Dadasaheb Phalke Award: क्या है दादा साहेब फाल्के अवार्ड, किसे और क्यों दिया जाता है ? इंपोर्टेंट फैक्ट्स

Published : Sep 26, 2023, 03:23 PM ISTUpdated : Sep 26, 2023, 06:23 PM IST
Dadasaheb Phalke Award: क्या है दादा साहेब फाल्के अवार्ड, किसे और क्यों दिया जाता है ?  इंपोर्टेंट फैक्ट्स

सार

Dadasaheb Phalke Award: दादा साहब फाल्के अवार्ड की शुरुआत भारत सरकार द्वारा भारतीय सिनेमा में दादा साहब फाल्के के योगदान के सम्मान में की गई थी। दादा साहब फाल्के अवार्ड किसे और क्यों दिया जाता है। अवार्ड में क्या मिला है पूरी डिटेल आगे पढ़ें।

Dadasaheb Phalke Award: दादा साहब फाल्के अवार्ड की शुरुआत भारत सरकार द्वारा भारतीय सिनेमा में दादा साहब फाल्के के योगदान के सम्मान में की गई थी। दादा साहब फाल्के ने 1913 में भारत की पहली फुल लेंथ फीचर फिल्म, राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। सिनेमा के क्षेत्र में यह सर्वोच्च अवार्ड भारतीय सिनेमा की वृद्धि और विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को दी जाती है। इस अवार्ड में एक स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और ₹10 लाख का नकद अवार्ड दिया जाता है। 1969 में देविका रानी को पहला दादा साहेब फाल्के अवार्ड दिया गया था। जानें दादा साहेब फाल्के अवार्ड क्यों और किसे दिया जाता है। इसकी शुरुआत कब हुई?

कौन थे दादा साहब फाल्के ?

दादा साहेब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को एक मराठी परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम धुंडिराज गोविंद फाल्के था। उन्होंने नासिक से पढ़ाई की। उन्होंने सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई में नाटक और फोटोग्राफी की ट्रेनिंग ली। फिर वे जर्मनी गये और फिल्म बनाना सीखा। भारत लौटकर उन्होंने अपनी पहली मूक फिल्म राजा हरिश्चन्द्र का निर्माण किया।

भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च अवार्ड

दादा साहब फाल्के अवार्ड को भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च अवार्ड माना जाता है। यह अवार्ड भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फिल्म समारोह निदेशालय द्वारा प्रदान किया जाता है। दादा साहेब फाल्के अवार्ड राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड समारोह के दौरान प्रदान किया जाता है, जो हर साल विज्ञान भवन, नई दिल्ली में वर्ष की सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्मों, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और कई अन्य संबंधित अवार्डों का सम्मान करने के लिए आयोजित किया जाता है।

दादा साहेब फाल्के अवार्ड किसे दिया जाता है ?

दादा साहेब फाल्के अवार्ड एक लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड है जो भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से संबंधित प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भारतीय सिनेमा के प्रचार और विकास में उनके बहुमूल्य और अनुकरणीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

दादा साहेब फालके अवार्ड की शुरुआत कब हुई ?

दादा साहेब फालके अवार्ड की शुरुआत वर्ष 1969 में समकालीन भारतीय सिनेमा में दादा साहब फाल्के के योगदान की स्मृति में की गई थी। गौरतलब है कि भारतीय सिने जगत में उनके सबसे मूल्यवान योगदान के कारण दादा साहब फाल्के को भारतीय सिनेमा का पितामह भी कहा जाता है। दादा साहब फाल्के ने ही पहली भारतीय फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था।

दादा साहेब फालके अवार्ड की अवार्ड राशि क्या है ?

दादा साहेब फालके अवार्ड के साथ 10 लाख रुपये का नकद अवार्ड, स्वर्ण कमल पदक और एक शॉल भी दिया जाता है। यह एक राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड है। केवल हिंदी ही नहीं बल्कि सभी क्षेत्रीय भाषा की फीचर फिल्में इस अवार्ड के लिए समान रूप से योग्य मानी जाती हैं। इस अवार्ड का सेलेक्शन पैनल (जूरी) भारतीय फिल्म उद्योग के प्रतिष्ठित व्यक्तियों का एक पैनल है।

दादा साहब फाल्के अवार्ड के बारे में इंपोर्टेंट फैक्ट

प्रदानकर्ता- भारत सरकार

शुरुआत - वर्ष 1969

प्रथम प्राप्तकर्ता - देविका रानी (1969)

अवार्ड का प्रकार - राष्ट्रीय स्तर, लाइफ टाइम अचीवमेंट

नकद - 10 लाख रुपये

दादा साहेब फाल्के अवार्ड के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • दादा साहब फाल्के का असली नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था। उनका जन्म 30 अप्रैल 1870 को तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत के त्र्यंबकेश्वर में हुआ था। वह समकालीन भारतीय सिनेमा के प्रख्यात निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक थे। उनकी सबसे महत्वपूर्ण फिल्में मोहिनी भस्मासुर, सत्यवानसावित्री, लंका दहन, श्रीकृष्ण जन्म और कालिया मर्दन हैं।
  • दादा साहब फाल्के अवार्ड भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है जो भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • फिल्म निर्माता दादा साहब फाल्के को सम्मानित करने के लिए 1971 में भारत सरकार द्वारा एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।
  • इस अवार्ड की शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 1969 में की गई और शुरुआती वर्ष 1969 के लिए पहली अवार्ड विजेता देविका रानी थीं। यह अवार्ड 17वें राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड समारोह के दौरान दिया गया था।
  • पृथ्वीराज कपूर ही एकमात्र  यह अवार्ड विजेता थे जिन्हें वर्ष 1971 में मरणोपरांत दादा साहेब फाल्के अवार्ड मिला। अभिनेता राज कपूर ने उनकी ओर से यह अवार्ड प्राप्त किया। बाद में राज कपूर को भी साल 1987 में ये अवॉर्ड मिला।
  • दादा साहेब फाल्के अवार्ड की पहली विजेता देविका रानी को भारतीय सिनेमा की प्रथम महिला भी कहा जाता है।
  • दादा साहेब फाल्के अवार्ड के दूसरे प्राप्तकर्ता बीरेंद्रनाथ सरकार बंगाली फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। वह कलकत्ता में दो थिएटरों के संस्थापक थे। वह यह अवार्ड पाने वाले पहले बंगाली फिल्म निर्माता भी थे।
  • इस अवार्ड के तीसरे प्राप्तकर्ता पृथ्वीराज कपूर ने 1931 की पहली ध्वनि फिल्म आलम आरा में अभिनय किया।
  • वर्ष 1974 में 22वें राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड समारोह में यह अवार्ड पाने वाले पहले तेलुगु व्यक्ति बोमिरेड्डी नरसिम्हा रेड्डी थे। वह पद्म भूषण पाने वाले पहले फिल्म निर्माता भी थे।
  • वर्ष 1978 में इस अवार्ड से सम्मानित रायचंद बोराल इस अवार्ड को जीतने वाले पहले संगीत निर्देशक थे। वह भारतीय सिनेमा में पार्श्व गायन की प्रणाली शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे।
  • 1981 में अवार्ड जीतने वाले प्रसिद्ध संगीत निर्देशक नौशाद भारतीय सिनेमा में साउंड मिक्सिंग की तकनीक लाए।
  • दुर्गा खोटे को यह अवार्ड वर्ष 1983 में मिला था। वह मराठी भाषा की बोलती फिल्म 'अयोध्या चा राजा' में अभिनय करने वाली पहली महिला थीं। वह यह अवार्ड पाने वाली पहली मराठी फिल्म कलाकार भी थीं।
  • सत्यजीत रे को वर्ष 1984 में प्रसिद्ध फिल्म पाथेर पांचाली के लिए सम्मानित किया गया, जिसने दुनिया का ध्यान भारतीय सिनेमा की ओर खींचा।
  • वर्ष 1992 में यह अवार्ड जीतने वाले पहले असमिया भूपेन हजारिका थे। उन्हें कई असमिया और हिंदी फिल्मों में उनके पार्श्व गायन के लिए जाना जाता है।
  • वर्ष 1995 में यह अवार्ड जीतने वाले पहले कन्नड़ व्यक्ति राजकुमार थे। वह कन्नड़ फिल्मों के अभिनेता और पार्श्व गायक थे।
  • वर्ष 1996 में दादा साहब फाल्के अवार्ड जीतने वाले पहले तमिल अभिनेता शिवाजी गणेशन हैं।
  • दादा साहब फाल्के अवार्ड जीतने वाले पहले गीतकार कवि प्रदीप थे। वह अपने देशभक्ति गीतों जैसे हम लाए हैं तूफान से किश्ती निकल के, ऐ मेरे वतन के लोगों आदि के लिए लोकप्रिय हैं।
  • वर्ष 2004 में यह अवार्ड जीतने वाले मलयालम सिनेमा के पहले व्यक्ति अदूर गोपालकृष्णन थे। उन्होंने अपनी पहली फिल्म स्वयंवरम के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड भी जीता।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

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