बंगाल की जीत के बाद अब पंजाब में बीजेपी का बड़ा दांव! 2020 में टूटा पुराना रिश्ता क्या फिर से जुड़ने जा रहा है? पर्दे के पीछे पक रही इस गोपनीय खिचड़ी और वोट बैंक के नए समीकरणों का खौफनाक सच जानिए। 32% वोट का गणित, पुराना गठबंधन और AAP के खिलाफ रणनीति से क्या बदलेगा चुनावी खेल?

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मिली चुनावी कामयाबी के बाद BJP अब पंजाब में भी बड़ा राजनीतिक दांव खेलने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, अगले साल की शुरुआत में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए BJP और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है। बातचीत का पहला दौर पूरा हो चुका है और जल्द ही दूसरे दौर में सीटों के बंटवारे पर चर्चा हो सकती है।

क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?

BJP नेताओं का मानना है कि दोनों दल साथ आते हैं तो चार-तरफा मुकाबले में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि, इसके लिए दोनों पार्टियों को अपना मौजूदा समर्थन आधार बढ़ाना होगा। सीटों की संख्या और कौन-सी पार्टी किन विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ेगी, यह अगले दौर की बातचीत में तय होने की संभावना है। BJP और अकाली दल का गठबंधन नया नहीं है। दोनों दल 1996 से 2020 तक साथ रहे और इस दौरान कई चुनावी सफलताएं हासिल कीं।

आंकड़ों में छिपा गठबंधन का बड़ा गणित

पिछले लोकसभा चुनाव में BJP और अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। BJP को 18.56 प्रतिशत वोट मिले, जबकि अकाली दल को 13.42 प्रतिशत वोट मिले। दोनों का वोट शेयर जोड़ें तो यह करीब 32 प्रतिशत बैठता है। BJP ने भले ही कोई लोकसभा सीट नहीं जीती, लेकिन 23 विधानसभा क्षेत्रों में वह आगे रही। अकाली दल 9 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रहा। BJP करीब 17 और अकाली दल 14 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहा। BJP पांच सीटें 5,000 से कम और 10 सीटें 10,000 से कम वोटों के अंतर से हारी थी।

Scroll to load tweet…

पुरानी जोड़ी का इतिहास भी दिलचस्प: 1997 से 2012 तक की वो कामयाबी

दोनों दलों का पुराना रिकॉर्ड BJP के लिए उम्मीद बढ़ा रहा है। 1997 में गठबंधन ने बड़ी जीत दर्ज की थी। अकाली दल ने 75 और BJP ने 18 सीटें जीती थीं। 2007 में अकाली दल को 49 और BJP को 19 सीटें मिलीं। इसके बाद 2012 में दोनों दलों ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इतिहास रचा। उस चुनाव में अकाली दल ने 56 और BJP ने 12 सीटें जीती थीं।

AAP को घेरने की BJP की रणनीति क्या है?

BJP अब पंजाब की भगवंत मान सरकार पर भ्रष्टाचार, शासन की विफलता और चुनावी वादे पूरे न करने के आरोपों को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी केंद्र की योजनाओं और पंजाब को दी गई आर्थिक सहायता को भी चुनावी अभियान में प्रमुखता से रख सकती है। BJP रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ सिख समुदाय से जुड़े पंथिक मुद्दों और सामाजिक विश्वास को भी अपने संभावित विजन डॉक्यूमेंट में शामिल करने पर विचार कर रही है।

Scroll to load tweet…

भ्रष्टाचार से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य तक निशाना

BJP का दावा है कि पंजाब सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने वादे पर खरी नहीं उतरी। पार्टी के अनुसार, पिछले साल भ्रष्टाचार के मामलों में 144 सरकारी अधिकारी गिरफ्तार हुए और 43 पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़े गए। शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी BJP सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के करीब 60 प्रतिशत पद खाली हैं। राज्य में 16 मेडिकल कॉलेज खोलने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक एक भी नया कॉलेज नहीं खुला।

मुफ्त योजनाओं से रोजगार की राजनीति तक?

BJP पंजाब की अर्थव्यवस्था को मुफ्त सुविधाओं से हटाकर रोजगार और संपत्ति निर्माण की दिशा में ले जाने का मॉडल पेश कर सकती है। महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण जैसे वादों पर भी पार्टी विचार कर रही है। केंद्र की योजनाओं को भी BJP अपने अभियान का हिस्सा बनाएगी। पार्टी के अनुसार, PM-किसान के तहत 18 लाख किसानों को ₹7,596.84 करोड़, जबकि ग्रामीण विकास और MGNREGA के तहत ₹8,144.11 करोड़ का फंड दिया गया। अब नजर इस बात पर है कि क्या BJP और अकाली दल सचमुच पुरानी साझेदारी फिर बहाल करते हैं और क्या यह गठबंधन पंजाब में AAP के खिलाफ बड़ा चुनावी समीकरण बना पाएगा?