
करियर डेस्क। हर साल 11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। यह देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के मौके पर मनाया जाता है। मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 1888 में मक्का में हुआ था। उनके पिता बहुत बड़े विद्वान थे। वे दिल्ली में रहते थे, लेकिन 1857 के गदर के दौरान मक्का चले गए। 1890 में वे अपने परिवार के साथ भारत लौटे। अबुल कलाम आजाद की शिक्षा यहीं हुई। उन्होंने उर्दू, हिंदी, फारसी, बंगाली, अरबी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में महारत हासिल की। अबुल कलाम आजाद की शादी 13 साल की उम्र में जुलीखा बेगम नाम की लड़की से हुई।
मौलाना अबुल कलाम आजाद ब्रिटिश राज के विरोधी थे। उन्होंने पत्रकारिता के जरिए भारत में ब्रिटिश शासन का विरोध शुरू किया। बाद में वे खिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेता बने और महात्मा गांधी के निकट संपर्क में आए। इस दौरान आजाद ने गांधी के अहिंसक सविनय अवज्ञा के विचारों का समर्थन किया और 1919 रौलट एक्ट के विरोध में शुरू हुए असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महज 35 साल की उम्र में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इतनी कम उम्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बनने वाले वे सबसे पहले व्यक्ति थे। देश के विभाजन और पाकिस्तान के निर्माण का विरोध करने वाले वे सबसे प्रमुख मुस्लिम नेता थे। अबुल कलाम आजाद ताउम्र प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सबसे करीबी, विश्वासपात्र, समर्थक और सलाहकार बने रहे। मौलाना अबुल कलाम आजाद साल 1947 से 1958 तक पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री रहे। 22 फरवरी, 1958 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
मौलाना अबुल कलाम आजाद के सम्मान में पूरे देश में कई संस्थान उनके नाम पर स्थापित किए गए। इनमें प्रमुख संस्थान हैं नई दिल्ली में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, भोपाल में मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और हैदराबाद में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय। दिल्ली में मौलाना आजाद सेंटर फॉर एलिमेंटरी एंड सोशल एजुकेशन है, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आता है। इसके अलावा मौलाना आजाद कॉलेज और मौलाना अबुल कलाम आजाद एशियाई अध्ययन संस्थान हैं। कोलकाता में मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मौलाना आजाद पुस्तकालय और जम्मू में मौलाना आजाद स्टेडियम है।
उनके निवास स्थान को मौलाना आजाद संग्रहालय बना दिया गया है। साल 1992 में एक स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
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