
NEET Result 2024: केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया था कि 1563 कैंडिडेट के एनईईटी यूजी रिजल्ट को रद्द करने का फैसला किया गया है, जिन्हें टाइम लॉस मामले को लेकर ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। इसमें कहा गया है कि इन छात्रों को दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। केंद्र के इस प्रपोजल को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने NEET UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के संबंध में एक याचिका का निपटारा कर दिया और केंद्र को 1,563 उम्मीदवारों के परिणाम रद्द करने की अनुमति दे दी, जिन्हें 5 मई को नीट परीक्षा के दौरान समय बर्बाद होने के मुआवजे के रूप में ग्रेस मार्क्स दिए गए थे। अदालत ने इन कैंडिडेट के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने के केंद्र के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सुप्रीम कोर्ट के सामने माना कहा कि नीट-यूजी में पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं एनटीए ने कोर्ट में यह माना की कैंडिडेट्स को ग्रेस मार्क्स देने का फैसला गलत था।
23 जून को दोबारा परीक्षा, कैंडिडेट जो दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते उनके पास क्या है ऑप्शन
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को 23 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित करने और उन 1563 उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड रद्द करने की अनुमति दी। इसमें कहा गया है कि प्रभावित उम्मीदवार जो दोबारा परीक्षा में नहीं बैठना चाहते हैं, उन्हें बिना ग्रेस मार्क्स के अपने मूल अंक को ही स्वीकार करना होगा।
30 जून से पहले घोषित होंगे नीट री एग्जाम रिजल्ट, काउंसलिंग 6 जुलाई से
एनटीए ने बताया है कि री एग्जाम के रिजल्ट 30 जून से पहले घोषित किए जाएंगे और एडमिशन के लिए काउंसलिंग 6 जुलाई से शुरू होगी। कोर्ट ने एनईईटी परीक्षा के संचालन में कथित कदाचार को उठाने वाली याचिकाओं के संबंध में एक नोटिस भी जारी किया और इसे आने वाली याचिकाओं के साथ टैग किया। इसमें से एक याचिका फिजिक्सवाला के सीईओ अलख पांडे द्वारा भी दायर की गई थी। बता दें कि जिन उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, उनके लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित चार सदस्यीय पैनल द्वारा सुझाया गया था। NEET UG 2024 को लेकर विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने 1,563 से अधिक उम्मीदवारों को दिए गए ग्रेस मार्क्स की समीक्षा के लिए पूर्व संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष के नेतृत्व में चार सदस्यीय पैनल का गठन किया। 8 जून को एनटीए द्वारा घोषित इस पैनल का उद्देश्य बढ़े हुए अंकों के आरोपों की समीक्ष करना था। जिसके कारण 67 कैंडिडेट टॉपर बन गये थे, जिनमें हरियाणा के एक ही केंद्र के 6 कैंडिडेट भी शामिल थे। पैनल ने समीक्षा के बाद ग्रेस मार्क्स रद्द करने और इन कैंडिडेट के लिए दोबारा एग्जाम कराने की सलाह दी।
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