
पुणे: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय इस साल की टाइम विश्व रैंकिंग में शीर्ष 300 संस्थानों में नहीं आया है और उन्होंने देश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया उन्होंने यहां सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने की जरूरत है कि भारतीय विश्वविद्यालय पहले दुनिया के शीर्ष 100 संस्थानों में जगह बना सकें और फिर शीर्ष 50 संस्थानों में पहुंचें।
भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना होगा
उन्होंने कहा, ''हमें भारत को फिर विश्व गुरू बनाना है। उसके लिए हमें भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना होगा। यह दुख की बात है कि कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय इस साल की टाइम वर्ल्ड रैकिंग में शीर्ष 300 संस्थानों में नहीं आया । हमें उसके लिए जिम्मेदार कारकों के बारे में सोचना होगा।'' उपराष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में अध्यापकों के रिक्त पदों को तुरंत भरने की जरूरत है और दावा किया कि केंद्र सरकार ने हाल ही में इस संबंध में सक्रिय कदम उठाये हैं।
नायडू ने कहा, ''दुर्भाग्य से, औपनिवेशिक शासन के चलते हमारा इतिहास उपयुक्त ढंग से नहीं लिखा गया। हमारे इतिहास को सही ढंग से पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया क्योंकि हमने मैकाले की शिक्षा पद्धति का अनुसरण किया।''
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्पूर्ण है कि 70 साल से भी अधिक समय बाद औपनिवेशक प्रणाली के अवशेष अब भी बने हुए हैं।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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