₹17 लाख का जॉब ऑफर मिला, फिर इस शख्स ने ऐसे बढ़वा ली सैलरी, हाथ आया ₹23 लाख का पैकेज

Published : Sep 09, 2026, 03:22 PM IST
Salary Negotiation Viral Linkedin Post

सार

Salary Negotiation Viral Post: 17 लाख रुपए का जॉब ऑफर कैसे 23 लाख रुपए के पैकेज में बदला? ISB Alum ने सैलरी नेगोशिएशन की वो रणनीति बताई, जो हर MBA फ्रेशर के काम आएगी। जानिए

Viral Linkedin Post: नौकरी का ऑफर हाथ में आते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं कि ज्यादा पैसे मांगे तो कंपनी कहीं ऑफर ही वापस न ले ले। लेकिन Indian School of Business (ISB) के पूर्व छात्र करण गोगना की कहानी बताती है कि सही तरीके से बातचीत की जाए तो शुरुआती ऑफर और फाइनल पैकेज में बड़ा अंतर हो सकता है। इसी को लेकर करण गोगना ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट शेयर की है, जो अब वायरल हो रही है, साथ ही सैलरी नेगोशिएशन की टिप्स भी दी है। जानिए पोस्ट में क्या लिखा है।

₹17 लाख का ऑफर मिला, लेकिन तुरंत हां नहीं कहा

MBA पूरा करने के बाद करण गोगना को पहली नौकरी के लिए ₹17 लाख सालाना का ऑफर मिला था। उस समय उनके पास कोई दूसरा ऑफर नहीं था और एजुकेशन लोन भी चुकाना था। ऐसे में ऑफर स्वीकार कर लेना आसान फैसला होता। लेकिन करण गोगना ने पहले यह समझने की कोशिश की कि कंपनी इस रोल के लिए कितना भुगतान करने को तैयार है। उन्होंने HR से अपनी अपेक्षित सैलरी बताने के बजाय कंपनी की सैलरी रेंज पूछी। यही उनकी पहली सैलरी नेगोशिएशन स्ट्रेटजी थी। पहले अपनी कीमत तय करके सामने वाले को बताने के बजाय उनका ऑफर जानना।

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₹17 लाख से ₹19 लाख, फिर HR से बातचीत का अगला दौर

कंपनी की ओर से ₹17 लाख का ऑफर आया तो करण गोगना ने इसे सीधे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपने अनुभव और MBA लेवल के मार्केट वैल्यू का हवाला देते हुए कहा कि उनके हिसाब से करीब ₹22 लाख का पैकेज ज्यादा उचित होगा। अगले दिन कंपनी ₹19 लाख पर आई। यह बढ़ोतरी होने के बावजूद करण गोगना ने बातचीत खत्म नहीं की। उनके सामने एक मुश्किल स्थिति थी। यही एक नौकरी का ऑफर था, लोन की जिम्मेदारी थी और अंदर से डर भी था कि कहीं ज्यादा मांगने पर कंपनी पीछे न हट जाए। फिर भी उन्होंने सोचा कि अगर वह इस भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर सकते हैं, तो आगे भी दूसरे मौके हासिल कर सकते हैं।

बेस सैलरी नहीं बढ़ी तो CTC के दूसरे हिस्से पर फोकस किया

करण गोगना ने इसके बाद बातचीत का तरीका बदल दिया। उन्होंने इक्विटी, जॉइनिंग बोनस और रिलोकेशन अलाउंसेज जैसे विकल्पों के बारे में पूछा। खास तौर पर नौकरी के लिए दूसरी जगह शिफ्ट होने की बात रखते हुए उन्होंने रिलोकेशन सपोर्ट की मांग की। इसके बाद HR की तरफ से करीब एक दिन तक कोई जवाब नहीं आया। यही वह समय था जब उन्हें सबसे ज्यादा चिंता हुई कि कहीं ऑफर हाथ से न निकल जाए। लेकिन अगली सुबह कंपनी की तरफ से जवाब आया। बेस सैलरी भले ही सीमित थी, लेकिन जॉइनिंग बोनस और रिलोकेशन अलाउंस जोड़ दिए गए। इस तरह कुल पैकेज बढ़कर ₹23 लाख सालाना हो गया। नीचे देखें लिंक्डइन पोस्ट-

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सैलरी नेगोशिएशन में याद रखें ये 3 बातें

करण गोगना की कहानी का सबसे बड़ा सबक सिर्फ ₹6 लाख की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि नेगोशिएशन का तरीका है-

  • पहला, HR अगर आपकी एक्सपेक्टेड सैलरी पूछे तो तुरंत कोई आंकड़ा बोलने के बजाय संभव हो तो सैलरी रेंज समझने की कोशिश करें।
  • दूसरा, अगर बेस सैलरी तय है तो नेगोशिएशन वहीं खत्म नहीं होती। ज्वाइनिंग बोनस, साइन-ऑन बोनस, इक्विटी और दूसरे बेनिफिट्स पर बात की जा सकती है।
  • तीसरा, रिलोकेशन को सैलरी पैकेज का हिस्सा मानकर चुप न रहें। अगर नौकरी के कारण शहर बदलना पड़ रहा है तो रिलोकेशन अलाउंस के बारे में सीधे पूछना एक विकल्प हो सकता है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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