Engineers Day 2026: करियर की शुरुआत में मिली फटकार, काम ने बदली किस्मत; ऐसे बने महान इंजीनियर विश्वेश्वरैया

Published : Sep 15, 2026, 10:28 AM IST
Engineers Day 2026 M Visvesvaraya Inspiring Journey

सार

M Visvesvaraya Career: Engineers Day 2026 पर जानिए एम. विश्वेश्वरैया की कहानी, जिन्हें करियर की शुरुआत में फटकार मिली थी। लेकिन बाद में सिंचाई, बांध और इंजीनियरिंग में उनके योगदान ने भारत को नई दिशा दी।

Engineers Day 2026: आज 15 सितंबर को देश इंजीनियर्स डे मना रहा है। यह दिन किसी सामान्य इंजीनियर के सम्मान में नहीं, बल्कि उस शख्स की याद में मनाया जाता है जिसने इंजीनियरिंग को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि देश के विकास का जरिया बनाया। नाम था मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (M. Visvesvaraya)। उनका जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के कोलार जिले में हुआ था। जानिए विश्वेश्वरैया की इंजीनियरिंग करियर के शुरुआती दिनों की कहानी।

शुरुआत ऐसी कि वरिष्ठ ने लिख दिया था ‘करियर खराब’

विश्वेश्वरैया की इंजीनियरिंग सेवा की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं रही। 1884 में, जब वह महज 22 साल के थे, उन्होंने बाढ़ की वजह से प्रभावित पाइप बिछाने का काम कुछ समय के लिए रोकने की अनुमति मांगी थी। उनका तर्क था कि ऐसे हालात में काम जारी रखने से सरकारी पैसे की बर्बादी हो सकती है। लेकिन उनके वरिष्ठ अधिकारी ने उनकी इस पहल को आदेश मानने में कमजोरी समझा और विभागीय टिप्पणी में उनके करियर को लेकर नकारात्मक बात दर्ज कर दी। विश्वेश्वरैया पीछे नहीं हटे। वह दोबारा काम पर लौटे और बाढ़ के बीच तीन दिन तक अपने कैंप से कटे रहने के बावजूद परियोजना पूरी की। बाद में उनके काम को देखकर वही टिप्पणी वापस लेनी पड़ी।

सिंचाई से लेकर बांध तक, सोच थी जरूरत से आगे

पुणे के पास नीरा नहर परियोजना में उन्होंने ‘ब्लॉक सिस्टम ऑफ इरिगेशन’ विकसित किया। इसका मकसद सीमित पानी को ज्यादा किसानों तक पहुंचाना था। इस व्यवस्था की सफलता ने उन्हें ब्रिटिश दौर के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में अलग पहचान दिलाई। खड़कवासला जलाशय के लिए उन्होंने ऑटोमैटिक स्लुइस गेट्स भी डिजाइन किए, जिससे जलाशय की क्षमता बढ़ाई जा सकी। इस डिजाइन का पेटेंट भी उन्होंने लिया था।

हैदराबाद की बाढ़ से मैसूर के बड़े बांध तक

1908 में हैदराबाद में आई भीषण बाढ़ के बाद विश्वेश्वरैया को शहर के ड्रेनेज और बाढ़ नियंत्रण की योजना तैयार करने के लिए बुलाया गया। आगे चलकर मैसूर में उनके नेतृत्व में कृष्णराज सागर (KRS) बांध जैसी बड़ी परियोजना सामने आई, जिसने सिंचाई, बिजली और औद्योगिक विकास को गति दी। इंजीनियर के साथ-साथ प्रशासक के रूप में भी उन्होंने काम किया और मैसूर के दीवान रहे। बाद के वर्षों में भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स जैसी औद्योगिक परियोजनाओं से भी जुड़े।

भारत रत्न से सम्मानित हुए विश्वेश्वरैया

देश के निर्माण में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। 1962 में 101 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। हर साल 15 सितंबर को मनाया जाने वाला Engineers’ Day इसलिए खास है, क्योंकि यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक इंजीनियर की असली पहचान सिर्फ उसकी डिग्री नहीं, बल्कि समस्या को समझकर उसका व्यावहारिक समाधान निकालने की क्षमता है। विश्वेश्वरैया की पूरी यात्रा इसी सोच की मिसाल है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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