Who is Nandini Chakravorty First Woman Chief Secretary West Bengal: नंदिनी चक्रवर्ती कौन हैं? जानिए पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव का एजुकेशन, IAS करियर और पर्सनल लाइफ की रोचक बातें।
कौन हैं नंदिनी चक्रवर्ती IAS? वेस्ट बंगाल की पहली महिला CS
नंदिनी चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव बनी हैं। राज्यपाल सीवी आनंद बोस की मंजूरी के बाद उनकी नियुक्ति हुई। वह 1994 बैच की IAS अधिकारी हैं और फिलहाल 56 साल की हैं। यह नियुक्ति राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है, जो खासतौर पर युवाओं और सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए प्रेरणादायक है।
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नंदिनी चक्रवर्ती का शिक्षा से प्रशासन तक का सफर
नंदिनी चक्रवर्ती का जन्म 5 फरवरी 1973 को कोलकाता में हुआ। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज से की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और 1993 में उन्हें जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
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नंदिनी चक्रवर्ती का IAS करियर और अहम जिम्मेदारियां
IAS बनने के बाद नंदिनी चक्रवर्ती ने कई अहम विभागों में काम किया। वाम मोर्चा सरकार के समय वह WBIDC की प्रमुख रहीं, जब सिंगुर और नंदीग्राम आंदोलन अपने चरम पर थे। 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार आने के बाद भी उन्हें इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट और सूचना-संस्कृति विभाग की जिम्मेदारी मिली। बाद में 2024 में उन्हें राज्य का गृह सचिव बनाया गया, जो मुख्य सचिव बनने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुआ।
नंदिनी चक्रवर्ती का करियर हमेशा आसान नहीं रहा। एक समय वह मुख्यमंत्री की प्राथमिकता से बाहर हो गईं और उन्हें राज्य गजेटियर का संपादक बना दिया गया। बाद में वह राज्यपाल की सचिव बनीं, जहां मतभेदों के चलते उन्हें हटाया गया। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा राज्य सरकार के अहम पदों पर वापसी की, जो उनके मजबूत प्रशासनिक अनुभव को दिखाता है।
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वेस्ट बंगाल की पहली महिला मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती की पर्सनल लाइफ
नंदिनी चक्रवर्ती एक बंगाली हिंदू परिवार से आती हैं और अविवाहित हैं। उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह सार्वजनिक सेवा को समर्पित किया है। उनका सफर यह बताता है कि अच्छी शिक्षा, निरंतर मेहनत और धैर्य के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए वह एक मजबूत रोल मॉडल हैं, जो यह सिखाती हैं कि असफलता नहीं, बल्कि वापसी मायने रखती है।