
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कार्डियक अरेस्ट के इलाज के लिए अपने डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों को भारत में निर्मित सीपीआर कोर्सों के साथ ट्रेंड करने जा रहा है। 100% कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनने की दिशा में संस्थान ने अपने निदेशक एम श्रीनिवास की उपस्थिति में इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (आईआरसीएफ) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
समय की मांग के अनुरूप एम्स की पहल
अधिकारियों ने कहा कि यह ट्रेनिंग की एक प्रक्रिया होगी। डॉक्टरों के मुताबिक हाल के दिनों में देखा गया है कि लाइफस्टाइल की दवाओं, तनावपूर्ण माहौल के कारण भी कई युवाओं को कार्डियक अरेस्ट हो रहा है। इसलिए यह एम्स और आईआरसीएफ द्वारा वर्तमान समय की मांग के अनुरूप एक इनिशिएटिव है।
सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के अनुसार बनाये गये हैं सीपीआर कोर्स
कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने कहा यह कोर्स देश भर के एक्सपर्ट्स के साथ डेवलप किए गए हैं और हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि ये लाइफ सेविंग स्किल व्यापक रूप से फैले और हमारे देशवासियों को लाभान्वित करें।
आम लोगों के लिए सीपीआर का 4 घंटे का कोर्स
कोर्स की अवधि के बारे में जानकारी देते हुए एनेस्थिसियोलॉजी, दर्द निवारक और क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉ. लोकेश कश्यप ने कहा कि चार घंटे का कोर्स आम लोगों के लिए बनाया गया है, जबकि पैरामेडिक्स के लिए एक दिवसीय कोर्स और मेडिकोज के लिए दो दिवसीय कोर्स है। .
सफलता दर प्रत्येक मिनट के साथ 7-10 प्रतिशत कम
आईआरसीएफ के वैज्ञानिक निदेशक प्रो. राकेश गर्ग ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट किसी भी स्थान पर हो सकता है। ऐसी स्थिति में पास के किसी व्यक्ति को सीपीआर करना चाहिए। आमतौर पर सफलता दर प्रत्येक मिनट के साथ सीपीआर 7-10 प्रतिशत कम हो जाता है और इसे अटैक के शुरुआती कुछ मिनटों के भीतर जितनी जल्दी हो सके शुरू किया जाना चाहिए।
सीपीआर सही तरीके से किया जाना जरूरी
जीवन रक्षक प्रक्रिया होने के कारण इसे तकनीकी रूप से सही तरीके से किया जाना चाहिए और इसलिए इसमें कुछ ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है। चूंकि यह स्किल बेस्ड ट्रेनिंग है, इसलिए केवल सीखना या देखना पर्याप्त नहीं है। इसे एक ट्रेनिंग पुतले पर प्रैक्टिस करने की आवश्यकता है, इसलिए ट्रेनिंग की आवश्यकता है, उन्होंने कहा संस्थान ने अपने सभी कर्मचारियों को 100 प्रतिशत ट्रेंडसीपीआर एरिया बनाने के लिए सिखाने की पहल की है।
स्थानीय वातावरण के अनुसार अलग-अलग तरीके और निर्देश
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दिशानिर्देश उपलब्ध हैं, लेकिन यह अच्छी तरह से माना गया है कि दिशानिर्देश स्थानीय वातावरण के अनुसार होने चाहिए। आईआरसीएफ ने दिशानिर्देश बनाए हैं जो भारतीय समुदाय के लिए उपयुक्त हैं।
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