NMC New Rules: एमबीबीएस के बाद पीजी में एडमीशन के लिए 5 साल तक वैलिड रहेगा NExT का स्कोर, जानें और क्या है खास

Published : Jul 03, 2023, 07:46 PM IST
NExT

सार

NMC New Rules:  नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से नए नियम लागू किए गए हैं। अब एमबीबीएस के बाद पीजी में एडमीशन के लिए 5 साल तक NExT का स्कोर वैलिड रहेगा। 

एजुकेशन डेस्क। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स में दाखिले के लिए पहली बार होने वाले नेक्स्ट (NExT) एग्जाम के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन ने कई नियम तय कर दिए हैं। इसमें यदि कोई अभ्यर्थी नेक्स्ट की स्टेप 1 परीक्षा देता है तो अगले पांच साल के लिए मेडिकल कॉलेजों में एमडी और एमएस के लिए उसके मार्क्स मान्य होंगे। कैंडिडेट को फिर से नेक्स्ट एग्जाम नहीं देना होगा।

नेक्स्ट स्टेप 2 भी पास करना जरूरी
हालांकि अगर कोई कैंडिडेट अपने मार्क्स इंप्रूव करने के लिए फिर से नेक्स्ट एग्जाम में शामिल होना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है लेकिन शर्त ये है कि वह एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला लेने के 10 साल के अंदर नेक्स्ट स्टेप 2 की परीक्षा पास कर ली हो। अगर कैंडिडेच नेक्स्ट स्टेप 1 के एग्जाम में दोबारा शामिल होता है तो पीजी में एडमीशन के लिए पहले एग्जाम में मिला स्कोर इनवैलिड माना जाएगा। 

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नेक्स्ट एग्जाम दो फेज में होगा
NExT एग्जाम दो फेज में आयोजित किया जाएगा। नेक्स्ट स्टेप 1 और नेक्स्ट स्टेप 2 में यह एग्जाम होंगे। नेक्स्ट स्टेप 1 कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम होगा जिसमें ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन पूछे जाएंगे। पीजी कोर्स में एडमीशन के लिए रैंक देने के लिए नेक्स्ट स्टेप-1 एग्जाम के मार्क्स ही वैलि़ड होंगे लेकिन कैंडिडेट को नेक्स्ट स्टेप-2 एग्जाम भी पास करनी जरूरी होगा।

नेक्स्ट स्टेप 1 पास करने के बाद इंटर्नशिप 
एमबीबीएस के अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स के लिए नेक्स्ट स्टेप 1 एग्जाम पास करने के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होगी। इसके बाद स्टूडेंट को नेक्स्ट स्टेप 2 एग्जाम भी पास करना होगा। इस एग्जाम में ओरल टेस्ट, प्रैक्टिकल और क्लीनिकल क्वेश्चन पूछे जाएंगे। ये दोनों एग्जाम पास करने के बाद ही डॉक्टर को प्रैक्टिस करने का लाइसेंस दिया जाएगा। 

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फाइनल ईयर में हर सब्जेक्ट्स में 50 परसेंट जरूरी
फाइनल एमबीबीएस एग्जाम पास करने के लिए नेक्स्ट 1 में सभी 6 सब्जेक्ट में अलग-अलग 50% मार्क्स लाना जरूरी होगा। नेक्स्ट 1 में एक या अधिक सब्जेक्ट में फेल होने पर कैंडिडेट को उन्हीं सब्जेक्ट के एग्जाम दोबारा देने होंगे जिसमें वे फेल हुए हैं। इसके बाद छात्र इंटर्नशिप के लिए एलिजिबिल होंगे।

रैंक के लिए टाई ब्रेकर का नियम
एग्जाम में सेम मार्क्स लाने पर कम बार नेक्स्ट एग्जाम में शामिल कैंडिडेट को बेटर रैंक मिलेगी।  मेडिसिन एंड एलाइड डिसिप्लीन्स, सर्जरी एंड एलाइड डिसिप्लीन्स, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनाकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ओटोराइनोलैरिंगोलॉजी, ऑफथैल्मोलॉजी सब्जेक्ट्स में अधिक मार्क्स लाने वाले कैंडिडेट को बेटर रैंक मिलेगी। नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से 28 जुलाई को एम्स दिल्ली में मॉक टेस्ट है।

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