
LinkedIn Viral Post: एक साधारण-सा लगने वाला परफॉर्मेंस अप्रेजल मीटिंग का मामला अब सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। LinkedIn पर शेयर किए गए एक एक्सपीरिएंस ने वर्क स्पेस पर महिलाओं, खासकर सिंगल मदर्स के प्रति मौजूद सोच और सैलरी तय करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि एक कंपनी की वरिष्ठ महिला कर्मचारी को वेतन वृद्धि देने के बजाय उनसे ऐसा सवाल पूछा गया, जिसने पूरी बातचीत का रुख बदल दिया।
पोस्ट साझा करने वाले हर्षित श्रीवास्तव के अनुसार, वह महिला कंपनी में करीब 25 वर्षों से काम कर रही थीं और हेड ऑफ सेल्स के पद पर थीं। उन्होंने हर साल अपने तय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया था। इतना ही नहीं, उन्हें तीन बार 'एम्प्लॉयी ऑफ द ईयर' का सम्मान भी मिल चुका था और उन्होंने कई ऐसे कर्मचारियों को तैयार किया, जो आगे चलकर कंपनी में बड़ी जिम्मेदारियों तक पहुंचे। हर्षित के मुताबिक, अप्रेजल मीटिंग में सभी को उम्मीद थी कि उनके शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अच्छी वेतन वृद्धि मिलेगी। लेकिन इसी दौरान कंपनी के एक संस्थापक ने उनसे कथित तौर पर पूछा, "अब तो आपके बच्चे बड़े हो गए हैं, फिर आपको वेतन बढ़ाने की जरूरत क्यों है?"
पोस्ट के अनुसार, महिला कर्मचारी ने उस समय कोई बहस नहीं की, लेकिन वह सवाल उन्हें भीतर तक प्रभावित कर गया। बाद में जब इस मुद्दे पर आपत्ति जताई गई तो प्रबंधन का रवैया यह था कि वह कर्मचारी उम्र और परिस्थितियों की वजह से कहीं और नहीं जाएंगी। हालांकि, कुछ ही हफ्तों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। एग्जिट इंटरव्यू में उन्होंने कथित तौर पर कहा, "मेरे बच्चे बड़े हो गए हैं, अब मेरी आगे बढ़ने की बारी है।" इसके बाद उन्होंने एक दूसरी कंपनी जॉइन कर ली, जहां उन्हें पहले से 30 प्रतिशत अधिक वेतन मिला। नीचे देखें वायरल पोस्ट-
यह पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय रखी। कई यूजर्स का कहना था कि किसी कर्मचारी का वेतन उसकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके प्रदर्शन और योगदान के आधार पर तय होना चाहिए। कई लोगों ने यह भी लिखा कि अक्सर कंपनियां यह मान लेती हैं कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी नौकरी नहीं छोड़ेंगे, लेकिन यही सोच प्रतिभाशाली लोगों को संगठन से दूर कर देती है। कुछ यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि बच्चों के बड़े हो जाने का मतलब आर्थिक जिम्मेदारियों का खत्म होना नहीं होता। बढ़ती महंगाई, भविष्य की बचत और रिटायरमेंट जैसी जरूरतें हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण रहती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज भी कई कार्यस्थलों पर महिलाओं की पेशेवर पहचान को उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों से जोड़कर देखा जाता है। सोशल मीडिया पर अधिकांश लोगों का मानना है कि सम्मान, निष्पक्ष मूल्यांकन और बेहतर अवसर ही किसी कर्मचारी को लंबे समय तक किसी संगठन से जोड़कर रखते हैं। जब इन मूल्यों से समझौता होता है, तो प्रतिभाशाली कर्मचारी नए अवसर तलाशने में देर नहीं लगाते।
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