स्कूल बढ़ाए मनमानी फीस या मांगे री-एडमिशन चार्ज? दिल्ली, यूपी, बिहार वाले तुरंत डायल करें ये सरकारी नंबर

Published : May 29, 2026, 12:01 PM IST
School Fees

सार

How to Complain Against Private School Fees: क्या आपका स्कूल भी मनमानी फीस बढ़ा रहा है? क्या आपको भी किसी दुकान से ही महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है? बच्चों के स्कूलों की मनमानी की शिकायत कहां करें? क्या इसके लिए कोई सरकारी नंबर है? 

School Fees Hike Complaint Process: नया सेशन शुरू होते ही ज्यादातर पैरेंट्स की सबसे बड़ी टेंशन होती है, स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी। हर साल किताबों, यूनिफॉर्म और री-एडमिशन के नाम पर जेब खाली की जाती है और विरोध करने पर बच्चों के भविष्य का डर दिखाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में स्कूलों की इस मनमानी को रोकने के लिए बेहद सख्त कानूनी नियम और कमेटियां बनी हुई हैं? कोई भी प्राइवेट स्कूल अपनी मर्जी से जब चाहे जितनी चाहे फीस नहीं बढ़ा सकता है। अगर आपके बच्चे का स्कूल भी इस साल हद से ज्यादा फीस बढ़ा रहा है, तो डरने के बजाय कानून की मदद लें। आइए जानते हैं ऐसे मामलों में पैरेंट्स के पास क्या-क्या अधिकार और कानूनी रास्ते मौजूद हैं।

स्कूलों में फीस बढ़ाने का नियम क्या है?

देश के लगभग हर राज्य में 'प्राइवेट स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट' लागू है। इस कानून के तहत नियम बिल्कुल साफ हैं: कोई भी स्कूल एक तय लिमिट (आमतौर पर सालाना 7% से 10% से ज्यादा नहीं) से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता। वह भी तब, जब स्कूल शिक्षकों की सैलरी बढ़ा रहा हो या इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ा सुधार कर रहा हो। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश केनुसार, स्कूल शिक्षा देने के लिए हैं, न कि कमर्शियल बिजनेस या मुनाफा कमाने के लिए। स्कूल अपनी बचत को सिर्फ शिक्षा के स्तर को सुधारने में ही लगा सकते हैं।

'कम्पलसरी री-एडमिशन फीस' पूरी तरह गैरकानूनी है

ज्यादातर प्राइवेट स्कूल हर साल नया सेशन शुरू होते ही 'री-एडमिशन फीस' (Annual Charges) के नाम पर एक मोटी रकम मांगते हैं। अगर आपका बच्चा उसी स्कूल में अगली क्लास में जा रहा है, तो हर साल री-एडमिशन के नाम पर पैसे वसूलना पूरी तरह गैरकानूनी है। एडमिशन फीस सिर्फ एक बार (शुरुआती एडमिशन के वक्त) ही ली जा सकती है। इसके खिलाफ आप सीधे आवाज उठा सकते हैं।

स्कूल से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का कोई दबाव नहीं

CBSE और राज्य बोर्ड्स के सख्त निर्देश हैं कि कोई भी स्कूल पैरेंट्स को किसी खास वेंडर से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। स्कूल को किताबों और यूनिफॉर्म के डिजाइन-पब्लिशर की लिस्ट सार्वजनिक करनी होगी, ताकि पैरेंट्स उन्हें बाहर बाजार से सस्ते दामों पर खरीद सकें।

स्कूल की मनमानी के खिलाफ कहां और कैसे करें शिकायत?

पैरेंट्स एसोसिएशन (PTA) की मदद लें

सबसे पहले स्कूल की 'पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन' को साथ लें। जब 50 या 100 पैरेंट्स एक साथ लिखित में विरोध दर्ज कराते हैं, तो स्कूल प्रशासन को झुकना ही पड़ता है।

DFRC के पास जाएं

हर जिले में एक DFRC (District Fee Regulatory Committee) होती है, जिसके अध्यक्ष जिले के कमिश्नर या डीएम होते हैं। आप सीधे इस कमेटी में स्कूल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। दोषी पाए जाने पर स्कूल पर लाखों का जुर्माना लग सकता है और उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है।

शिक्षा विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत

आप अपने राज्य के शिक्षा विभाग (Education Department) की आधिकारिक वेबसाइट या मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

बाल अधिकार आयोग (NCPCR)

अगर स्कूल फीस न देने पर बच्चे को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है या क्लास में बैठने से रोकता है, तो यह 'राइट टू एजुकेशन' (RTE) का उल्लंघन है। आप तुरंत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत कर सकते हैं।

शिक्षा विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कर सकते हैं शिकायत

दिल्ली- 1800-11-6888

यूपी- 1800-180-5310

बिहार- 1800-345-4444

महाराष्ट्र- 1800-233-7955

राजस्थान- 181

मध्यप्रदेश- 181

हरियाणा- 1800-180-4179

उत्तराखंड- 1800-180-4275

 

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