क्या आप जानते हैं "कौआ चला हंस की चाल" का मतलब, 6 जबरदस्त मीनिंग वाले मुहावरे

Published : Nov 22, 2024, 10:06 AM IST
Muhavare in hindi

सार

कठिन मुहावरों और उनके अर्थों को समझें जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की कुंजी हैं। जानिए कैसे ये मुहावरे आपकी भाषा और सांस्कृतिक समझ को परखते हैं।

Hindi Idioms and Meanings: कंपीटिटिव परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए भाषा और साहित्य का ज्ञान एक महत्वपूर्ण पहलू है। इन परीक्षाओं में कठिन क्षेत्रीय मुहावरों का अक्सर प्रयोग होता है, जिनसे उम्मीदवारों की भाषा पर पकड़ और उनके सांस्कृतिक समझ का आकलन किया जाता है। मुहावरे न केवल भाषा को समृद्ध बनाते हैं बल्कि उनके गहरे अर्थ भी परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझाने में मदद करते हैं। जानिए कुछ ऐसे प्रमुख क्षेत्रीय मुहावरों और उनके अर्थों को विस्तार से, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।

मुहावरा- "पानी-पानी होना"

मुहावरे का अर्थ: शर्मिंदा होना। यह मुहावरा उन परिस्थितियों में प्रयुक्त होता है जब किसी व्यक्ति को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। उदाहरण: टीचर की डांट सुनकर वह सबके सामने पानी-पानी हो गया।

मुहावरा- "गुल खिलाना"

मुहावरे का अर्थ: कोई बड़ी उपलब्धि या अनहोनी करना। यह मुहावरा तब इस्तेमाल होता है जब किसी ने असामान्य या चौंकाने वाला कार्य किया हो। उदाहरण: उसने अपनी मेहनत से पढ़ाई में ऐसा गुल खिलाया कि पूरे गांव में उसका नाम हो गया।

मुहावरा- "खून का प्यासा होना"

मुहावरे का अर्थ: दुश्मनी की हद तक किसी से नाराज होना। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे के प्रति अत्यधिक क्रोध और प्रतिशोध की भावना रखता है, तब यह मुहावरा प्रयोग किया जाता है। उदाहरण: उसके अपमान के बाद से वह खून का प्यासा बन गया।

मुहावरा- "मियां मिट्ठू बनना"

मुहावरे का अर्थ: अपनी ही प्रशंसा करना। जब कोई व्यक्ति अपने गुणों का बखान स्वयं करता है, तो इस मुहावरे का उपयोग किया जाता है। उदाहरण: अपनी छोटी-छोटी उपलब्धियों पर मियां मिट्ठू बनने का कोई फायदा नहीं।

मुहावा- "कौआ चला हंस की चाल"

मुहावरे का अर्थ: दूसरों की नकल करने में अपनी पहचान खो देना। जब कोई व्यक्ति अपनी अलग पहचान छोड़कर किसी और की नकल करता है और असफल हो जाता है, तो यह कहावत लागू होती है। उदाहरण: उसकी जिंदगी पर कौआ चला हंस की चाल बिल्कुल सटीक बैठती है।

मुहावरा- "चूल्हा चौका करना"

मुहावरे का अर्थ: घर के रोजमर्रा के काम करना। इस मुहावरे का उपयोग घरेलू जिम्मेदारियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। उदाहरण: वह पढ़ाई छोड़कर चूल्हा चौका करने में लग गई।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

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