
KIIT Nepalese Student Suicide Controversy: ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित किंड्री इंडस्ट्रियल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIIT) में एक नेपाली छात्रा की आत्महत्या के बाद भारी बवाल मच गया। मामला इतना गंभीर हो गया कि यह भारत-नेपाल संबंधों तक जा पहुंचा। विरोध प्रदर्शन कर रहे नेपाली छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और भेदभाव के आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया। विश्वविद्यालय प्रशासन की पहले अनदेखी और फिर विवादास्पद बयानबाजी ने छात्रों का आक्रोश और बढ़ा दिया।
मामले में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, वहीं भारतीय दूतावास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। पुलिस ने इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन के कई बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार किया, हालांकि कुछ ही घंटों में उन्हें जमानत भी मिल गई। इस पूरे विवाद ने शिक्षा जगत, कानून व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए कि इस मामले की पूरी सच्चाई क्या है और क्यों KIIT को माफी तक मांगनी पड़ी। अबतक का पूरा मामला क्या है?
ओडिशा की Kalinga Institute of Industrial Technology (KIIT) यूनिवर्सिटी में एक 20 वर्षीय नेपाली छात्रा ने आत्महत्या कर ली, जिसके बाद कैंपस में हंगामा मच गया।
यूनिवर्सिटी ने हॉस्टल डायरेक्टर जयंती नाथ और कंप्यूटर साइंस की एसोसिएट प्रोफेसर मंजूषा पांडे को निलंबित कर दिया। इंटरनेशनल रिलेशंस ऑफिस के एक वरिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने पीड़िता की शिकायत पर पहले कोई कार्रवाई नहीं की थी, को भी सस्पेंड किया गया। दो सिक्योरिटी गार्ड रामकंता नायक और जोगेंद्र बेहरा को नौकरी से निकाल दिया गया और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल शिवानंद मिश्रा, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन प्रताप कुमार चंपाती और हॉस्टल डायरेक्टर सुधीर कुमार रथ को गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई। आरोपी छात्र, जो लखनऊ के एक इंजीनियर का बेटा है, को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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नेपाली छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें हॉस्टल खाली करने के लिए कहा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि कुछ अधिकारियों ने नेपाल की GDP को लेकर विवादित बयान दिए। छात्रों ने आरोप लगाया कि सिक्योरिटी गार्ड्स ने उन्हें पीटा और जबरन बाहर निकाला।
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस मामले में दखल दिया और भारत सरकार से बातचीत की। भारत में नेपाल के दूतावास ने छात्रों की सुरक्षा का आश्वासन देते हुए कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी।
राज्य सरकार ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सत्यब्रत साहू की अगुवाई में उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई। इसमें महिला एवं बाल विकास सचिव शुभा शर्मा और उच्च शिक्षा सचिव अरविंद अग्रवाल भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि छात्रों के साथ किसी भी तरह की ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यूनिवर्सिटी ने छात्रों के प्रति किए गए दुर्व्यवहार पर माफी मांगी और कहा कि भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। KIIT प्रशासन ने नेपाली छात्रों से अपील की कि वे लौटकर अपनी पढ़ाई जारी रखें।
BJD नेता प्रताप देब ने ओडिशा में कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए BJP सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक तारा बहिनिपति ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की। बता दें कि इस घटना ने भारत-नेपाल संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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