
एजुकेशन डेस्क। देश में मुस्लिस साक्षरता दर की बात करें तो इसमें लगातार गिरावट ही देखने को मिल रही है। ऐसे में 10 भाई-बहनों के बीच रहकर पढ़ाई करने वाली बुशरा खानम समाज में मिसाल कायम कर रही हैं। बुशरा खानम पेशे से डॉक्टर हैं। पूर्वी दिल्ली में रहने वाली डॉ. बुशरा खानम जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी से बीयूएमएस हैं। वह तीन दशक से महिलाओं का इलाज कर रही हैं। इसके साथ ही महिलाओं को मासिक धर्म के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। वह महिलाओं को चित्र और पत्रिकाएं दिखाकर मासिक धर्म में लापरवाही पर होने वाली बीमारी के बारे में जागरूक करती हैं।
सास के नाम पर खोली क्लीनिक
डॉ. बुशरा खानम कहती हैं कि वह मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं. समाज के विरोध के बाद भी माताःपिता ने सभी बच्चों को पढ़ाया लिखाया। वह डॉक्टर बनीं और मोहम्मद राशिद से शादी हुई। शादी के बाद उनकी सास ने अपना क्लीनिक खोलने की सलाह दी। इसपर सास फातिमा के नाम पर ही उन्होंने अपना क्लीनिक खोला.
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मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता को लेकर कुछ पता नहीं था
डॉ. बुशरा खानम ने बताया कि समाज के निचले आर्थिक तबके से आने वाली महिला मरीजों को महवारी के समय गंदा कपड़ा इस्तेमाल करने वाली बीमारी के बारे में जरा भी जानकारी नहीं होती थी और बताने पर भी वह जिद पर अड़ी रहती थीं। यही वजह रही कि उन्होंने महिलाओं को मासिक धर्म के बारे में शिक्षित करने का मन बनाया.
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फंगल इंफेक्शन के ढेरों केस आते हैं
डॉ. बुशरा खानम बताती हैं कि उनकी क्लीनिक में फंगल इंफेक्शन के बहुत केस आते हैं। महिला रोगियों के गुप्तांगों में फंगल इन्फेक्शन होता है. काफी सोचने के बाद समझ आया कि ये महिलाएं मासिक धर्म के दौरान एक ही कपड़ा कई बार प्रयोग करती हैं जिससे फंगल इन्फेंक्शन होता है। मैंने लड़कियों औऱ महिला को पैड के प्रयोग को लेकर जागरूक किया। फंगल इंफेक्शन से बचने के उपाय बताए।
डॉ. बुशरा खानम कहती हैं कि वह इस बात से इत्तेफाक नहीं रखतीं कि मुस्लिम समुदाय की महिलाओं में मासिक धर्म को लेकर जागरूकता कम है। वह कहती हैं कि माताओं को तो खुद ऐसी स्थिति में बेटियों से खानपान का ध्यान रखने, सैनेटरी पैड प्रयोग करने और साफ अंडरगारमेंट्स पहनने के कहना चाहिए। मैं ऐसी स्थिति में हर दो घंटे में पैड बदलने और हाथ धोने की सलाह देती हूं।
कॉन्टेन्ट सोर्सः आवाज द वाइस
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