
Viral Story Google Engineer Quits Job: अमेरिका की ड्रीम जॉब, लाखों रुपये की सालाना सैलरी और आरामदायक जीवन ये सब कुछ होने के बावजूद अगर आपका भविष्य एक “लॉटरी सिस्टम” पर टिका हो, तो तनाव कितना गहरा हो सकता है, इसका अंदाजा इस वायरल कहानी से लगाया जा सकता है। नेपाल मूल के एक युवा टेक इंजीनियर ने गूगल की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर स्टार्टअप शुरू किया और लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें और उनकी पत्नी को यूएस ग्रीन कार्ड मिल गया। यह कहानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है और लोग इसे संघर्ष, हिम्मत और परिवार के बलिदान की मिसाल बता रहे हैं।
इस कहानी की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ने कभी अमेरिका में हार्वर्ड और बर्कले जैसे बड़े संस्थानों में पोस्टडॉक किया था, यानी एक शानदार अकादमिक करियर था। लेकिन परिवार की हालत ठीक न होने की वजह से उन्हें सब कुछ छोड़कर नेपाल वापस आना पड़ा। नेपाल आकर उन्होंने मुश्किल हालात में अपने बच्चों को पाला। छोटा कमरा, सीमित संसाधन और लगातार संघर्ष, यही इस इंजीनियर के बचपन की हकीकत थी। यही हालात आगे चलकर उनकी सोच और मेहनत की वजह बने।
बाद में मेहनत के दम पर उन्हें गूगल में नौकरी मिल गई। सैलरी करीब 2.8 करोड़ रुपये सालाना थी और जीवन बाहर से बिल्कुल “ड्रीम लाइफ” जैसा लग रहा था। लेकिन अंदर ही अंदर एक बड़ी चिंता हमेशा बनी रहती थी H-1B वीजा की लॉटरी। चार बार कोशिश करने के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। इसका मतलब साफ था, या तो अमेरिका छोड़ना पड़ेगा, या फिर सब कुछ छोड़कर फिर से नई शुरुआत करनी होगी।
इसी तनाव भरे समय में उन्होंने एक बहुत बड़ा फैसला लिया। गूगल की सुरक्षित नौकरी छोड़ने का। सिर्फ 27 साल की उम्र में उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया और अपना स्टार्टअप शुरू करने की ओर बढ़ गए। उनके मुताबिक यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनकी पत्नी के सपोर्ट और थोड़ी सेविंग्स ने उन्हें हिम्मत दी कि वह रिस्क ले सकें।
सैन फ्रांसिस्को में कई फाउंडर्स और मेंटर्स से मिलने के बाद उन्हें एक साफ आइडिया मिला। वह ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना चाहते थे जो AI कंपनियों और बड़ी टेक टीम्स के लिए “ह्यूमन डेटा लेयर” का काम करे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक और फाउंडर मन्नत से हुई, जो पहले से इसी आइडिया पर काम कर रही थीं। दोनों ने मिलकर एक स्टार्टअप शुरू किया, जिसका नाम रखा गया Anthromind। धीरे-धीरे कंपनी को शुरुआती प्रोजेक्ट्स और निवेश भी मिलने लगे।
गूगल में काम करने, टेक फील्ड में योगदान देने और अपने काम के आधार पर उन्होंने O-1 वीजा के लिए आवेदन किया। यह वीजा खास लोगों को मिलता है जिनका काम अपने फील्ड में काफी खास माना जाता है। उनका केस मंजूर हो गया और आगे चलकर उन्हें ग्रीन कार्ड भी मिल गया।
कई साल की अनिश्चितता के बाद जब उन्हें और उनकी पत्नी को ग्रीन कार्ड मिला, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा और भावुक पल था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह सिर्फ एक डॉक्यूमेंट नहीं है, बल्कि सालों की मेहनत, तनाव और संघर्ष का अंत है। इस दौरान उन्होंने अपने पिता के बलिदान को भी याद किया।
GOT OUR GREEN CARDS TODAY! Here's the full story, no BS, and a special thank you to my dad.
My dad did his postdocs at Harvard and Berkeley when I was a toddler. Then his marriage ended, and he had to take care of my brother and me on his own.
Going back to Nepal was the only… pic.twitter.com/DK7a16enlH— Pratik Karki (@ai_evals) May 27, 2026
इस कहानी के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर हजारों कमेंट्स आने लगे। कुछ लोगों ने इसे बहुत प्रेरणादायक बताया और कहा कि यह कहानी उम्मीद देती है। वहीं कुछ लोगों ने अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम और H-1B लॉटरी पर सवाल भी उठाए।
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