
School Fees Hike Complaint Process: नया सेशन शुरू होते ही ज्यादातर पैरेंट्स की सबसे बड़ी टेंशन होती है, स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी। हर साल किताबों, यूनिफॉर्म और री-एडमिशन के नाम पर जेब खाली की जाती है और विरोध करने पर बच्चों के भविष्य का डर दिखाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में स्कूलों की इस मनमानी को रोकने के लिए बेहद सख्त कानूनी नियम और कमेटियां बनी हुई हैं? कोई भी प्राइवेट स्कूल अपनी मर्जी से जब चाहे जितनी चाहे फीस नहीं बढ़ा सकता है। अगर आपके बच्चे का स्कूल भी इस साल हद से ज्यादा फीस बढ़ा रहा है, तो डरने के बजाय कानून की मदद लें। आइए जानते हैं ऐसे मामलों में पैरेंट्स के पास क्या-क्या अधिकार और कानूनी रास्ते मौजूद हैं।
देश के लगभग हर राज्य में 'प्राइवेट स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट' लागू है। इस कानून के तहत नियम बिल्कुल साफ हैं: कोई भी स्कूल एक तय लिमिट (आमतौर पर सालाना 7% से 10% से ज्यादा नहीं) से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता। वह भी तब, जब स्कूल शिक्षकों की सैलरी बढ़ा रहा हो या इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ा सुधार कर रहा हो। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश केनुसार, स्कूल शिक्षा देने के लिए हैं, न कि कमर्शियल बिजनेस या मुनाफा कमाने के लिए। स्कूल अपनी बचत को सिर्फ शिक्षा के स्तर को सुधारने में ही लगा सकते हैं।
ज्यादातर प्राइवेट स्कूल हर साल नया सेशन शुरू होते ही 'री-एडमिशन फीस' (Annual Charges) के नाम पर एक मोटी रकम मांगते हैं। अगर आपका बच्चा उसी स्कूल में अगली क्लास में जा रहा है, तो हर साल री-एडमिशन के नाम पर पैसे वसूलना पूरी तरह गैरकानूनी है। एडमिशन फीस सिर्फ एक बार (शुरुआती एडमिशन के वक्त) ही ली जा सकती है। इसके खिलाफ आप सीधे आवाज उठा सकते हैं।
CBSE और राज्य बोर्ड्स के सख्त निर्देश हैं कि कोई भी स्कूल पैरेंट्स को किसी खास वेंडर से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। स्कूल को किताबों और यूनिफॉर्म के डिजाइन-पब्लिशर की लिस्ट सार्वजनिक करनी होगी, ताकि पैरेंट्स उन्हें बाहर बाजार से सस्ते दामों पर खरीद सकें।
पैरेंट्स एसोसिएशन (PTA) की मदद लें
सबसे पहले स्कूल की 'पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन' को साथ लें। जब 50 या 100 पैरेंट्स एक साथ लिखित में विरोध दर्ज कराते हैं, तो स्कूल प्रशासन को झुकना ही पड़ता है।
DFRC के पास जाएं
हर जिले में एक DFRC (District Fee Regulatory Committee) होती है, जिसके अध्यक्ष जिले के कमिश्नर या डीएम होते हैं। आप सीधे इस कमेटी में स्कूल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। दोषी पाए जाने पर स्कूल पर लाखों का जुर्माना लग सकता है और उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है।
शिक्षा विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत
आप अपने राज्य के शिक्षा विभाग (Education Department) की आधिकारिक वेबसाइट या मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
बाल अधिकार आयोग (NCPCR)
अगर स्कूल फीस न देने पर बच्चे को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है या क्लास में बैठने से रोकता है, तो यह 'राइट टू एजुकेशन' (RTE) का उल्लंघन है। आप तुरंत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत कर सकते हैं।
दिल्ली- 1800-11-6888
यूपी- 1800-180-5310
बिहार- 1800-345-4444
महाराष्ट्र- 1800-233-7955
राजस्थान- 181
मध्यप्रदेश- 181
हरियाणा- 1800-180-4179
उत्तराखंड- 1800-180-4275
सरकारी नौकरियों की नोटिफिकेशन, परीक्षा तिथियां, एडमिट कार्ड, रिज़ल्ट और कट-ऑफ अपडेट्स पाएं। करियर टिप्स, स्किल डेवलपमेंट और एग्ज़ाम गाइडेंस के लिए Career News in Hindi और सरकारी भर्ती से जुड़े ताज़ा अपडेट्स के लिए Sarkari Naukri सेक्शन देखें — नौकरी और करियर जानकारी भरोसेमंद तरीके से यहीं।