
करियर डेस्क : देश में आज हिंदी दिवस (Hindi Diwas 2022) मनाया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हिंदी सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली और इस्तेमाल की जाती है। इसमें फिजी, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देश हैं। वो बात अलग है कि सबसे अधिक भारत में ही हिंदी बोली और समझी जाती है। साल 2011 में हुई आखिरी जनगणना (Census) के डेटा के आधार के मुताबिक देश में 43.63 प्रतिशत आबादी की पहली भाषा हिंदी है। यह आंकड़ा करीब 11 साल पहले की है। तब देश में 125 करोड़ लोगों में से 53 करोड़ लोग अपनी मातृभाषा (Mother toungue) हिंदी ही मानते थे।
हर दशक बढ़ी हिंदी बोलने वालों की संख्या
पिछली जनगणना के मुताबिक, देश में हिंदी बोलने वालों की संख्या में लगातार इजाफा ही हुई है। 1971 से 2011 के बीच 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस हिसाब से हर 10 साल में हिंदी समझने वालों की संख्या औसतन 1.5 फीसदी के हिसाब से बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में अगली जनगणना में आबादी 138 करोड़ के आसपास पहुंच सकती हैं। तब हिंदी बोलने वालों की संख्या करीब 80 लाख तक बढ़ जाएगी। यानी 54 करोड़ लोगों को हिंदी आती रहने का अनुमान लगाया जा सकता है।
12 राज्यों से हिंदी बोलने वालों की संख्या 90% (जनगणना 2011 के मुताबिक)
भारत में हिंदी बोलने वाली 90 प्रतिशत आबादी 12 राज्यों में ही बसती है। इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश सबसे टॉप पर हैं। इन चार राज्यों को छोड़ दें तो राजस्थान में 89 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 83 प्रतिशत, बिहार में 77.52 प्रतिशत और झारखंड में 61.94 फीसदी लोग हिंदी अच्छी तरह से जानते हैं। जबकि पंजाब की 9.35 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर की 20.8 फीसदी आबादी हिंदी बोलती और समझती है।
यहां हिंदी बोलने वाले कम
पश्चिम भारत में गुजरात और मध्य भारत में महाराष्ट्र वो राज्य हैं, जहां हिंदी कम ही बोली जाती है। गुजरात की 7 फीसदी से थोड़ी ही ज्यादा आबादी हिंदी समझती है। वहीं, महाराष्ट्र में 12 फीसदी के आसपास लोग हिंदी बोल लेते हैं। गोवा में 10.28 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 6.96 प्रतिशत और असम 6.73 फीसदी लोगों की पहली भाषा हिंदी है।
दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर में कितने लोग बोलते हैं हिंदी
केरल- 0.15 फीसदी
तमिलनाडु- 0.54 प्रतिशत
कर्नाटक- 3.29 प्रतिशत
आंध्रप्रदेश-तेलंगाना- 3.6 प्रतिशत
ओडिशा- 2.95 प्रतिशत
लक्षद्वीप- 0.2 प्रतिशत
पुडुचेरी- 0.51 प्रतिशत
सिक्किम- 7.9 फीसदी
अरुणाचल- 7.09 प्रतिशत
नगालैंड- 3.18 प्रतिशत
त्रिपुरा- 2.11 फीसदी
मिजोरम- 0.97 फीसदी
मणिपुर- 1.11 प्रतिशत
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