
एजुकेशन डेस्क। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) साउथ दिल्ली की बैठक में हिन्दी भाषा को बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा की गई। आईआईएमसी के डायरेक्टर जनरल और नराकास अध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी कहा कि विश्व के 260 से ज्यादा फॉरेन यूनिवर्सिटी में हिंदी पढ़ाई जाती है। 64 करोड़ लोगों की मातृभाषा हिन्दी ही है। 24 करोड़ लोगों की सेकेंड लैंग्वेज हिन्दी और करीब 42 करोड़ लोगों की थर्ड लैंग्वेज हिंदी है। वर्ल्ड में 1 अरब 30 करोड़ लोग हिंदी बोलने और समझने वाले हैं। उन्होंने कहा कि 2030 तक दुनिया का हर पांचवा व्यक्ति हिंदी बोलेगा।
इंटरनेट में हिन्दी का यूज बढ़ा
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी में हिंदी का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है। हिंदी की पॉपुलरटी का अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं कि इंटरनेट पर हिंदी पढ़ने वालों की संख्या हर साल 94 परसेंट बढ़ा है। वहीं इंग्लिश में 17 फीसदी यूजर्स ही बढ़ें हैं।
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2025 तक होंगे 30 करोड़ हिन्दी इंटरनेट यूजर
उन्होंने एक सर्वे रिपोर्ट के तहत बताया कि 2025 तक 30 करोड़ लोग हिन्दी में इंटरनेट यूज करने लगेंगे। 2025 तक 9.7 करोड़ लोग डिजिटल पेमेंट के लिए हिंदी का इस्तेमाल करने लगेंगे। जबकि 2016 में यह संख्या सिर्फ 2.2 करोड़ थी। सरकारी काम के लिए 2016 तक 2.4 करोड़ लोग हिंदी का प्रयोग करते थे, जो 2025 में 10.9 करोड़ हो जाएंगे।
कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करना हुआ सरल
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि सेंट्रल गवर्मेंट के ऑफिसों में हिंदी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने के लिए इंडियन गवर्नमेंट के ऑफिशियल लैंग्वेज डिपार्टमेंट की ओर से उठाए गए कदम से कंप्यूटर पर हिंदी में कार्य करना अधिक आसान हो गया है। राजभाषा विभाग की ओर से वेब पर बेस इनफॉरमेंशन मैनेजमेंट सिस्टम डेवलप किया गया है। भारत सरकार के सभी कार्यालयों में हिंदी के उत्तरोत्तर प्रयोग से संबंधित तिमाही प्रगति रिपोर्ट तथा अन्य रिपोर्टें राजभाषा विभाग को तेजी से भिजवाना आसान हो गया है। बैठक में कई अन्य लोग भी रहे।
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