Success Story: किस्मत को हराकर निरंजन जाधव ने ट्रैक पर लिख डाली जीत की कहानी

Published : Feb 16, 2026, 09:18 AM IST
Success Story: किस्मत को हराकर निरंजन जाधव ने ट्रैक पर लिख डाली जीत की कहानी

सार

9 साल पहले ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने वाले निरंजन जाधव आज एक व्हीलचेयर एथलीट हैं। उन्होंने कोच्चि में 21.1 किमी की हाफ मैराथन पूरी की। 44 मैराथन पूरी कर चुके निरंजन, दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस की मिसाल हैं।

कोच्चि: 9 साल पहले मुंबई के विरार रेलवे स्टेशन पर एक पल में किस्मत ने निरंजन जाधव की जिंदगी में अंधेरा कर दिया। ट्रैक पार करते समय तेज रफ्तार ट्रेन ने उस 54 साल के शख्स के दोनों पैर छीन लिए। लेकिन निरंजन ने ठान लिया था कि उनकी जिंदगी खून से लथपथ उस रेल पटरी पर खत्म नहीं होगी। आज, वह दृढ़ संकल्प और संघर्ष की एक बड़ी मिसाल बन गए हैं। भले ही रेलवे ट्रैक ने उनके दोनों पैर छीन लिए, लेकिन निरंजन एथलेटिक ट्रैक पर व्हीलचेयर से कमाल कर रहे हैं। आज इंफोपार्क में हुए जी-टेक मैराथन के ट्रैक पर जब निरंजन जाधव व्हीलचेयर पर तेजी से आगे बढ़े, तो सभी ने पूरे दिल से उनके लिए तालियां बजाईं। राज्य की सबसे बड़ी नशा-विरोधी मैराथन में निरंजन ने युवा सितारों के साथ 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन में हिस्सा लिया। निरंजन सिर्फ एक एथलीट नहीं, बल्कि कभी न हारने वाले जज्बे की जीती-जागती मिसाल हैं। एक ऐसे योद्धा जिन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि शारीरिक अक्षमताएं मन की ताकत के आगे झुक जाती हैं। भारत के कई राज्यों में व्हीलचेयर पर मुकाबला कर चुके निरंजन पहली बार केरल के ट्रैक पर आए थे। निरंजन ने एशियानेट न्यूज़ ऑनलाइन को बताया कि केरल का अनुभव बहुत शानदार था।

कभी न भूलने वाला अनुभव

राज्य की सबसे बड़ी नशा-विरोधी मैराथन में निरंजन ने 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन में हिस्सा लिया। पूरी तरह से स्वस्थ युवा सितारों के साथ व्हीलचेयर पर मुकाबला करते हुए, उन्होंने सिर्फ 2 घंटे और 43 मिनट में फिनिशिंग लाइन पार कर ली। फिनिशिंग पॉइंट पर उनका इंतजार कर रहे हजारों खेल प्रेमियों ने खड़े होकर तालियां बजाकर इस योद्धा का स्वागत किया। उन्होंने एशियानेट न्यूज़ ऑनलाइन को बताया कि हादसे के बाद उन्हें अपना जीवन अस्पताल के कमरों तक सीमित रखना मंजूर नहीं था। अब तक 44 लंबी दूरी की मैराथन पूरी कर चुके निरंजन ने केरल के ट्रैक पर फिर से उतरने की इच्छा भी जताई। उन्होंने यह भी कहा कि केरल का अनुभव अविस्मरणीय है।

निरंजन अपनी जिंदगी के जरिए युवाओं को नशे के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा संदेश दे रहे हैं। वह कहते हैं, 'विकलांग लोगों को चार दीवारों के भीतर सीमित नहीं रहना चाहिए। दुनिया दयालु है, हमारे चारों ओर अवसर हैं, हमें उनका साहसपूर्वक उपयोग करना चाहिए।' हादसे से पहले एक आम आदमी रहे निरंजन आज दुनिया के सामने एक असाधारण व्यक्तित्व हैं। वह हर मैराथन ट्रैक को इसलिए जीतते हैं ताकि उनकी तरह जिंदगी में हार मान चुके हजारों लोगों को फिर से उठकर चलने की ताकत मिल सके।

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About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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