयानक था।
12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 धमाके हुए, जिनमें 257 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए। यह भारत का पहला संगठित आतंकी हमला था, जिसके पीछे दाऊद इब्राहिम गैंग और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ बताया गया।
दिसंबर 2000 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने गोलीबारी की। इस हमले में 2 जवान और एक नागरिक की मौत हुई। यह हमला देश की राजधानी के दिल पर किया गया था।
दीवाली से ठीक पहले अक्टूबर 2005 में दिल्ली के सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी जैसे भीड़भाड़ वाले बाजारों में तीन धमाके हुए। जिसमें 62 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक घायल हुए।
11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में 7 जगहों पर बम धमाके हुए। इसमें 210 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए। यह भारत के रेल इतिहास की सबसे खतरनाक घटनाओं में से एक थी।
18 फरवरी 2007 को भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुआ। यह हमला हरियाणा के पानीपत के पास हुआ जिसमें 68 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे।
13 मई 2008 को गुलाबी नगरी जयपुर में 9 धमाकों की गूंज सुनाई दी। इन हमलों में 63 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए। आतंकियों ने बाजारों और मंदिरों को निशाना बनाया।
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 21 जगहों पर बम धमाके हुए। इन धमाकों में 56 लोगों की जान गई और कई घायल हुए। इसका जिम्मा इंडियन मुजाहिदीन ने लिया था।
13 सितंबर 2008 को दिल्ली के कनॉट प्लेस, करोल बाग और ग्रेटर कैलाश जैसे इलाकों में 5 धमाके हुए। इसमें 30 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए।
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक भीड़भाड़ वाले बाजार में बम विस्फोट हुआ। इसमें 5 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।
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30 अक्टूबर 2008 को असम में एक साथ 18 धमाके हुए। इन धमाकों में 77 लोगों की मौत हुई और 100 से ज्यादा घायल हुए। यह हमला असम के इतिहास का सबसे बड़ा ब्लास्ट था।
26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए 10 आतंकी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे और ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, नरीमन हाउस, सीएसटी स्टेशन और लियोपोल्ड कैफे जैसे स्थानों पर हमला किया। चार दिन तक चली इस मुठभेड़ में 166 लोगों की मौत हुई। अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। यह हमला भारत की सुरक्षा नीतियों में बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हुआ।
13 फरवरी 2010 को पुणे की प्रसिद्ध जर्मन बेकरी में बम धमाका हुआ। इसमें 17 लोग मारे गए और 60 से अधिक घायल हुए।
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2 जनवरी 2016 को पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया। इस हमले में 7 भारतीय जवान शहीद हुए और कई घंटों तक मुठभेड़ चली।
18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ। इसमें 19 जवान शहीद हुए। इस घटना के बाद भारत ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने टूरिस्ट बस और सुरक्षा बलों पर हमला किया। इस दर्दनाक घटना में 45 लोगों की जान गई।
10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार ब्लास्ट हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के कई वाहन और दुकानों को नुकसान हुआ। अब तक 8 लोगों की मौत और 24 घायल होने की पुष्टि हुई है।
इन घटनाओं ने भारत की जनता और सरकार दोनों को यह अहसास कराया कि आतंकवाद सिर्फ एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की समस्या है। हर हमले के बाद भारत ने और मजबूत होकर जवाब दिया और अपनी सुरक्षा को बेहतर बनाया। लेकिन हर घटना आज भी याद दिलाती है कि सावधानी और एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
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