21 साल की गूगल सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दिखाई ऑफिस लाइफ की झलक, Video दिन बना देगा

Published : Nov 26, 2024, 02:03 PM ISTUpdated : Nov 26, 2024, 10:09 PM IST
google engineer shares daily life in bengaluru office

सार

बेंगलुरु में गूगल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर दिव्यांशी ने अपनी रोमांचक दिनचर्या शेयर की है। G-Cab से लेकर आईसक्रीम ब्रेक तक, जानिए कैसा है गूगल में काम करने का अनुभव।

गूगल जैसी कंपनी में काम करना हर टेक प्रोफेशनल का सपना होता है। 21 साल की दिव्यांशी, जो बेंगलुरु में गूगल के ऑफिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, ने हाल ही में अपनी दिनचर्या शेयर की। उनकी यह कहानी न केवल गूगल में काम करने के अनुभव को दर्शाती है, बल्कि दिखाती है कि कैसे यह कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए एक परफेक्ट माहौल तैयार करती है।

शुरुआत: G-Cab के साथ यात्रा

दिव्यांशी की सुबह करीब 9:30 बजे शुरू होती है। गूगल की इन-हाउस कैब सेवा, G-Cab, उनकी यात्रा को आसान बनाती है। बेंगलुरु के ट्रैफिक में फंसने की चिंता किए बिना, वह आराम से बागमाने टेक पार्क स्थित गूगल ऑफिस पहुंचती हैं, जिसे वह "बेहद खूबसूरत" बताती हैं।

स्वादिष्ट नाश्ता: कई विकल्प और खास डिश

ऑफिस पहुंचते ही, दिव्यांशी अपने दिन की शुरुआत नाश्ते से करती हैं। गूगल के हर बिल्डिंग में कई कैफे हैं, जहां अलग-अलग व्यंजन मिलते हैं। उनका पसंदीदा नाश्ता और गर्म चॉकलेट उनकी एनर्जी को चार्ज कर देते हैं।

काम का मजा: कोडिंग और डिजाइनिंग

दिव्यांशी का काम कभी धीमे डिजाइन प्रोजेक्ट्स पर होता है, तो कभी फुल-फोकस कोडिंग पर। उन्हें कोडिंग का काम सबसे ज्यादा पसंद है, क्योंकि इससे उन्हें प्रोडक्टिव महसूस होता है। बीच-बीच में, वह गूगल की खूबसूरत मीटिंग रूम्स में जरूरी मीटिंग्स में भाग लेती हैं।

आईसक्रीम ब्रेक: वर्किंग डे का स्टार मोमेंट

हर बुधवार, गूगल में कर्मचारियों को आईसक्रीम ट्रीट मिलती है। इस बार दिव्यांशी ने बास्किन रॉबिन्स की कुकीज-एंड-क्रीम फ्लेवर का मजा लिया। साथ में अपनी पसंद के टॉपिंग्स भी। यह छोटा सा ब्रेक उनके दिन को खास बना देता है।

माइक्रो किचन: 20 फीट में खाना तैयार

गूगल का एक अनोखा कॉन्सेप्ट है माइक्रो किचन, जहां हर 20 फीट की दूरी पर स्नैक्स और ड्रिंक्स मिलते हैं। यह कर्मचारियों को एनर्जेटिक बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है।

स्मूद एंडिंग: ट्रैफिक से बचने की तरकीब

काम खत्म करने के बाद, दिव्यांशी ऑफिस में थोड़ा रुकती हैं ताकि ट्रैफिक कम हो जाए। फिर G-Cab से आराम से घर लौटती हैं।

गूगल: काम और आराम का सही संतुलन

दिव्यांशी की कहानी गूगल के वर्कल्चर को दिखाती है, जहां काम के साथ-साथ आराम और खुशी का पूरा ध्यान रखा जाता है। फ्लेक्सिबल कम्यूट, स्वादिष्ट खाना, आईसक्रीम ब्रेक और क्रिएटिव माहौल—यह सब गूगल को एक आइडियल वर्कप्लेस बनाते हैं। क्या आप भी गूगल जैसे माहौल में काम करना चाहेंगे? सोचिए, काम और मजा का यह संतुलन आपकी लाइफ को कितना खास बना सकता है!

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

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