एम्स बनेगा 100% सीपीआर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सभी स्टाफ, आम लोगों को भी स्पेशल कोर्स के जरिए ट्रेनिंग

Published : Feb 10, 2024, 12:56 PM ISTUpdated : Feb 10, 2024, 12:57 PM IST
AIIMS delhi CPR training institute

सार

वर्तमान समय में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को देखते हुए एम्स दिल्ली अपने डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों को भारत में निर्मित सीपीआर कोर्सों के साथ ट्रेंड करने जा रहा है। यह ट्रेनिंग आमलोगों को भी दी जाएगी। जानिए

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कार्डियक अरेस्ट के इलाज के लिए अपने डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों को भारत में निर्मित सीपीआर कोर्सों के साथ ट्रेंड करने जा रहा है। 100% कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनने की दिशा में संस्थान ने अपने निदेशक एम श्रीनिवास की उपस्थिति में इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (आईआरसीएफ) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

समय की मांग के अनुरूप एम्स की पहल

अधिकारियों ने कहा कि यह ट्रेनिंग की एक प्रक्रिया होगी। डॉक्टरों के मुताबिक हाल के दिनों में देखा गया है कि लाइफस्टाइल की दवाओं, तनावपूर्ण माहौल के कारण भी कई युवाओं को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है। इसलिए यह एम्स और आईआरसीएफ द्वारा वर्तमान समय की मांग के अनुरूप एक इनिशिएटिव है।

सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के अनुसार बनाये गये हैं सीपीआर कोर्स

कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने कहा यह कोर्स देश भर के एक्सपर्ट्स के साथ डेवलप किए गए हैं और हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि ये लाइफ सेविंग स्किल व्यापक रूप से फैले और हमारे देशवासियों को लाभान्वित करें।

आम लोगों के लिए सीपीआर का 4 घंटे का कोर्स

कोर्स की अवधि के बारे में जानकारी देते हुए एनेस्थिसियोलॉजी, दर्द निवारक और क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉ. लोकेश कश्यप ने कहा कि चार घंटे का कोर्स आम लोगों के लिए बनाया गया है, जबकि पैरामेडिक्स के लिए एक दिवसीय कोर्स और मेडिकोज के लिए दो दिवसीय कोर्स है। .

सफलता दर प्रत्येक मिनट के साथ 7-10 प्रतिशत कम

आईआरसीएफ के वैज्ञानिक निदेशक प्रो. राकेश गर्ग ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट किसी भी स्थान पर हो सकता है। ऐसी स्थिति में पास के किसी व्यक्ति को सीपीआर करना चाहिए। आमतौर पर सफलता दर प्रत्येक मिनट के साथ सीपीआर 7-10 प्रतिशत कम हो जाता है और इसे अटैक के शुरुआती कुछ मिनटों के भीतर जितनी जल्दी हो सके शुरू किया जाना चाहिए।

सीपीआर सही तरीके से किया जाना जरूरी

जीवन रक्षक प्रक्रिया होने के कारण इसे तकनीकी रूप से सही तरीके से किया जाना चाहिए और इसलिए इसमें कुछ ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है। चूंकि यह स्किल बेस्ड ट्रेनिंग है, इसलिए केवल सीखना या देखना पर्याप्त नहीं है। इसे एक ट्रेनिंग पुतले पर प्रैक्टिस करने की आवश्यकता है, इसलिए ट्रेनिंग की आवश्यकता है, उन्होंने कहा संस्थान ने अपने सभी कर्मचारियों को 100 प्रतिशत ट्रेंडसीपीआर एरिया बनाने के लिए सिखाने की पहल की है।

स्थानीय वातावरण के अनुसार अलग-अलग तरीके और निर्देश

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दिशानिर्देश उपलब्ध हैं, लेकिन यह अच्छी तरह से माना गया है कि दिशानिर्देश स्थानीय वातावरण के अनुसार होने चाहिए। आईआरसीएफ ने दिशानिर्देश बनाए हैं जो भारतीय समुदाय के लिए उपयुक्त हैं।

ये भी पढ़ें

कौन हैं रिवाबा जडेजा? विवादों में क्यों घिरी, जानिए कितनी पढ़ी-लिखी

Audi logo में क्यों होती हैं चार रिंग? जानिए दिलचस्प कहानी

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

Recommended Stories

Education Budget 2026: लड़कियों के हॉस्टल, नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स- छात्रों के लिए क्या-क्या नया?
Parth Pawar Education: कितने पढ़े-लिखे हैं पार्थ पवार? HR कॉलेज से UK तक की पढ़ाई और राजनीति का सफर