
Viral Linkedin Post: नौकरी का ऑफर हाथ में आते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं कि ज्यादा पैसे मांगे तो कंपनी कहीं ऑफर ही वापस न ले ले। लेकिन Indian School of Business (ISB) के पूर्व छात्र करण गोगना की कहानी बताती है कि सही तरीके से बातचीत की जाए तो शुरुआती ऑफर और फाइनल पैकेज में बड़ा अंतर हो सकता है। इसी को लेकर करण गोगना ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर की है, जो अब वायरल हो रही है, साथ ही सैलरी नेगोशिएशन की टिप्स भी दी है। जानिए पोस्ट में क्या लिखा है।
MBA पूरा करने के बाद करण गोगना को पहली नौकरी के लिए ₹17 लाख सालाना का ऑफर मिला था। उस समय उनके पास कोई दूसरा ऑफर नहीं था और एजुकेशन लोन भी चुकाना था। ऐसे में ऑफर स्वीकार कर लेना आसान फैसला होता। लेकिन करण गोगना ने पहले यह समझने की कोशिश की कि कंपनी इस रोल के लिए कितना भुगतान करने को तैयार है। उन्होंने HR से अपनी अपेक्षित सैलरी बताने के बजाय कंपनी की सैलरी रेंज पूछी। यही उनकी पहली सैलरी नेगोशिएशन स्ट्रेटजी थी। पहले अपनी कीमत तय करके सामने वाले को बताने के बजाय उनका ऑफर जानना।
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कंपनी की ओर से ₹17 लाख का ऑफर आया तो करण गोगना ने इसे सीधे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपने अनुभव और MBA लेवल के मार्केट वैल्यू का हवाला देते हुए कहा कि उनके हिसाब से करीब ₹22 लाख का पैकेज ज्यादा उचित होगा। अगले दिन कंपनी ₹19 लाख पर आई। यह बढ़ोतरी होने के बावजूद करण गोगना ने बातचीत खत्म नहीं की। उनके सामने एक मुश्किल स्थिति थी। यही एक नौकरी का ऑफर था, लोन की जिम्मेदारी थी और अंदर से डर भी था कि कहीं ज्यादा मांगने पर कंपनी पीछे न हट जाए। फिर भी उन्होंने सोचा कि अगर वह इस भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर सकते हैं, तो आगे भी दूसरे मौके हासिल कर सकते हैं।
करण गोगना ने इसके बाद बातचीत का तरीका बदल दिया। उन्होंने इक्विटी, जॉइनिंग बोनस और रिलोकेशन अलाउंसेज जैसे विकल्पों के बारे में पूछा। खास तौर पर नौकरी के लिए दूसरी जगह शिफ्ट होने की बात रखते हुए उन्होंने रिलोकेशन सपोर्ट की मांग की। इसके बाद HR की तरफ से करीब एक दिन तक कोई जवाब नहीं आया। यही वह समय था जब उन्हें सबसे ज्यादा चिंता हुई कि कहीं ऑफर हाथ से न निकल जाए। लेकिन अगली सुबह कंपनी की तरफ से जवाब आया। बेस सैलरी भले ही सीमित थी, लेकिन जॉइनिंग बोनस और रिलोकेशन अलाउंस जोड़ दिए गए। इस तरह कुल पैकेज बढ़कर ₹23 लाख सालाना हो गया। नीचे देखें लिंक्डइन पोस्ट-
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करण गोगना की कहानी का सबसे बड़ा सबक सिर्फ ₹6 लाख की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि नेगोशिएशन का तरीका है-
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