Prashant Kishor Career: प्रशांत किशोर डॉक्टर या इंजीनियर नहीं हैं, लेकिन वे चुनावी रणनीति बनाने में गजब माहिर हैं। जानिए उन्होंने कहां से पढ़ाई की, कौन-सी डिग्री हासिल की।
Prashant Kishor Qualification: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के शुरुआती रुझान और नतीजे हलचल मचाए हुए हैं। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) दोपहर तक बढ़त बनाए हुए हैं। वे बीजेपी कैंडिडेट्स नीरज कुमार से काफी आगे चल रहे हैं। यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है। साल 1995 से लेकर अब तक यहां हमेशा कमल ही खिला है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यहां से लगातार 5 बार से जीतकर विधानसभा पहुंच रहे थे। ऐसे में राजनीतिक के 'चाणक्य' माने जाने वाले प्रशांत किशोर की बढ़त ने हर किसी को ध्यान खींचा है। आइए जानते हैं प्रशांत किशोर ने ऐसी कौन सी पढ़ाई की है, जो उन्हें राजनीतिक का धुरंधर बनाता है...
प्रशांत किशोर ने कहां से पढ़ाई की है?
प्रशांत किशोर की शुरुआती पढ़ाई बिहार में ही हुई। उन्होंने बक्सर के एक सरकारी स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे पटना आ गए और पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट पूरा किया। बचपन से ही वे पढ़ाई में काफी तेज थे और खासकर गणित (Maths) उनका सबसे मजबूत विषय हुआ करता था। इंटर के बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई पूरी की।
हेल्थ मैनेजमेंट करने के बाद विदेश में मौका
बीबीए करने के बाद प्रशांत किशोर ने लीक से हटकर कुछ अलग करने की सोची। उन्होंने हैदराबाद के जाने-माने संस्थान ASCI (Administrative Staff College of India) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHA) की डिग्री ली। उस समय यह कोर्स बड़े ग्लोबल संस्थानों की मदद से चलाया जाता था। इस पढ़ाई ने उन्हें दुनिया भर में काम करने के दरवाजे खोल दिए। इसके अलावा साल 2010 में उन्होंने फ्रांस की एक यूनिवर्सिटी से फ्रेंच भाषा का कोर्स भी किया, जिससे उन्हें विदेशी संस्थाओं के साथ जुड़ने में बहुत मदद मिली।
प्रशांत किशोर विदेश में कौन सी नौकरी करते थे?
राजनीति में आने से पहले प्रशांत किशोर ने दुनिया के बड़े संस्थानों के साथ काम किया है। वे संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े पब्लिक हेल्थ प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों में जाकर कई काम किए। इनमें बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य की योजनाएं बनाना, टीकाकरण और कुपोषण जैसी बड़ी समस्याओं पर काम करना, हेल्थ पॉलिसी तैयार करना और डेटा का सही विश्लेषण (Data Analysis) करना शामिल था। यहीं से उन्हें डेटा और आंकड़ों के आधार पर सटीक फैसले लेने की कला सीखने को मिली, जो आगे चलकर उनकी चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा हथियार बनी।
UN की शानदार नौकरी छोड़कर कैसे राजनीति में आए?
संयुक्त राष्ट्र जैसी जगह पर काम करना किसी भी युवा का सपना होता है। प्रशांत किशोर की नौकरी भी बहुत अच्छी थी और करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था। कहानी तब बदली जब उन्होंने भारत में कुपोषण पर एक रिसर्च रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में गुजरात का भी जिक्र था। चर्चा है कि इसी रिपोर्ट के बाद उनकी मुलाकात तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई। यहीं से उनकी जिंदगी ने एक बिल्कुल नया मोड़ ले लिया।
मोदी से लेकर ममता तक ऐसे बने चुनावी 'चाणक्य'
नरेंद्र मोदी के साथ जुड़ने के बाद प्रशांत किशोर ने चुनावी रणनीति में टेक्नोलॉजी, डेटा, सोशल मीडिया और भाषण की शैली को एक नया रूप दिया। साल 2012 के गुजरात चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी रणनीति ने ऐसा जादू चलाया कि पूरा देश उनके नाम से वाकिफ हो गया। इसके बाद उन्होंने I-PAC (Indian Political Action Committee) नाम की अपनी कंपनी बनाई। प्रशांत किशोर ने देश के कई दिग्गज नेताओं और पार्टियों के लिए चुनावी कैंपेन संभाले, जिनमें नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, जगन मोहन रेड्डी, अरविंद केजरीवाल और कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नाम शामिल हैं।


