
एक सरकारी स्कूल में कक्षा 8 की, 13 साल की 3 छात्राओं ने बीटीएस स्टार्स से मिलने और दक्षिण कोरिया जाने के लिए अनोखा प्लान बनाया। यह एक ऐसा प्लान था जिसमें खर्च करने के लिए उनके पास मात्र 14 हजार रुपये थे। और तीनों में से किसी के भी पास पासपोर्ट नहीं था। पानी जहाज पर चढ़ने के लिए तमिलनाडु में इन लड़कियों ने विशाखापत्तनम को चुना। लड़कियां 4 जनवरी को चुपचाप अपने घरों से बाहर निकल गईं और इरोड, जो करूर के पास है से ट्रेन पकड़कर चेन्नई पहुंच गईं। इस बीच लड़कियां स्कूल से घर नहीं लौटीं, तो उनके माता-पिता ने करूर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसने राज्य भर में अधिकारियों को पहले ही सतर्क कर दिया और तलाश शुरू कर दी थी।
किसी के पास पासपोर्ट नहीं, कैश ₹14,000
बीटीएस की फैन इन लड़कियों के पास कोई पासपोर्ट नहीं था। सिर्फ कुल मिलाकर लगभग ₹14,000 की बचत थी, फिर भी उन्हें विश्वास था कि वे अपने फेवरेट बैंड बीटीएस से मिलने के लिए सियोल पहुंच जायेंगे। काफी मशक्कत के बाद गुरुवार रात उन्हें चेन्नई के एक होटल में कमरा मिल गया और उन्हें लगा कि वे बिना पासपोर्ट के जहाज से सियोल जा सकती हैं। उनकी बेताब कोशिशें उन्हें एक जगह से दूसरी जगह घसीटती रहीं और अंत में उनकी सारी एनर्जी खत्म हो गई। जब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा तो वे अपने घर पहुंचने के लिए चेन्नई से ट्रेन में सवार हो गईं।
खाना खरीदने उतरी, तो ट्रेन छूट गई
वेल्लोर जिला बाल कल्याण समिति के प्रमुख पी वेदनायगम के अनुसार कटपाडी रेलवे स्टेशन पर, जब वे आधी रात को खाना खरीदने के लिए उतरे, तो उनकी ट्रेन छूट गई। यहां पुलिस कर्मियों ने बच्चों और चाइल्ड लाइन अधिकारियों से बात की और हमें सतर्क कर दिया गया। उन्हें वेल्लोर जिले में एक सरकारी सुविधा में रखा गया और उनके माता-पिता को बुलाया गया और बच्चों और उनके माता-पिता के लिए काउंसलिंग सेशन आयोजित किए गए।
लड़कियों को थी बीटीएस के बारे में हर छोटी से छोटी जानकारी
लड़कियों को बीटीएस बैंड और स्टार्स के बारे में हर छोटी से छोटी जानकारी पता थी, उनके कपड़े पहनने के तरीके से लेकर और भी बहुत कुछ। उन्होंने पॉप बैंड सितारों द्वारा इस्तेमाल किए गए जूते के समान जूते खरीदे थे। बीटीएस स्टार उनकी प्रेरणा थे और स्मार्टफोन तक पहुंच ने उनके अंदर यह जुनून पैदा किया कि वे उनसे मिलने के लिए तरस रहे थे। काउंसिलिंग के दौरान इन बच्चों को बताया गया कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए 'विदेश जाने' का उनका निर्णय कितनी भयानक गलती थी।
पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया
काउंसलिंग के दौरन इन बच्चियों को केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गयाख् जिससे उन्हें अपने सपनों को साकार करने में मदद मिले। शिक्षा के महत्व और उसके मूल्य के बारे में बताया और माता-पिता को सलाह दी गई कि वे इस बात पर नजर रखें कि उनके बच्चे क्या करते हैं। बच्चियों को बताया गया कि स्मार्टफोन और इंटरनेट, हालांकि रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी हैं लेकिन उनका उपयोग मुख्य रूप से शिक्षा संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए।
बच्चियों का फैमिली बैकग्राउंड
बच्चियों की फैमिली बैकग्राउंड को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। एक लड़की के सिंगल पैरेंट हैं। दूसरी लड़की के पिता मानसिक रूप से विकलांग हैं। इन लड़कियों की मां खेत मजदूर के रूप में काम करती हैं। उनके पास इस बात की निगरानी के लिए समय नहीं है कि उनके बच्चे क्या करते हैं और वे क्या चाहते हैं। काउंसलिंग में माता-पिता से अनुरोध किया गया कि वे अपने बच्चों की देखभाल के लिए उचित व्यवस्था करें ताकि उन्हें सपोर्ट और मार्गदर्शन मिले। काउंसलिंग के बाद बच्चों को उनके माता-पिता के साथ उनके गृह जिले भेज दिया गया।
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