लखनऊ में एक कैब ड्राइवर ने प्रेमिका संग मिलकर पत्नी की हत्या कर दी। उसने लाश गोमती नदी में फेंककर पुलिस को गुमराह करने के लिए गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। अफेयर के चलते हुई इस हत्या में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
लखनऊ में पुलिस ने एक कैब ड्राइवर और उसकी प्रेमिका को पत्नी की हत्या कर लाश गोमती नदी में फेंकने के आरोप में गिरफ्तार किया है। मामला तब सामने आया जब 31 साल के उमेंद्र प्रताप सिंह ने खुद पुलिस में अपनी पत्नी अंजलि सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उमेंद्र रहीमाबाद का रहने वाला है। उसने पुलिस को बताया कि 30 और 31 जुलाई की दरमियानी रात उसकी पत्नी अपने गहने लेकर घर से कहीं चली गई है। जो मामला पहले गुमशुदगी का लग रहा था, वो जल्द ही हत्या की जांच में बदल गया, क्योंकि पुलिस को उमेंद्र की बातों में झोल नजर आने लगा था।
गुमशुदगी की रिपोर्ट से गहराया शक
पुलिस ने बताया कि उमेंद्र 31 जुलाई को थाने पहुंचा और अंजलि के लापता होने की खबर दी। उसने दावा किया कि अंजलि घर से गहने लेकर गई है। लेकिन, अंजलि के भाई को शक था कि उमेंद्र को उसकी बहन के गायब होने के बारे में कुछ पता है और उसने उमेंद्र पर ही इस मामले में शामिल होने का आरोप लगाया। 31 जुलाई को ही गोमती नदी से अंजलि की लाश मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर लिया। बाद में परिवार वालों ने लाश की पहचान अंजलि के तौर पर की।

रहीमाबाद के एसएचओ अनिल कुमार त्रिगुनायक ने बताया कि जब टेक्निकल सबूत पति के बयान से मेल नहीं खाए, तो जांच की दिशा बदल गई। पुलिस ने मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच शुरू की ताकि पता चल सके कि अंजलि के गायब होने के वक्त उमेंद्र कहां था। सबूत आखिरकार जांच की सुई को उमेंद्र की तरफ ही ले गए।
सात महीने पहले शुरू हुआ था अफेयर
पूछताछ के दौरान उमेंद्र ने कथित तौर पर बताया कि वह 31 साल की आरती वर्मा से करीब सात महीने पहले मिला था। आरती एक कॉल सेंटर में काम करती है और उसने एक कैब बुक की थी, जिसे उमेंद्र चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, पहली मुलाकात के बाद दोनों संपर्क में रहे और बाद में उनके बीच प्रेम संबंध बन गया। जांचकर्ताओं ने बताया कि अंजलि को आखिरकार इस रिश्ते के बारे में पता चल गया और उसने इसका विरोध किया।
पुलिस का आरोप है कि आरती के साथ अपने रिश्ते को लेकर उमेंद्र और अंजलि के बीच बार-बार होने वाले झगड़ों के कारण दोनों आरोपियों ने उसकी हत्या की योजना बनाई। पुलिस ने इस मामले को उमेंद्र और आरती द्वारा की गई एक सोची-समझी हत्या बताया है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अदालत में सुनवाई होनी बाकी है।
घर में ही गला घोंटकर की हत्या
जांचकर्ताओं के मुताबिक, उमेंद्र और आरती ने 30 जुलाई की रात को कथित हत्या को अंजाम दिया। पुलिस ने कहा कि दोनों ने अंजलि का मुंह और गला तब तक दबाए रखा जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। उसकी मौत के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर उसके शरीर को एक कंबल में लपेटा। फिर उसे एक हैचबैक कार में रखा और इटौंजा के आसपास के इलाके की ओर ले गए, जहां उन्होंने कथित तौर पर लाश को गोमती नदी में फेंक दिया। पुलिस ने कहा कि लाश को ले जाने में इस्तेमाल की गई कार को जब्त कर लिया गया है। अंजलि की लाश मिलने से जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि गुमशुदगी की शिकायत हत्या को छिपाने की एक कोशिश थी।
झूठी कहानी बनाने के लिए गहनों का इस्तेमाल
जांचकर्ताओं का यह भी मानना है कि उमेंद्र ने यह दिखाने की कोशिश की कि अंजलि अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी। पुलिस ने कहा कि उसने अंजलि के करीब 32 सोने और चांदी के गहने निकालकर आरती को दे दिए। इन गहनों की कीमत 8 से 10 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। इसके बाद उमेंद्र ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि अंजलि अपने कीमती सामान के साथ गायब हो गई है। जांचकर्ताओं ने कहा कि इसका मकसद यह दिखाना था कि अंजलि अपनी मर्जी से घर से गई थी और गहने भी साथ ले गई थी। हालांकि, पुलिस द्वारा जांचे गए डिजिटल सबूतों ने उसके बयान को झूठा साबित कर दिया। पुलिस ने बताया कि बाद में ये गहने आरती के पास से बरामद कर लिए गए। दो मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल की गई कार भी जब्त कर ली गई है।
डिजिटल सबूतों से सुलझा केस
रिपोर्ट के मुताबिक, इस केस को सुलझाने में डिजिटल सबूतों ने अहम भूमिका निभाई। अंजलि के भाई द्वारा उमेंद्र पर शक जताए जाने के बाद, जांचकर्ताओं ने मामले से जुड़े लोगों की गतिविधियों और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने कहा कि तकनीकी सबूत उमेंद्र के बयान से मेल नहीं खा रहे थे। डिजिटल निशान आखिरकार जांचकर्ताओं को उस तक ले गए, और उसे 1 अगस्त को अदौरा मोड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने कहा कि पूछताछ के दौरान उमेंद्र ने आरती के साथ अपने कथित रिश्ते और हत्या में उसकी भूमिका का खुलासा किया। इसके बाद आरती को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ये गिरफ्तारियां गोमती नदी से अंजलि की लाश मिलने के तुरंत बाद हुईं।
दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए
पुलिस ने जांच के तहत गहने, दो मोबाइल फोन और कार जब्त कर ली है। उमेंद्र और आरती को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांचकर्ता अंजलि की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और उससे पहले की घटनाओं की जांच कर रहे हैं। पुलिस दूसरे जिलों में भी उमेंद्र का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है। पुलिस के मुताबिक, 2020 में हरदोई में उसके खिलाफ मारपीट का एक मामला दर्ज किया गया था। किसी अन्य मामले में उसकी संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। पुलिस की जांच अब घटनाओं के पूरे क्रम को स्थापित करने पर केंद्रित होगी, जिसमें यह भी शामिल है कि कथित हत्या की योजना कैसे बनाई गई, दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और अंजलि के शव को कैसे ठिकाने लगाया गया।
