पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के कोर्स में बदलाव, शामिल हुए ये जरूरी विषय

Published : Sep 18, 2019, 05:02 PM ISTUpdated : Sep 18, 2019, 05:52 PM IST
पॉलिटेक्निक डिप्लोमा के कोर्स में बदलाव, शामिल हुए ये जरूरी विषय

सार

 पहले 200 क्रेडिट होते थे और इसे घटाकर 120 कर दिया गया है। इसमें दो इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाया गया है जिसमें पहला उद्योगों से जुड़ा है और दूसरा स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया, उन्नत भारत जैसे भारत सरकार के कार्यक्रम से संबंधित है।

नयी दिल्ली. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद :एआईसीटीई: ने पॉलीटेक्निक शिक्षा के लिये नया डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार किया है जिसमें एक क्रेडिट खेल और योग पर रखा गया है। साथ ही पाठ्यक्रम में क्रेडिट की संख्या को 200 से घटा कर 120 कर दी गई है।

200 के मुकाबले अब होंगे सिर्फ 120 क्रेडिट 
पाठ्यक्रम तैयार करने वाली आल इंडिया बोर्ड आफ टेक्निशियन एजुकेशन के अध्यक्ष प्रो. सतहंस ने भाषा को बताया,  तकनीशियन शिक्षा पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये शिक्षाविदों एवं उद्योगों के साथ एक वर्ष तक चर्चा की गई। इसमें क्रेडिट की संख्या को कम किया गया है। पहले 200 क्रेडिट होते थे और इसे घटाकर 120 कर दिया गया है। इसमें दो इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाया गया है जिसमें पहला उद्योगों से जुड़ा है और दूसरा स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया, उन्नत भारत जैसे भारत सरकार के कार्यक्रम से संबंधित है। उल्लेखनीय है कि एक कोर्स के लिये छात्र के सम्पर्क घंटे की तय सीमा को क्रेडिट कहा जाता है।

क्रेडिट खेल और योग का विषय भी शामिल 
अधिकारी ने बताया कि नये पाठ्यक्रम में पहले सेमेस्टर में एक क्रेडिट खेल और योग विषय पर रखा गया है जिसका उद्देश्य शारीरिक एवं मानसिक तंदरूस्ती की आदत का विकास करना है। इसके अलावा कोर्स में सामाजिक रूप से प्रासंगिक विषयों को भी शामिल किया गया है जिसमें पर्यावरण विज्ञान, कचरा प्रबंधन एवं पुन: चक्रण, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑर्गेनिक फार्मिंग परियोजनाएं शामिल हैं ।

अनिल सहस्त्रबुद्धे भी रहे मौजूद
मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बुधवार को तकनीशियन शिक्षा पर डिप्लोमा कोर्स का शुभारंभ किया । इस अवसर पर एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे भी मौजूद थे। एआईसीटीई ने नये पाठ्यक्रम में 7 से 10 सप्ताह का ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप अनिवार्य बनाया है ताकि छात्रों को उद्योगों की समझ हो सके और वे अभ्यास कर सकें। इसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल में सम्पर्क घंटे के संदर्भ में संतुलन स्थापित करने पर जोर दिया गया है ।

नए पाठ्यक्रम में जरूरी है विशेषज्ञों का लेक्चर 
नये पाठ्यक्रम में प्रत्येक सेमेस्टर में उद्योगों के विशेषज्ञों के कम से कम एक लेक्चर को अनिवार्य बनाया गया है। अंतिम वर्ष में एक सप्ताह का उद्योग से जुड़ी कार्यशाला आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।
(यह खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की है। एशियानेट हिंदी की टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

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