HR का ऑफर सुनकर रह गया दंग, उम्मीदवार ने खोली हायरिंग सिस्टम की पोल

Published : Jun 05, 2026, 10:55 AM IST
Senior Management Job

सार

Reddit Viral Post: डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल को कंपनी ने कितने प्रतिशत सैलरी कट के साथ ऑफर दिया था? कंपनी ने उम्मीदवार के फ्रीलांसिंग अनुभव को किस तरह से देखा और उसका क्या असर पड़ा? उम्मीदवार ने अपनी पिछली सैलरी के मुकाबले कितनी बढ़ोतरी की मांग की थी?

एक नौकरी ढूंढ रहे शख्स को जब सीनियर मैनेजमेंट पद के लिए 27.5% सैलरी कट का ऑफर मिला, तो उसने अपना अनुभव ऑनलाइन शेयर कर दिया। इसके बाद इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है। कई प्रोफेशनल्स सवाल उठा रहे हैं कि क्या कुछ कंपनियों की हायरिंग पॉलिसी कैंडिडेट की काबिलियत परखने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें कम सैलरी देने के बहाने ढूंढने के लिए बनाई जाती है।

इस कैंडिडेट ने रेडिट के r/IndianWorkplace फोरम पर अपनी आपबीती सुनाई। पोस्ट का टाइटल था, "सीनियर रोल के लिए 27.5% सैलरी कट का ऑफर मिला। जानिए कंपनी ने इसे कैसे सही ठहराया।" डिजिटल मार्केटिंग में 10 साल का अनुभव रखने वाले इस प्रोफेशनल ने बताया कि उन्होंने हाल ही में एक कंपनी में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू दिया था। यह कंपनी सालाना 8 करोड़ रुपये का मार्केटिंग बजट मैनेज करती है। उन्हें उम्मीद थी कि सैलरी पर मोलभाव होगा, लेकिन कंपनी ने जो फाइनल ऑफर दिया, उसके पीछे के तर्क सुनकर वह हैरान रह गए।

रेडिट यूजर के मुताबिक, कंपनी की पहली आपत्ति उनके फ्रीलांसिंग अनुभव को लेकर थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्लाइंट्स के साथ रिमोटली काम किया था, जिसे वह अपनी इंडस्ट्री का कीमती अनुभव मानते थे। लेकिन कंपनी ने कथित तौर पर उस अनुभव को नौकरी का हिस्सा मानने की बजाय 'करियर गैप' बता दिया।

 

 

उन्होंने दावा किया कि कंपनी के इस एक फैसले ने सारी बातचीत बिगाड़ दी। चूंकि फ्रीलांसिंग को 'गैप' मान लिया गया, इसलिए कंपनी ने सैलरी तय करते समय उनकी फ्रीलांसिंग से हुई कमाई पर विचार करने से ही इनकार कर दिया। साथ ही, रिक्रूटर्स ने उनकी पिछली नौकरी की सैलरी को भी पैमाना नहीं बनाया। इस तरह, बातचीत के दौरान उनके पास सैलरी के लिए कोई 'रेफरेंस पॉइंट' ही नहीं बचा।

कैंडिडेट ने आगे बताया कि उन्होंने 8 साल बेंगलुरु में काम करने के बाद 2024 में कोलकाता में शिफ्ट किया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पिछली रिमोट जॉब में उन्हें बेंगलुरु की कमाई के मुकाबले पहले ही 50% कम सैलरी मिल रही थी। इसके बावजूद, नई कंपनी का ऑफर उस घटी हुई सैलरी से भी 27.5% कम था।

कैंडिडेट ने दावा किया कि वह अपनी पिछली सैलरी से सिर्फ 8.7% ज़्यादा की मांग कर रहे थे और उन्होंने छह महीने के परफॉर्मेंस रिव्यू का विकल्प भी दिया था। फिर भी, रिक्रूटर्स ने कथित तौर पर उनसे कहा कि उनकी प्रोफाइल उस सैलरी को जस्टिफाई नहीं करती जो वह मांग रहे हैं।

पोस्ट के अनुसार, उनसे कहा गया कि वह "कोलकाता में बैंगलोर वाली सैलरी" मांग रहे हैं। कैंडिडेट ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उनकी उम्मीदें कोलकाता के मौजूदा मार्केट स्टैंडर्ड पर आधारित थीं और उन्होंने हायरिंग प्रोसेस के हर चरण से पहले पूरी पारदर्शिता से अपनी उम्मीदें बताई थीं।

अपने अनुभव पर उन्होंने लिखा, "सबसे ज्यादा चुभने वाली बात पैसा नहीं है। बल्कि यह है कि उनकी हर पॉलिसी किसी की काबिलियत का सही मूल्यांकन करने के लिए नहीं, बल्कि कम भुगतान करने का कारण खोजने के लिए बनाई गई थी।" बाद में एक अपडेट में, कैंडिडेट ने बताया कि कंपनी के एचआर हेड ने उनसे एक नए प्रस्ताव के साथ संपर्क किया। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अपडेटेड पैकेज भी उनकी पिछली सैलरी से 5,000 रुपये कम था, और वे उन्हें यह ऑफर स्वीकार करने के लिए मना रहे थे।

उन्होंने यह भी कहा कि आखिर में यह रोल एक रिटेनर बेसिस पर दिया जा रहा था, जिससे उनका यह विश्वास और पक्का हो गया कि शहर में कई कंपनियों के सैलरी स्ट्रक्चर कर्मचारियों के बजाय मालिकों के पक्ष में होते हैं। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और इस पर प्रोफेशनल्स ने जमकर अपनी राय दी। लोगों ने सैलरी नेगोशिएशन, हायरिंग के तरीकों और वर्कप्लेस कल्चर पर बहस शुरू कर दी। कई यूजर्स ने तर्क दिया कि किसी कैंडिडेट को यह कहना कि आपकी प्रोफाइल मांगी गई सैलरी के लायक नहीं है, एक गैर-पेशेवर तरीका है जो शुरुआत में ही भरोसे को खत्म कर सकता है।

दूसरों ने सुझाव दिया कि सैलरी पर चर्चा पिछली कमाई के बजाय कैंडिडेट के स्किल्स, अनुभव और बाजार की मांग के आधार पर होनी चाहिए। कुछ लोगों ने रेडिट यूजर को यह ऑफर पूरी तरह से ठुकराने की सलाह दी, यह तर्क देते हुए कि नेगोशिएशन के दौरान कंपनी का रवैया अक्सर नौकरी ज्वाइन करने से बहुत पहले ही उसके कल्चर और संगठनात्मक मुद्दों को उजागर कर देता है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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