FACT CHECK: क्या मदरसों में पढ़ाई जाएगी गीता-रामायण ? जानें वायरल दावे का सच

Published : Mar 03, 2021, 11:36 AM ISTUpdated : Mar 03, 2021, 04:58 PM IST
FACT CHECK: क्या मदरसों में पढ़ाई जाएगी गीता-रामायण ? जानें वायरल दावे का सच

सार

शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ ओपन स्‍कूलिंग (NIOS) प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपरा को लेकर 100 मदरसों में नया सिलेबस शुरू करने जा रहा है।

करियर डेस्क. Gita Ramayana Education in Madarassas: पूरे देश में अरबी-फारसी और कुरान की दीक्षा के लिए मदरसे चलाए जाते हैं। हाल में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अब मदरसों में गीता-रामायण भी पढ़ाई जाएंगी। PIB ने इस रिपोर्ट का खंडन करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है।

PIB ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा, दिनांक 03.03.2021 को प्रकाशित रिपोर्ट में गीता, रामायण को मदरसों में पढ़ाए जाने की बात गलत है। इस खबर में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है।

जारी प्रेस रीलिज में यह स्पष्ट किया गया है कि NIOS SPQEM (मदरसों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं) इसके तहत मदरसों को मान्यता प्रदान की जाएगी। टीचर्स के लिए भारत दर्शन और संसकृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विषयों के विकल्प दिए गए हैं। औपचारिक शिक्षा प्रणाली में गीता-रामायण के नाम कोई हार्ड लाइन बाउंड्री नहीं बनाई गई है।

 

 

दरअसल, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ ओपन स्‍कूलिंग (NIOS) प्राचीन भारतीय ज्ञान और परंपरा को लेकर 100 मदरसों में नया सिलेबस शुरू करने जा रहा है। यह पाठ्यक्रम नई शिक्षा नीति (New Education Policy) का हिस्‍सा है। NIOS कक्षा 3, 5 और 8 के लिए बेसिक कोर्स की शुरुआत करेगा। एनआईओएस ने प्राचीन भारत के ज्ञान के संबंध में करीब 15 कोर्स तैयार किए हैं। यह सभी कोर्स कक्षा 3, 5 और 8 के की प्रारंभिक शिक्षा के समान हैं।

सिलेबस में वैदिक अध्ययन, संस्कृत व्याकरण, भारतीय दर्शन, संस्कृत साहित्य और संस्कृत भाषा पाठ्यक्रमों को भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के लिए तैयार किया गया है। टीचर्स के लिए ये सिलेबस संस्कृत और हिंदी भाषा में उपलब्ध होगा। इसमें दर्शन, वेद, योग, विज्ञान, रामायण, भगवदगीता संदेश को भी शामिल किया गया है। इसके योग के कोर्स मैटिरियल में पतंजलि कृतासूत्र, योगसूत्र व्‍यायाम, सूर्य नमस्‍कार, आसन, प्राणायाम, तनाव दूर करने वाले व्‍यायाम और स्‍मरण शक्ति बढ़ाने वाले व्‍यायाम शामिल हैं।

लेकिन ये अनिवार्य नहीं है ये शिक्षक की च्वाइस हो कि वो इन्हें पढ़ना-पढ़ाना चुनें। यहां देखें सिलेबस की प्रेस रिलीज

100 मदरसों से शुरुआत

NIOS की चेयरमैन सरोज शर्मा का कहना है, 'हम इस कार्यक्रम में 100 मदरसों में शुरू कर रहे हैं, भविष्‍य में हम इसे 500 मदरसों तक पहुंचाएंगे। केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ने मंगलवार को नोएडा स्थित एनआईओएस के केंद्रीय मुख्‍यालय में स्‍टडी मैटिरियल जारी किया है। उन्‍होंने इस दौरान कहा, 'भारत प्राचीन भाषाओं, विज्ञान, कला, संस्‍कृति और परंपरा की खान है। अब देश अपनी प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित करके ज्ञान के क्षेत्र में सुपरपावर बनने को तैयार है। हम इन कोर्स के लाभ को मदरसों और विश्‍व में मौजूद भारतीय समाज तक पहुंचाएंगे।'

क्या है NIOS

एनआईओएस दो राष्‍ट्रीय बोर्ड में एक से है, जो प्राइमरी, सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्‍तर के कोर्स ओपन और डिस्‍टेंस एजुकेशन के जरिये कराते हैं।

अनिवार्य नहीं है

इसके विज्ञान कोर्स में जल, वायु, किसानी और वेद, उत्‍पत्ति का सूत्र, पृथ्‍वी और प्राकृतिक संसाधन संबंधी विषय हैं। एनआईओएस के असिस्‍टेंट डायरेक्‍टर (अकादमिक) शोएब रजा खान का कहना है कि यह पाठ्यक्रम सबके लिए उपलब्‍ध होगा। ओपन एजुकेशन सिस्‍टम के तहत छात्र इसका चुनाव करने के लिए स्‍वतंत्र होंगे, यह अनिवार्य नहीं है।

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

Recommended Stories

CBSE Counseling 2026: बोर्ड छात्रों के लिए IVRS और टेली-काउंसलिंग सर्विस शुरू, जानें कैसे लें मदद
Anil Agarwal Daughter: अनिल अग्रवाल की बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बार कौन है, जानिए क्या करती है