अरुण जेटली की पुण्यतिथि पर जानिए उनके राजनीतिक सफर, इमरजेंसी, वकालत, GST, रेलवे बजट और मोदी सरकार में निभाई अहम जिम्मेदारियों से जुड़े 10 खास फैक्ट्स।

Arun Jaitley Death Anniversary: 24 अगस्त 2019 को पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा के सीनियर नेता अरुण जेटली का 66 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने का सबसे अच्छा तरीका सिर्फ उनके राजनीतिक सफर को दोहराना नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं को जानना भी है, जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहे। जेटली पेशे से वकील थे, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ पॉलिटिक्स तक सीमित नहीं थी। वह कानून, संविधान, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीति पर गहरी पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर जाने जाते थे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी, दोनों सरकारों में कई जिम्मेदारियां संभालीं।

1. छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

अरुण जेटली का राजनीति से जुड़ाव काफी पुराना था। दिल्ली यूनिवर्सिटी में कॉमर्स और कानून की पढ़ाई के दौरान वह छात्र पॉलिटिक्स में एक्टिव हुए। 1970 के दशक में वह छात्र नेता के तौर पर सामने आए और आगे चलकर नेशनल पॉलिटिक्स का हिस्सा बने।

2. इमरजेंसी के दौरान जेल गए

जेटली उन नेताओं में शामिल थे जिन्हें 1975 की इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह युवा छात्र नेता थे। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

3. वह पेशे से वकील थे

पॉलिटिक्स में आने के बावजूद कानून उनका मजबूत क्षेत्र रहा। वह सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील रहे और कई मुख्य कानूनी मामलों से जुड़े। 2004 में NDA सरकार की हार के बाद उन्होंने फिर से कानूनी प्रैक्टिस करने लगे थे।

4. BJP के प्रमुख प्रवक्ताओं में रहे

1990 के दशक में जेटली BJP के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए थे। 1999 के लोकसभा चुनाव से पहले वह पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर एक्टिव थे।

5. एक साथ कई मंत्रालय संभाले

अरुण जेटली ने अपने पॉलिटिकल करियर में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। वह कानून, सूचना एवं प्रसारण, वाणिज्य एवं उद्योग, रक्षा, वित्त और कॉरपोरेट मामलों जैसे विभागों के मंत्री रहे।

6. 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे

जब केंद्र में UPA की सरकार थी, तब जेटली ने राज्यसभा में Leader of Opposition का रोल भी निभाया था। 2009 से 2014 तक उन्होंने इस पद पर रहते हुए संसद में BJP का पक्ष मजबूती से रखा।

7. GST लागू कराने में अहम रोल

वित्त मंत्री के तौर पर जेटली के सबसे बड़े कामों में Goods and Services Tax यानी GST शामिल रहा। लंबे समय से चर्चा में रहे इस टैक्स सुधार को उनकी सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया।

8. रेलवे बजट को आम बजट में मिलाया

जेटली के कार्यकाल में एक पुरानी परंपरा खत्म हुई। रेलवे बजट को आम बजट में मिला दिया गया। इससे रेलवे के लिए अलग बजट पेश करने की लगभग 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई। यह उनके वित्त मंत्री के कार्यकाल के मुख्य प्रशासनिक बदलावों में शामिल था।

9. 2019 का अंतरिम बजट उन्होंने पेश नहीं किया

एक दिलचस्प फैक्ट यह है कि नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के ज्यादातर पूर्ण बजट अरुण जेटली ने पेश किए, लेकिन 2019 का अंतरिम बजट वह स्वास्थ्य कारणों से पेश नहीं कर सके। यह जिम्मेदारी तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने संभाली थी।

10. निधन के बाद मिला पद्म विभूषण

अरुण जेटली को 2020 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें सार्वजनिक मामलों में योगदान के लिए दिया गया था। 24 अगस्त 2019 को उनके निधन के बाद भारतीय राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसकी पहचान कानून और राजनीति के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले वक्ता और रणनीतिकार के रूप में थी। आज उनकी पुण्यतिथि पर उनके राजनीतिक फैसलों के साथ-साथ उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को भी याद किया जाता है। अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में हुआ था।