सीएम धामी ने देहरादून में सशक्त बहना उत्सव के SHG स्टॉलों का उद्घाटन किया और महिलाओं से राखियां खरीदीं। 28-29 अगस्त को रोडवेज में महिलाओं की मुफ्त यात्रा होगी।
देहरादून। उत्तराखंड में महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की पहल अब रक्षाबंधन के मौके पर भी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून में मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत लगाए गए स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का उद्घाटन किया। उन्होंने स्टॉलों का जायजा लिया और महिलाओं से बातचीत कर उनके काम की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार की गई राखियां भी खरीदीं। उन्होंने महिलाओं के हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की कोशिशों की तारीफ करते हुए कहा कि इस तरह की पहल महिलाओं को सिर्फ बाजार नहीं देती, बल्कि उनके उत्पादों को पहचान भी दिलाती है।
Sashakt Behna Utsav Yojana: महिलाओं को मिला रोजगार और बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त बहना उत्सव योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं को आजीविका के अवसर मिले हैं। पिछले साल भी कई महिलाओं ने इस पहल का लाभ उठाया था। योजना का मूल उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को एक मंच देना और उन्हें स्थानीय बाजार से जोड़ना है।
योजना के तहत महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले स्थानीय उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें राखियों के अलावा स्थानीय खाद्य उत्पाद, मिलेट्स से जुड़े सामान, ऊनी वस्त्र, अचार, जैम और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद भी बाजार का हिस्सा बन रहे हैं। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं घर या गांव से ही छोटे स्तर पर उत्पादन करती हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्पाद बेचने और उचित बाजार तक पहुंच बनाने की रहती है।
Uttarakhand Women Empowerment: SHG से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर
उत्तराखंड सरकार महिला सशक्तिकरण को स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर लगातार जोर दे रही है। राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 68 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से 5 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सशक्त बहना उत्सव के तहत करीब 2,000 स्टॉल लगाए गए और महिलाओं के उत्पादों का लगभग 5.5 करोड़ रुपये का विपणन हुआ।
इसी कड़ी में ‘लखपति दीदी’ पहल भी महिला आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा हिस्सा है। सरकार के अनुसार 1.65 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाओं के उत्पादों को ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे ब्रांड के जरिए बड़े बाजार तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है। यानी फोकस अब केवल सहायता देने तक नहीं है। उत्पादन, बाजार, ब्रांडिंग और कमाई—इन चारों को एक साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है।
Raksha Bandhan 2026: धामी ने महिलाओं के साथ मनाया त्योहार
इससे एक दिन पहले रविवार को मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून में दो रक्षाबंधन कार्यक्रमों में महिलाओं के साथ पर्व मनाया। पहला कार्यक्रम जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म में और दूसरा हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित हुआ। दोनों कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। धामी ने सभी महिलाओं को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और उनके स्नेह तथा आशीर्वाद के लिए आभार जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के बीच पहुंचकर उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे कोई भाई अपने ही घर और परिवार में वापस आया हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाओं से मिलने वाला विश्वास और स्नेह उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और यही उन्हें लगातार जनता की सेवा करने के लिए प्रेरित करता है।
Raksha Bandhan पर महिलाओं के लिए मुफ्त रोडवेज यात्रा
रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने महिलाओं के लिए एक और बड़ी घोषणा की। 28 और 29 अगस्त 2026 को उत्तराखंड रोडवेज की बसों में महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने का ऐलान किया गया है। इसका उद्देश्य रक्षाबंधन पर महिलाओं को अपने मायके और परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब रक्षाबंधन को लेकर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में महिला स्वयं सहायता समूह भी स्थानीय उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शनी के जरिए अपनी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं।
‘रक्षाबंधन सिर्फ त्योहार नहीं, जिम्मेदारी का भी संदेश’- CM पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन को भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रेम, विश्वास, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। उनके मुताबिक, रिश्ते सिर्फ अधिकारों से मजबूत नहीं होते, बल्कि जिम्मेदारियां निभाने से भी मजबूत होते हैं। भाई का बहन की सुरक्षा के प्रति दायित्व और बहन का भाई पर भरोसा इस रिश्ते को और गहरा बनाता है।
धामी ने इस मौके पर महिलाओं के सम्मान को सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का आधार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों की बुनियाद है। परिवार और समाज को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वही वास्तव में समृद्ध और संस्कारित माना जा सकता है।
महिला सशक्तिकरण पर सरकार का व्यापक फोकस
उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की नीति अब रोजगार और आय के साथ सामाजिक अधिकारों से भी जोड़ी जा रही है। सरकार पहले भी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और समान नागरिक संहिता के जरिए महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा को अपनी प्रमुख पहलों में गिनाती रही है।
दूसरी ओर, स्वयं सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय उत्पादन, कृषि, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जोड़ने पर जोर है। सरकार के अनुसार करीब 3 लाख महिला किसान विभिन्न आजीविका और कौशल विकास पहलों से जुड़ रही हैं। इस लिहाज से ‘सशक्त बहना उत्सव’ केवल रक्षाबंधन से जुड़ा आयोजन नहीं रह जाता। यह ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को ग्राहक तक पहुंचाने, छोटे उद्यमों को बाजार देने और महिलाओं की कमाई बढ़ाने का एक व्यावहारिक मंच बन रहा है।
‘लोकल फॉर वोकल’ को मिल रहा स्थानीय महिलाओं का सहारा
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में स्थानीय उत्पादों की बड़ी विविधता है। समस्या अक्सर उत्पादन की नहीं, बल्कि बाजार और ब्रांडिंग की होती है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे ब्रांड और सशक्त बहना उत्सव जैसे बाजार मंचों से स्थानीय उत्पादों को राज्य से बाहर तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है।
यही मॉडल अगर लगातार मजबूत होता है तो इसका सीधा फायदा ग्रामीण परिवारों की आय, महिला उद्यमिता और स्थानीय रोजगार को मिल सकता है। मुख्यमंत्री धामी का संदेश भी इसी दिशा में है—महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी न रहें, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की सक्रिय भागीदार बनें।


