
Vice President Salary India: भारत में इस समय उपराष्ट्रपति पद को लेकर सियासत तेज है। एनडीए और विपक्षी INDIA गठबंधन अपने-अपने उम्मीदवार को फाइनल करने में जुटे हुए हैं। खास बात यह है कि संख्या बल में एनडीए विपक्ष से कहीं आगे है, इसलिए चर्चा सबसे ज्यादा इस बात की हो रही है कि बीजेपी आखिर किस नाम पर दांव लगाएगी। माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार तय करने में आरएसएस की राय को भी अहमियत मिलेगी। जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने से यह पद खाली हो गया है और अब सबकी निगाहें नए उपराष्ट्रपति पर टिकी हुई हैं। लेकिन इसी बीच एक सवाल लोगों के मन में उठ रहा है, देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठने वाले उपराष्ट्रपति की सैलरी और सुविधाएं आखिर कैसी होती हैं? जानिए
भारत के उपराष्ट्रपति को न सिर्फ एक ऊंचा संवैधानिक दर्जा मिलता है, बल्कि इसके साथ कई तरह की सैलरी और भत्तों की सुविधा भी दी जाती है। उन्हें हर महीने 4 लाख रुपए सैलरी मिलती है। यह सैलरी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे अन्य टॉप पदों के बराबर तय की गई है। वेतन के अलावा, अलग-अलग भत्ते और अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाती हैं। दरअसल, उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए उनकी सैलरी इसी आधार पर तय की जाती है।
सैलरी के अलावा उपराष्ट्रपति को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, जिनका पूरा खर्च भारत सरकार उठाती है। जिसमें-
सरकारी आवास: दिल्ली के लुटियंस जोन में शानदार सरकारी बंगला दिया जाता है।
गाड़ी और सुरक्षा: उन्हें सरकारी गाड़ी और हाई लेवल सिक्योरिटी मिलती है।
स्टाफ की सुविधा: कामकाज संभालने के लिए सचिवालय स्टाफ और अन्य कर्मचारी तैनात रहते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं: सरकारी खर्च पर पूरी मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
यात्रा भत्ता: देश और विदेश की ऑफिशियल यात्राओं के लिए विशेष यात्रा भत्ता और अन्य खर्च दिए जाते हैं।
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उपराष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद भी सुविधाएं खत्म नहीं होतीं। पूर्व उपराष्ट्रपति को उनकी सैलरी का लगभग 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता है। मौजूदा समय में यह रकम लगभग 1.5 से 2 लाख प्रतिमाह है। इसके अलावा उन्हें निजी सचिव और सहायक स्टाफ की सुविधा, कार्यालय स्पेस, घरेलू हवाई यात्रा और स्वास्थ्य सेवाएं भी दी जाती हैं। समय-समय पर सरकार इस पेंशन राशि में संशोधन भी कर सकती है।
कुल मिलाकर, उपराष्ट्रपति का पद केवल एक संवैधानिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि एक सम्मानजनक और सुविधाओं से भरपूर पद भी है। यही वजह है कि इस पद पर नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में हमेशा जबरदस्त हलचल रहती है।
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