Oracle Job Offer Withdrawal Row: IIT-NIT छात्रों के जॉब ऑफर रद्द? सोशल मीडिया पर छलका दर्द, प्लेसमेंट सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

Published : May 15, 2026, 11:32 AM ISTUpdated : May 15, 2026, 12:28 PM IST
Oracle Offer Withdrawal Row

सार

Oracle Job Offer Withdrawal: ऑरेकल द्वारा कथित तौर पर आईआईटी और एनआईटी छात्रों के नौकरी ऑफर वापस लेने का मामला सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर छात्रों ने मानसिक दबाव, प्लेसमेंट संकट और वन स्टूडेंट, वन ऑफर नीति पर सवाल उठाए हैं। जानिए कैसे टेक सेक्टर की छंटनी अब कैंपस प्लेसमेंट को प्रभावित कर रही है।

Oracle Offer Withdrawal Row: ऑरेकल द्वारा कथित तौर पर आईआईटी और एनआईटी जैसे देश के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों के जॉब ऑफर वापस लेने का मामला सामने आने के बाद, प्लेसमेंट सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए दावों और रिपोर्ट्स ने कैंपस प्लेसमेंट सिस्टम, वन स्टूडेंट, वन ऑफर नीति और बड़ी टेक कंपनियों की भर्ती रणनीति पर नई बहस छेड़ दी है। मामला सुर्खियों में है। हजारों छात्रों के लिए सपना मानी जाने वाली पीपीओ यानी प्री-प्लेसमेंट ऑफर अब अनिश्चितता का कारण बनती दिख रही है। ऐसे समय में जब टेक सेक्टर पहले से छंटनी और धीमी भर्ती के दौर से गुजर रहा है, ऑरेकल से जुड़ी यह खबर छात्रों के करियर और मानसिक दबाव दोनों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

ऑरेकल पर ऑफर वापस लेने के आरोप, सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद

मामला तब चर्चा में आया जब एनआईटी के छात्र आदित्य कुमार बरावल ने लिंक्डइन पर पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि ऑरेकल ने उनका पीपीओ वापस ले लिया है। छात्र के मुताबिक कंपनी ने आंतरिक बदलाव और भर्ती क्षमता में कमी का हवाला दिया। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह झटका मुश्किल जरूर है, लेकिन वह सीखने और आगे बढ़ने पर फोकस बनाए हुए हैं। इसी बीच रेडिट पर भी कई पोस्ट वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि अलग-अलग आईआईटी के करीब 50 छात्रों के ऑफर प्रभावित हुए हैं। आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी कानपुर और आईआईटी खड़गपुर जैसे संस्थानों का नाम भी चर्चाओं में सामने आया। हालांकि, कंपनी की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

टेक छंटनी के बीच क्यों बढ़ रही है कैंपस प्लेसमेंट की अनिश्चितता?

पिछले कुछ महीनों में वैश्विक टेक इंडस्ट्री में बड़े स्तर पर लागत कटौती देखने को मिली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑटोमेशन, घटती वैश्विक मांग और कंपनी पुनर्गठन के चलते कई कंपनियां भर्ती रोकने या कर्मचारियों की संख्या कम करने की राह पर हैं। ऑरेकल को लेकर भी हाल में बड़े पैमाने पर छंटनी की खबरें सामने आई थीं। ऐसे माहौल में कंपनियां भविष्य की भर्ती प्रतिबद्धताओं को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब कंपनियां कैंपस भर्ती में बल्क हायरिंग मॉडल से हटकर जरूरत आधारित चयन की तरफ बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर नए ग्रेजुएट्स पर पड़ रहा है।

वन स्टूडेंट- वन ऑफर नीति अब छात्रों के लिए बन रही जोखिम?

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा आईआईटी और कई बड़े संस्थानों में लागू वन स्टूडेंट-वन ऑफर नियम की हो रही है। इस नीति के तहत छात्र एक बार किसी कंपनी का ऑफर स्वीकार कर लेता है, तो उसे दूसरी कंपनियों के लिए बैठने की अनुमति नहीं मिलती। सामान्य परिस्थितियों में यह सिस्टम प्लेसमेंट वितरण को संतुलित रखने के लिए बनाया गया था, लेकिन मौजूदा हालात में यही नियम कई छात्रों के लिए संकट बन गया है। ऑरेकल के ऑफर वापस होने के बाद ऐसे कई छात्र बिना किसी बैकअप विकल्प के रह गए, क्योंकि प्लेसमेंट सीजन के दौरान वे दूसरी कंपनियों के अवसर पहले ही छोड़ चुके थे।

छात्रों में बढ़ रहा मानसिक दबाव, सोशल मीडिया पर छलका दर्द

प्लेसमेंट सीजन को इंजीनियरिंग छात्रों के लिए सबसे तनावपूर्ण दौर माना जाता है। महीनों की कोडिंग तैयारी, इंटर्नशिप, इंटरव्यू और सीजीपीए दबाव के बाद जब फाइनल जॉब ऑफर मिलता है, तो उसे करियर सिक्योरिटी की तरह देखा जाता है। ऐसे में ऑफर वापस लेने की खबरों ने छात्रों के बीच चिंता और निराशा बढ़ा दी है। रेडिट पर वायरल पोस्ट्स में कई यूजर्स ने लिखा कि छात्रों ने अपनी पूरी प्लेसमेंट रणनीति एक ऑफर के भरोसे बनाई थी। अब डिग्री पूरी होने के बाद अचानक ऑफर रद्द होने की स्थिति में कई छात्रों को कम वेतन पैकेज या ऑफ-कैंपस नौकरी तलाशने की तरफ जाना पड़ सकता है।

क्या बदलना होगा कैंपस प्लेसमेंट सिस्टम?

यह मामला अब सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पूरे कैंपस भर्ती सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थानों को अब प्लेसमेंट नीतियों में लचीलापन लाना होगा। खासतौर पर उन मामलों में जहां कंपनियां जॉइनिंग डेट आगे बढ़ाएं या ऑफर वापस लें। कई विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि छात्रों को बैकअप प्लेसमेंट विंडो दी जाए। ऑफर वापस लेने पर कंपनियों की जवाबदेही तय हो। कॉलेज आपातकालीन भर्ती अभियान आयोजित करें और मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था मजबूत की जाए।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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