ParikshaPeCharcha: छात्रा बोली- कुछ सब्जेक्ट से मैं पीछा छुड़ाने में लगी रहती हूं, पीएम मोदी ने दिया ऐसा जवाब

Published : Apr 07, 2021, 08:49 PM ISTUpdated : Apr 07, 2021, 09:15 PM IST
ParikshaPeCharcha: छात्रा बोली- कुछ सब्जेक्ट से मैं पीछा छुड़ाने में लगी रहती हूं, पीएम मोदी ने दिया ऐसा जवाब

सार

पीएम मोदी ने एक सवाल के जवाब में कहा- खाली समय एक अवसर है। आपके दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए, नहीं तो ज़िंदगी रोबोट की तरह हो जाती है। खाली समय में आप ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे आपको सुख मिलता हो। आपको यह भी ध्यान रखना है कि खाली समय में हमें क्या नहीं करना चाहिए।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘परीक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दुनिया भर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद कर रहे हैं। पीएम ने वीडियो जारी कर छात्रों से कहा कि वे परीक्षा को अवसरों के तौर पर देखें, न कि जीवन के सपनों के अंत के तौर पर। प्रधानमंत्री बच्चों के साथ दोस्त के तौर पर बातचीत कर रहे हैं और इसके साथ ही डिजिटल कार्यक्रम में शिक्षकों व अभिभावकों से भी संवाद कर रहे हैं। इस दौरान एक छात्र के सवाल पर पीएम मोदी ने शर्ट का उदाहरण देते हुए जवाब दिया। 

क्या था सवाल
दरअसल, अरुणाचल प्रदेश की छात्रा पुन्यो सुन्या ने पीएम मोदी से सवाल किया कि कुछ सब्जेक्ट से मैं पीछा छुड़ाने में लगी रहती हूं, इसे कैसे ठीक करें?

पीएम मोदी ने दिया ऐसा जवाब
पीएम मोदी ने कहा- यह कुछ अलग तरह का विषय है। आप ने किसी खास विषय से डर की बात कही। आप ऐसे अकेले नहीं हैं। दुनिया में एक भी इंसान ऐसा नहीं है जिस पर यह बात लागू नहीं है। मान लीजिए आपके पास बहुत बढ़िया 5-6 शर्ट हैं। इनमें से एक-दो ऐसी हैं जो बार बार पहनते हैं। कई बार तो मां-बाप भी इन चीजों को लेकर गुस्सा करते हैं कि कितनी बार इसे पहनोगे।

पसंद-नापसंद मनुष्य का व्यवहार है। इसमें डर की क्या बात है। होता क्या है जब हमें कुछ नतीजे ज्यादा अच्छे लगने लगते हैं उनके साथ आप सहज हो जाते हैं। जिन चीजों के साथ आप सहज नहीं होते, उनके तनाव में 80% एनर्जी उनमें लगा देते हैं। अपनी एनर्जी को सभी विषयों में बराबरी से बांटना चाहिए। दो घंटे हैं तो सभी को बराबर समय दीजिए।

परीक्षा आंकलन नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि आजकल बच्चों का आंकलन परीक्षा के नतीजों तक ही सीमित हो गया है। परीक्षा में अंकों के अलावा भी बच्चों में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें अभिभावक देख नहीं पाते। परीक्षा एक प्रकार से लंबी जिंदगी जीने का अवसर है। समस्या तब होती है, जब हम परीक्षा को जीवन-मरण का सवाल बना देते हैं। 

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